चलती ट्रेन में 15 वर्षीय दृष्टिहीन लड़की से छेड़-छाड़ के बाद जो हुआ, वह समाज के लिए एक सीख बन गया

सपनों के शहर मुंबई की भीड़-भाड़ के बीच लाखों लोगों के लिए आज भी लोकल ट्रेन ही यातायात के लिए सबसे सुलभ ज़रिया है। लेकिन कुछ असामाजिक तत्त्व इन लोकल ट्रेनों में कभी मासूम लड़कियों तो कभी बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वाक़या हुआ, लेकिन एक लड़की ने जिस बहादुरी से इसका सामना किया वह समाज के लिए एक सीख है।

17 दिसंबर की सुबह, एक 15 वर्षीया दृष्टिहीन लड़की अपने 56 वर्षीय पिता के साथ दादर से कल्याण के लिए सुबह 8.15 बजे ट्रेन में सवार हुए। तभी आरोपी विशाल बलिराम सिंह (24) की नजर इस 'विकलांग लड़की' और उसके वृद्ध पिता पर पड़ी। इस मौके का फायदा उठा कर उसने उस लड़की को प्रतारित करने की कोशिश की। 

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विशाल उस लड़की के पास पहुंचा और उसे छूने की कोशिश करने लगा। उसने सोचा  होगा कि लड़की दृष्टिहीन है और वह इसका फायदा उठाकर अगले स्टेशन पर चुपके से उतर जाएगा। लेकिन, यह उसकी एक बड़ी भूल थी।

जैसे ही उस लड़की को अहसास हुआ कि उससे छेड़छाड़ की जा रही थी, उसने बेहद चतुराई से इसका सामना किया। वह न तो घबराई और न ही डरी क्योंकि उसे पता था कि उसके पास इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षण । बिना किसी चेतावनी के, वह विशाल की ओर बढ़ी और उसकी कलाई को कस कर पकड़ ली। फिर उसने उसे एक बिंदु पर घुमाया कि वह अपने घुटनों के बल गिर जाए और वह दर्द से चीखने लगा। जब उसके पिता सहित अन्य सभी यात्रियों ने उस व्यक्ति को दर्द से चिल्लाते देखा, तब लड़की ने सबको उसके कारनामों से अवगत कराया।

शुक्र है कि उस लड़की को इस तरह की परिस्थिति के लिए तैयार किया गया था, जिसकी वजह से वह आरोपी को धर दबोचने में कामयाब हुई। जिस क्षण उसने अपने शरीर पर स्पर्श को महसूस किया, उसे विश्वास था कि वह अपराधी को पकड़ सकती है। यदि सभी लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जाए, तो उन्हें कभी भी भय का सामना नहीं करना पड़ेगा या यौन शोषण का शिकार होने का आघात नहीं होगा।

उस लड़की ने बताया कि “हम विशाल जैसे लोगों के लिए आसान लक्ष्य होते हैं। “हमारे स्कूल पाठ्यक्रम में हमें आत्मरक्षा और कराटे के गुर भी सिखाए जाते हैं, इसलिए हम अपनी विकलांगता के बावजूद दुनिया का सामना कर सकते हैं।

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एक रेलवे पुलिस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "उसकी तकनीक बहुत सही थी, अगर उस बच्ची ने जल्द ही अपनी पकड़ ढ़ीली नहीं करती, तो उस लड़के की उंगलियां भी टूट जाती।"

विशाल, जो एक कंप्यूटर तकनीशियन के रूप में एक निजी फर्म के साथ काम करता है, अब पुलिस रिमांड में है और उसके ऊपर छेड़छाड़, विकलांग डिब्बे में अवैध रूप से यात्रा करने, और बिना टिकट यात्रा करने का मुकदमा चल रहा है।

सुनिश्चित करें कि आपके आस-पास की महिलाएं किसी न किसी रूप में आत्मरक्षा में प्रशिक्षित हों और जरूरत पड़ने पर किसी भी यौन शिकारी को सबक सिखाने हेतु आत्मविश्वास महसूस करती हों। यह लड़की निश्चित रूप से समाज के सामने एक उदाहरण है।

(इस पोस्ट में इस्तेमाल किए गए सारे फ़ोटो सांकेतिक हैं)

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