आख़िर क्यों मेयर बनने के बाद भी इस महिला ने घर-घर दूध पहुंचाने का अपना पेशा नहीं छोड़ा

आप अपनी जिंदगी में कितने ऊँचे पायदान पर पहुँचते हैं यह उतना मायने नहीं रखता, बर्शते की आप उस दौर को हमेशा याद रखें और उसका सम्मान करें जिसने आपको इस पायदान तक पहुँचाया है। हर व्यक्ति की जिंदगी में अच्छे और बुरे दौर आते हैं लेकिन जो अपनी जमीं को कभी नहीं भूलता, वही असली हीरो कहलाता है। यह मानना है हमारी आज के कहानी की नायिका अजिता विजयन का।

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फ़ोटो साभार: संयम

घर-घर दूध बेचने वाली 48 वर्षीया अजिता अब केरल के त्रिशुर जिले की मेयर बन चुकी हैं लेकिन उन्होंने पिछले 18 वर्षों से दूध पहुंचाने का अपना पेशा जारी रखने का फैसला किया है।  पिछले सप्ताह जब उन्होंने मेयर का पदभार ग्रहण किया तो तो कई लोगों ने उन्हें अपने पुराने पेशे को बंद  करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका मानना है कि वातानुकूलित कमरों में कुर्सियों पर बैठने के बजाय लोगों से जुड़े रहने में यह बेहद मददगार साबित होगा।

गौरतलब है कि अजिता अपनी आजीविका के लिए पिछले 18 वर्षों से लगभग 200 परिवारों को दूध पहुंचाने का काम कर रही हैं। इस धंधे ने उन्हें लोगों से जुड़ने का एक शानदार मौका दिया और धीरे-धीरे उन्होंने सबका विश्वास भी जीत लिया। पहले साल 2005 में और उसके बाद 2015 में वे सभासद बनीं। और फिर इस साल त्रिशुर जिले की मेयर के रूप में लोगों ने उनमें अपना विश्वास दिखाया।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहा कि "मेरी सुबह 4.30 बजे शुरू होती है। 5.30 बजे से लेकर मैं दो से तीन घंटे में दूध की आपूर्ति पूरी करती हूँ। निगम कार्यालय सुबह 9.30 बजे शुरू होता है और फिर मैं ऑफिस के कार्यों में लग जाती। मुझे यह लोगों से जुड़ने का बेहतर तरीका लगा। मैं जब हर सुबह लोगों से मिलती हूं तो उनमें से कुछ लोग अपनी समस्याओं और चिंताओं को मुझसे साझा भी करते हैं। यह मुझे तुरंत निर्णय लेने में मदद करता है।

आज के दौर में जब जन-प्रतिनिधि जीतने के बाद जनता को दर्शन देना तो दूर अपनी ज़ेब भरने में लग जाते हैं, वहीं अजिता जैसे लोग लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को जिंदा रखने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। वाकई में उनकी सोच सलाम करने योग्य है।

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