बेटे को नकारात्मक ख़बरों से दूर रखने के लिए माँ ने शुरू किया अपना अखबार, सैकड़ों बच्चे हुए लाभान्वित

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। इस स्तंभ के अब कई प्रकार जैसे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया व सोशल मीडिया हमारे सामने मौजूद हैं। पर प्रिंट मीडिया सबसे पुराना और बेहतरीन साधन है। अखबार हमें न सिर्फ ख़बरें देता है बल्कि हर खबर की समीक्षा व रोजमर्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी भी देता है। अखबार पढ़कर हम देश-दुनिया में होने वाली हर हलचल से परिचित रहते हैं। हम यह भी चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी अखबार पढ़ें और दुनिया भर की खबरों से रूबरू हो, पर कैसे?

क्योंकि आजकल अखबारों में खबरों का स्तर गिरता जा रहा है।खबरों में भी सिर्फ क्राइम और नकारात्मक से संबंधित खबरें ही नजर आती हैं। जिस कारण कई बार सुबह-सुबह न्यूज़ चैनल और अखबार देखने का भी मन नहीं करता, न जाने कितनी क्राइम की ख़बरें होंगी? पहले खून-खराबा नहीं दिखाया जाता था लेकिन आज कई अखबारों में आप ऐसी खून-ख़राबे, बलात्कार, चोरी से भरी हुई विचलित कर देने वाली ख़बरें और तस्वीरें से भरी रहती हैं। जिन्हें आप अपने बच्चों को तो बिल्कुल नहीं दिखाना चाहेंगे।

इसी समस्या का हल ढूंढा एक माँ ने जिन्होंने अपनें बेटे को दुनिया भर की जरूरी खबरों के अबगत कराने के लिए चालू किया बच्चों का अखबार।

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इनका नाम है निधि अरोड़ा। हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वाली निधि एक आईआईएम ग्रेजुएट हैं और एक कंसल्टिंग फर्म की डायरेक्टर हैं। निधि अरोड़ा चाहती थीं कि उनका 11 वर्षीय बेटा रोजाना अख़बार पढ़ने की आदत डाले। पर ऐसा कोई अखबार नहीं था जिससे उनके बेटे पर गलत असर ना पड़े। फिर उन्होने अपने बेटे के लिए 2017 में एक बच्चों का दैनिक अखबार, द चिल्ड्रन पोस्ट शुरू किया। इसके पीछे उनका सीधा और सरल मकसद था कि हमारी ही तरह, बच्चों के लिए देश और दुनिया की ख़बरों के बारे में जानकारी रखना काफ़ी ज़रूरी है। ज़िन्दगी के बारे में उनके नज़रिए को सही सांचे में ढालने के लिए भी देश और दुनिया की ख़बर रखना अनिवार्य है। बच्चों के दिमाग़ में कई प्रश्न आते हैं और दुनिया की समस्याओं से उनका सरोकार रखना, वर्तमान और भविष्य की मांग है। ऐसे में देश दुनिया की खबरों से उनका अवगत होना बहुत जरूरी है।

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उन्होंने जून 2017 में अपने अपने घर पर ही 4 पन्नों का सैंपल अख़बार तैयार किया।इनमें उनका साथ दिया उनकी कुछ दोस्तों और साथियों नें। इस तरह हुई द चिल्ड्रेन पोस्ट की शुरुआत। धीरे-धीरे इस अखबार के बारे में अन्य अभिवावकों  को भी पता चलने लगा और इसकी लोकप्रियता बढ़ती गयी। इसकी पहुँच बढ़ाने के लिए इसका इलेक्ट्रॉनिक वर्जन शुरू किया गया। अब 4 पन्ने का ये ई-अखबार कई घरों, शिक्षण संस्थानों और स्वयं सेवी संस्थाओं तक तक पहुँचता है। जिसे बच्चों के लिए इसे प्रिंट किया जा सकता है, कभी भी और कहीं भी। गाज़ियाबाद के यशोदा हॉस्पिटल में ये अख़बार बाल चिकित्सा वार्ड और बच्चों की ओपीडी में बांटा जाता है। इससे अस्पताल में भर्ती बच्चे वहां बैठे-बैठे ही देश दुनिया की हलचल से वाक़िफ़ होते रहते हैं। इसके साथ ही यह अखबार बिना किसी शुल्क के बच्चों के लिए काम करने वाले स्वयं सेवी संस्थाओं को उपलब्ध कराई जाती है।

यूँ तो यह अख़बार 8 से 13 उम्र के बच्चों के लिए है लेकिन यह इतना रोचक और ज्ञानवर्धक होता है कि इससे ज़्यादा उम्र के बच्चे भी इस अख़बार को पढ़ते हैं और इसे पसंद करते हैं। क्योंकि इस अख़बार में जरूरी जानकारी रखने लायक हर  विषय की खबरों को जोड़ा गया है। जैसे अन्तर्राष्ट्रीय खबर, अर्थशास्त्र, इंटरनेट सिक्योरिटी, वातावरण, इतिहास, तकनीक, भारतीय प्रजातंत्र,खेल इत्यादि। साथ ही इस बच्चों के अखबार में क्विज़, कविताएं, लघु कथाओं को भी शामिल किया जाता है ताकि बच्चों को अखबार बोरिंग ना लगने लगे। जिससे बच्चों के अखबार द चिल्ड्रेन्स पोस्ट में जानकारियों के साथ साथ रचनात्मक कंटेंट भी भरपूर रहते हैं।

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खबर को पूरा बनने में औसतन एक दिन में बहुत सारे पेपरवर्क होते हैं जो उनकी टीम पूरा करती है। निधि के अलावा उनकी एडिटोरियल टीम में कुल 6 और माँ जुड़ी हुई हैं। इस टीम में निधि के साथ दीप्ति छबरा, एकता एक्लेस्टन, नेहा जैन, हरिंदर कौर, शिवानी गिलोत्रा नारंग और प्रदीपथी विस्समेटी शामिल हैं।

पूरी टीम मिलकर इस अखबार की ख़बरें सेलेक्ट करती हैं और उसे तैयार करती हैं। इसके लिए उन्हें कम से कम 4-5 समाचार पत्र स्कैन करना पड़ता है। वे बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त समाचार चुननें, उन्हें बच्चों के अनुकूल बनाने, पृष्ठों को डिज़ाइन करने, पहेलियों, कार्टून इत्यादि बनने में अपना पूरा जोर लगाती हैं। इसके बाद इसे www.thechildrenspost.com पर अपलोड कर दिया जाता है। आज इस अखबार का लाभ सैकड़ों बच्चों को मिल रहा है।

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