पैडमैन फ़िल्म से प्रेरित होकर यह 8वीं की छात्रा दुबई से भारत आकर ग्रामीण छात्राओं को बाँट रही सैनिटरी पैड्स

अभिनेता अक्षय कुमार और निर्माता-निर्देशक आर.बाल्की की फिल्म ‘पैडमैन’ को दर्शकों के साथ ही आलोचकों से भी सराहना मिली। फिल्म एक व्यक्ति विशेष तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम की जीवन से प्रेरित था जो कम लागत में महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड बनाता है। ‘पैडमैन’ ने शर्मिदगी से जुड़ी चीज समझी जाने वाली माहवारी पर न केवल लोगों को खुलकर बात करने को प्रेरित किया, बल्कि महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में अपनी भूमिका निभाई। फिल्म का उद्देश्य महिलाओं की माहवारी और उससे जुड़ी स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना था।इस फ़िल्म का असर कुछ यूं हुआ कि कुछ ऐसे लोग भी सामने आए जो समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाना चाहते हैं।

आज हम आपको एक 8वीं कक्षा की एक ऐसी छात्रा के बारे में बतानें जा रहे हैं जिसनें इस फिल्म से प्रेरित होकर एक अनोखी पहल करने की ठानी और कुछ ऐसा काम शुरू किया जो इस फिल्म से तो प्रेरित है ही साथ ही दूसरी मदद करने की भावना से भी जुड़ा है।

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इनका नाम है रीवा तुलपुले। 13 साल की रीवा अभी महज 8वीं कक्षा में पढ़ती हैं। यूँ तो रीवा दुबई में रहती हैं पर मूलतः उनका परिवार महाराष्ट्र से ताल्लुक रखता है। इस छोटी से लड़की नें अपनी सोच और साहस से वह कर दिखाया है जो बड़े बड़े नहीं कर पाते। रीवा नें ग्रामीण महाराष्ट्र से 250 लड़कियों को सैनिटरी नैपकिन बांटे हैं। मूलरूप से पुणे के रहने वाले रिवा के पिता राहुल तुलपुले का दुबई में उनका व्यवसाय है। 13 साल पहले ही वे परिवार के साथ वहां बस गए थे। रिवा दुबई में ही पली बढ़ी। लेकिन सामाजिक समस्याओं को लेकर वह हमेशा जागरूक रहती है। रीवा नेजब पैडमैन फिल्म देखी तो ग्रामीण इलाके की लड़कियों को जागरूक करने और उनकी मदद करने की ठान ली।

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उसने इस काम के लिए पिछले कुछ महीनों में दुबई में राशि एकत्रित की। रिवा ने लोगों से मदद के लिए फेसबुक पर ‘वी केयर बाई रिवा तुलपुले’ फेसबुक पेज बनाया है। दीपावली के दौरान होने वाली पार्टियों में भी रिवा ने लोगों से मदद मांगी। लोगों ने भी दिल खोलकर समर्थन दिया। एक बच्ची के लिए सालभर का सैनेटरी नैपकीन देने के लिए 20 दिरहम की मदद ली जाती थी। इसके द्वारा अब तक 500 लड़कियों को मदद देने भर की राशि जमा हो गई है। मदद के लिए और लोग आगे आ रहे हैं। वह दिसंबर में रीवा भारत आई और साहापुर तालुका के स्कूलों में लड़कियों को करीब एक साल का सैनिटरी पैड का स्टॉक बांटा।

रीवा का कहना है कि उन्होंने कुछ महीने पहले पैडमैन फिल्म देखी थी और मुझे मासिक धर्म के दौरान लड़कियों के सामने आने वाली समस्याओं का पता चला। इसके बाद रीवा नें फौरन भारत खासकर महाराष्ट्र के गांवों में रहने वाली लड़कियों के लिए कुछ करने का मन बना लिया। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली रीवा ने कहा कि उन्होंने यह विचार कोंकण स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य निरंजन देवखरे के साथ उस समय साझा किया, जब वह दुबई आए थे। देवखरे ने रीवा को इस काम के लिए दिल से प्रोत्साहित किया।

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यह कोई पहली बार नहीं है जब रिवा ने सामाजिक उत्तर दायित्व को समझते हुए कोई काम किया है। इससे पहले इस छोटी सी उम्र में ही वह दुबई में वह ईवेस्ट मैनेजमेंट को लेकर मुहिम चलाकर 4.5 टन ई कचरा जमा कर उसका वैज्ञानिक पद्धति से निपटान करा चुकी है। दरअसल रिवा को जानकारी मिली कि खराब मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रानिक सामान का अगर सही तरीके से निपटारा नहीं हुआ तो पर्यावरण को ख़तरा हो सकता है। इसके बाद उन्होंने ई-वेस्ट की रीसाइक्लिंग के लिए जागरूकता मुहिम चलाई थी, जो सफल रही।  

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