प्लास्टिक कचरों को ठिकाने लगाने के साथ-साथ उससे लाखों की कमाई भी कर रहा है यह ग्राम पंचायत

अपने आसपास पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतल या प्लास्टिक के अन्य सामान देखकर आप भी फिक्रमंद होते होंगे। जल और मिट्टी के साथ पूरे वातावरण को प्रदूषित करने में प्लास्टिक के इन कचरे का बड़ा योगदान है।  प्लास्टिक पदार्थों को जलाना भी बहुत हानिकारक है क्योंकि इसके कारण कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और डाइऑक्सिन जैसी ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन होता है। सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि एक किलो प्लास्टिक कचरा जलाने पर तीन किलो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है।

शहर या गांव में कचरा इकट्ठा करने और इससे निपटाने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं या स्थानीय शहरी निकायों की होती है। प्लास्टिक कचरों का समुचित प्रबंध स्थानीय निकायों के महत्वपूर्ण उत्तरदायित्वों में से एक है। कचरा उठाया तो जाता है पर फिर उसे दूसरी जगह डंप कर दिया जाता है, जिससे यह प्लास्टिक इसी पर्यावरण में मौजूद रहे जाती है। और इसपर जनता के करोड़ों रूपये खर्च भी किये जाते हैं। पर आज हम आपको एक ग्राम पंचायत के ऐसे पहल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ वे वातावरण को इस प्लास्टिक कचरे से मुक्त कर रहे हैं बल्कि लाखों की कमाई भी कर रहे हैं।

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यह है केरल के इडुक्की जिले का एक ग्राम पंचायत नेदुमगंडम। राज्य सरकार की एक पहल के अंतर्गत नेदुमगंडम ग्राम पंचायत ने क्लीन केरल कंपनी को 4136.83 किलो प्लास्टिक अपशिष्ट 62472 रुपये में पुनर्नवीनीकरण यानी रीसाइक्लिंग के लिए बेचा है। पंचायत के पास अभी भी 10000 किलो प्लास्टिक अपशिष्ट और 3000 किलो कार्बनिक उर्वरक बेचने के लिए उपलब्ध है। इसे सफल बनने के लिए राज्य सरकार की कुदुम्बश्री योजना के माध्यम से कार्यरत महिला कर्मचारी, प्रत्येक स्कूल, अस्पताल और घरों में जाकर प्लास्टिक अपशिष्ट और गैर जैव अवक्रमणीय अपशिष्ट एकत्रित करती हैं। स्थानीय पंचायत इस प्लास्टिक अपशिष्ट का पुनर्नवीनीकरण के लिए क्लीन केरल कंपनी को बेच देती है।

यह कंपनी इसका रीसाइकिलिंग कर सार्वजानिक कार्य विभाग और निजी कंपनियों को उचित मूल्यों पर बेच देती है। अब ब्लॉक पंचायत इस प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत को अपशिष्ट प्रसंस्करण सयंत्र यानी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और बायोगैस प्लांट स्थापित करने की अनुमति दे दी है। जिससे स्थानीय लोगों के लिए बिजली और खाना पकाने की गैस उत्पन्न की जा सके।यह बायोगैस सयंत्र करीब 300 किलो अपशिष्ट को गैस में बदलेगा।जिससे 15-20 घरों के लिए खाना पकाने की गैस का निर्माण होगा। इसके अलावा इस संयंत्र से आसपास के घरों को बिजली भी मिलेगी। इस कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार ग्राम पंचायत को 10 लाख की धनराशि भी देने वाली है। यह परियोजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की गोवेर्धन पहल और केरल सरकार के सुचित्वा मिशन के तहत कार्य करेगी।

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जाहिर है हमारे देश में प्रतिदिन 15000 टन प्लास्टिक अपशिष्ट निकलता है, जिसकी मात्रा निरंतर बढ़ती जा रही है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पूरे विश्व में इतना प्लास्टिक हो गया है कि इस प्लास्टिक से पृथ्वी को पांच बार लपेटा जा सकता है।समुद्र में करीब 80 लाख टन प्लास्टिक बहा दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि प्रति मिनट एक ट्रक कचरा समुद्र में डाला जा रहा है। यह स्थिति पृथ्वी के वातावरण के लिए बेहद हानिकारक हो सकती है क्योंकि प्लास्टिक को अपघटित होने में 450 से 1000 वर्ष लग जाते हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत नेदुमगंडम की यह पहल वाकई क़ाबिले तारीफ है। हर नगर पालिका और राज्य सरकारों को इस तरह के पहल को अपनाने की जरूरत है।

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