मैं घर-घर जाकर पेपर डिलीवरी करता था लेकिन आज बॉलीवुड के दिग्गज सितारे मेरे इशारों पर नाचते हैं

असफलताएं कुछ और नहीं बल्कि एक बार फिर से किसी काम को शुरू करने का अवसर होती हैं; वह भी पहले से बेहतर अनुभव और ज्यादा विवेक के साथ। जीवन में बहुत बार अवसर कठिन श्रम की जरूरत के छद्म वेश में सामने आते हैं, पर लोग उसे पहचान ही नहीं पाते। आम मान्यता के विपरीत जीवन कांटों भरा बिस्तर नहीं बल्कि संयोगों और मौकों का सेज होता है। आए दिन अवसर हमारे दरवाजे पर दस्तक दे जाते हैं, यह तो हम हैं जो उन्हें देख या पकड़ नहीं पाते।

लोगों की सफलता में वह कौन हैं और कौन सी हुनर रखते हैं यह इतना महत्वपूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण यह होता है कि उन्होंने जीवन में क्या बनने का चुनाव किया। आज हम आपको इमरान सईद नाम के एक शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, जिसने शून्य से शुरूआत कर अपने खुद के दम पर अपना साम्राज्य खड़ा किया। उन्होंने बॉलीवुड में बतौर कोरियोग्राफर बड़े सितारों के साथ काम करते हुए अपनी एक ख़ास जगह बनाई है।

मुंबई के बाहरी इलाक़े डोम्बिवली में इमरान पले-बढ़े। उनका बचपन ख़ुशनुमा नहीं था और उन्हें वे सुविधाएँ भी नहीं मिली जो आमतौर पर बच्चों को बचपन में मिलती है। उनके पिता शिप में काम करते थे, नौकरी स्थायी नहीं होने की वजह से उनका परिवार आर्थिक रूप से तकलीफ़ झेल रहा था। उनकी माँ ने बच्चों को क़ुरान पढ़ाना शुरू किया।

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इमरान ने केनफ़ोलिओज़ को दिए साक्षात्कार में बताया, “एक समय ऐसा आया जब मेरे पिता के पास नौकरी नहीं थी। मैं और मेरे भाई ने मिलकर घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाई। हमारी पहली नौकरी एक पेपर डिलीवरी बॉय की थी। उसके बाद हमने घर-घर जाकर दूध बेचा। उस समय हम स्कूल में पढ़ते थे।”

हर दिन इमरान चार बजे सुबह उठ जाते, घर-घर जाकर दूध बांटकर घर वापस आते और फिर पेपर बांटने चले जाते। उसके बाद वे एक टूर और ट्रेवल कंपनी में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी करने लगे। वे अपनी पूरी ज़िन्दगी में तीन लोगों से ख़ासा प्रभावित थे अर्नाल्ड स्च्वार्ज़नेगगर, माइकल जैक्सन और ब्रूस ली।

इमरान को मार्शल आर्ट्स में भी ख़ासी दिलचस्पी थी और वे एक फुटबॉलर भी थे। कॉलेज में उन्होंने डांस शुरू किया। वे कहते हैं, “मेरे पिता मेरे डांस करने के ख़िलाफ़ थे। मैं प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए खिड़की से चोरी छुपे जाया करता था। मेरी माँ तटस्थ रहती थी और वे कांटेस्ट में भाग लेने पर कुछ नहीं कहती थी।”

इमरान डांसिंग में ही जाना चाहते थे। उन्होंने बहुत से इवेंट्स और फिल्मों के लिए ऑडिशन देना शुरू कर दिया। वे बिना बताये अचानक ऑडिशन में चले जाया करते थे। उन्हें ‘कभी खुशी कभी कभी ग़म’ फिल्म के लिए नहीं चुना गया और इससे चुनौती लेकर उन्होंने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत की। तब जाकर उन्हें पहला ब्रेकथ्रू ‘मैं हूँ न’ फिल्म में मिला। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

धीरे-धीरे चीजें व्यवस्थित होने लगी और जल्द ही इमरान सहायक कोरियोग्राफर बन गए। IIFA और फिल्म फेयर से बॉलीवुड मूवीज तक वे तेजी के साथ आगे बढ़ते चले गए। उन्होंने बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज, जैसे ऋतिक रोशन, कटरीना कैफ, सलमान खान के साथ मंच साझा किया। उन्होंने दीपिका पादुकोण और महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ऐड फ़िल्में भी की।

ये तमाम चीज़ें इमरान को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करतीं। अपने खाली समय में इमरान किताबें पढ़ते और खाना पकाते हैं। उन्होंने एक कंपनी इमरान सईद एंटरटेनमेंट की स्थापना भी की है इसमें उनकी एक प्रोडक्शन कंपनी है और एक डांसिंग राइट नामक ऐप भी है।

“मैंने जिंदगी को बदलते हुए देखा है। जो लोग पहले मेरा अपमान करते थे मुझ पर तंज कसा करते थे और मुझे नीचा दिखाते थे; आज मेरी प्रशंसा करते नहीं थकते।”

इमरान मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति डांस कर सकता है और कोई भी गलत डांस कर ही नहीं सकता। वे डांस के स्टेप्स को बड़ी सहजता से सिखाते हैं। उन्होंने प्रयाग नाम से एक NGO की शुरुआत की है जिसके द्वारा वह पिछड़े वर्ग के बच्चों को वे सारी सुविधाएं और अवसर सुलभ कराते हैं जो उन बच्चों को मिलनी चाहिए होती है।

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इमरान कुछ रियलिटी शोज में बतौर जज भी जुड़े रहे हैं अभी बेकिंग और डांसिंग से जुड़े हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित एक वेब सीरीज से जुड़े हैं।

इमरान कहते हैं; “जीवन अवसरों से भरा पूरा है और यदि मैं आज यहां पहुंच सकता हूं तो कोई भी यहां पहुंच सकता है। मेरे जीवन में बहुत बड़े बदलाव आए क्योंकि मैं ऐसा चाहता था। हमें यह महसूस करना होगा कि कोई एक मौका भी हमें हमारे सपनों से मिला सकता है, चाहे वह सपना कितना भी बड़ा और असंभव ही क्यों नहीं लगता हो।” इमरान मानते हैं कि हर व्यक्ति को बिना किसी स्वार्थ के लोगों की वैसी मदद जरूर करना चाहिए जो उसके वश में हो।

इमरान लाखों में एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने तमाम विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाई और अपने जुनून को अपनी जिंदगी और अपने कामों में ढूंढा। वे उस हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं जो जीवन की रणभूमि में कुछ पाने के लिए संघर्षरत हैं।

(यह आर्टिकल अनुभा तिवारी द्वारा लिखा गया है)

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