हिंसक जानवरों का सामना, चाकू की नोक पर उनसे लूटपाट तक हुई, फिर भी हार नहीं मानी और रच दिया इतिहास

साल 2018 को ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से जब 20 साल की एक लड़की ने ऐसे स्पोर्ट्स को चुना, जिससे इतिहास बनाना तो दूर सोचना भी मुश्किल था। हालाँकि उसने दृढ़-इच्छाशक्ति की बदौलत वैश्विक स्तर पर साइकिलिंग जैसे खेल में भारत का लोहा मनवाया। आज वह देश की करोड़ों बेटियों के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं। 

पुणे की वेदांगी कुलकर्णी साइकिल से दुनिया का चक्कर लगाने वाली सबसे तेज एशियाई बन गई हैं। हर रोज 300 किलोमीटर की दूरी तय कर रिकॉर्ड 159 दिन में उन्होंने 14 देशों का सफर किया। इस सफ़र को पूरा करने में उन्हें 29,000 किलोमीटर की मानक दूरी तय करनी पड़ी। 

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फ़ोटो साभार: जनसत्ता

ब्रिटेन स्थित बोर्नमाउथ विश्वविद्यालय में खेल प्रबंधन की इस छात्रा ने महज़ दो साल पहले अपना अभ्यास शुरू किया था। वेदांगी ने जुलाई में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से इस सफर की शुरूआत की थी। वह इटेलियन महिला पोला गैनोती के उस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहती थीं, जिन्होंने साल 2014 में 144 दिनों में 29,000 किलोमीटर की दूरी तय की थी। वो इस रिकॉर्ड को तोड़ने में सफल नहीं हो पाईं हालाँक साइकिल चलाकर दुनिया का चक्कर लगाने वाली वह सबसे तेज एशियाई महिला बन गईं ।

उन्हें अपने सफ़र के दौरान कई अच्छे और बुरे अनुभवों का सामना करना पड़ा। मीडिया से बातचीत के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कनाडा में एक भालू उनके पीछे पड़ गया था। उन्हें कई बार बर्फ से घिरी जगहों पर अकेले रातें गुजारनी पड़ीं। यात्रा में उन्हें शून्य से 20 डिग्री कम से 37 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को झेलना पड़ा। स्पेन में यात्रा के दौरान चाकू की नोक पर उनसे लूटपाट तक हुई। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पथ पर आगे बढ़ती रहीं।

वेदांगी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने एक 19 वर्षीय बच्ची (अब 20 वर्ष) के सपने में विश्वास दिखाया और उसे पूरा करने में हमेशा एक ढाल की तरह खड़े रहें । यात्रा के दौरान वेदांगी जब भी बुरे अनुभवों से हतोत्साहित होती, उसके माता-पिता उसे मानसिक समर्थन और प्रोत्साहन प्रदान करते।

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आपको बता दें कि वेदांगी अपने इस ट्रिप के जरिए महिला सशक्तिकरण  को भी बढ़ावा देना चाहती थीं। उनका उद्देश्य महिलाओं में डर से लड़ने और जीतने का साहस पैदा करना था। 

वेदांगी वाकई में समाज के लिए एक उदाहरण है। ख़ास कर उन लोगों के लिए जो बड़े-बड़े लक्ष्य तो बनाते हैं लेकिन मुसीबतों से हार मानकर अपने कदम मोड़ लेते। उम्मीद है कि हम सभी इस युवा लड़की से प्रेरणा लेंगे और आने वाले वर्ष में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे।

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