सुविधाओं से वंचित हजारों छात्रों के लिए यह 'प्लेटफार्म कोचिंग' किसी वरदान से कम नहीं है

लक्ष्य प्राप्ति की राह में हर व्यक्ति को बाधाओं का सामना करना होता है। कभी-कभी तो मुश्किलें इस कदर बढ़ जाती है कि लोग अपने पैर पीछे मोड़ लेते हैं और सपनों का त्याग कर देते। वहीं जो पहाड़ की तरह डटकर बाधाओं का सामना करते, उन्हें सफलता अवश्य हासिल होती है। यदि आपके भीतर दृढ़-संकल्प है तो फिर रास्ते खुद-बखुद बनते चले जायेंगे। हमारी आज की कहानी मेहनत और कठिन परिश्रम से लक्ष्य प्राप्त करने वाले कुछ युवाओं को लेकर है।

बिहार का सासाराम रेलवे स्टेशन, यह सुविधाओं से वंचित सैकड़ों छात्रों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं है। आप यह पढ़कर शायद चौंक रहे होंगे लेकिन हाँ इस रेलवे प्लेटफार्म पर रोशनी में पढ़ने के लिए हर रोज़ दूर-दराज़ से लगभग 1200 छात्र आते हैं। और यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। 

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बिज़नेस लाइन में प्रकाशित एक ख़बर की माने तो इस सिलसिले की शुरुआत साल 2002 में हुई थी जब सुविधाओं से वंचित कुछ छात्र प्लेटफार्म की रोशनी में पढ़ने का अभ्यास शुरू किया। धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ता चला गया और फिर सीनियर छात्रों के समूह ने "Quiz Fraternity" नाम से एक अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के बैनर तले उन छात्रों को सहायता प्रदान की जाती है जिनके पास न तो फ़ीस देने के पैसे हैं और न ही क़िताबें खरीदने के लिए। इतना ही नहीं छात्रों को 100 प्रश्नों के लिए केवल 3 रुपये फ़ीस देनी होती है।

सबसे ख़ास बात यह है कि यहाँ न तो कोई शिक्षक हैं और न ही कोई छात्र सब लोग आपस में मिल-जुल कर पढ़ाई करते हैं और एक-दूसरे की मदद। सीनियर छात्र जो मेहनत के दम पर अब नौकरी पा चुके हैं, वे भी यहाँ आकर जूनियर छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ जॉब इंटरव्यू आदि के लिए भी तैयारी में सहायता प्रदान करते हैं। इतना ही नहीं भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने छात्रों के जुनून को देखते हुए उन्हें हर तरह से सहायता प्रदान करने की कोशिश भी की है।

द टेलीग्राफ से बातचीत करते हुए रेलवे के अधिकारी ने बताया कि अब छात्रों को पहचान पत्र भी मुहैया कराए जाने लगे हैं जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। 

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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहाँ पढ़ाई कर अबतक सैकड़ों छात्र प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी कामयाबी का झंडा पहरा चुके हैं । इन छात्रों ने साबित किया है कि यदि लक्ष्य को पाने की चाह हो तो बाधाएं कितनी भी बड़ी हो, आपके सामने उसे पराजित होना ही पड़ेगा। 

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