राजनीति में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इनके प्रयास बेमिसाल हैं

कई मायनों में, परिवर्तन जंगल में लगी एक आग की तरह है। दोनों की शुरुआत इतनी छोटी है कि हमारी आंखें उन्हें दुनिया के किसी कोनें में छिपे होने की वजह से ध्यान देने में विफल रही हैं। लेकिन जैसे ही हवा परिवर्तन की इस छोटी आग को सहारा देती है, यह एक उग्र आग पैदा करती है और क्रांति का मार्ग प्रशस्त करती है। जब लोग बदलाव की बात करते हैं तो यह सुनने में बड़ा रोमांचक लगता है, लेकिन उससे भी अधिक रोमांचकारी बात तब होती है जब कोई युवा सरकारी नीतियों के आसपास काम करने, नागरिक आंदोलन को बढ़ावा देने और भारतीय विधायिका में सुधार करने की बड़ी चुनौती अपने कंधों पर लेता है।

पच्चीस वर्षीय नागा श्रवण किल्लरू खुद को 'एक जिम्मेदार नागरिक' के रूप में पेश करते हैं। केनफ़ोलिओज़ के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि, "मैं खुद को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में परिभाषित करता हूं क्योंकि यह एकमात्र चीज है जो मायने रखती है।" उनका मिशन युवाओं को सरकारी नीतियों में शामिल करना और इसके लिए वह संगोष्ठियों और रैलियों के माध्यम से कॉलेज के छात्रों के साथ निरंतर बातचीत करते रहते हैं।

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युवा घोषणापत्र का प्रतिनिधित्व करने और राजनीतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए श्रवण आंध्र प्रदेश में लगभग 3000 किमी तक की पद-यात्रा कर चुके हैं।

"बात यह है कि हम सभी शिक्षित हैं लेकिन जागरूक नहीं हैं। हम सफल इंजीनियर या उद्यमी हो सकते हैं, लेकिन यदि हम जिम्मेदार नागरिक नहीं हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या हैं," श्रवण ने कहा। उन्हें राष्ट्रीय विकास और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए साल 2017 के राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

विजयवाड़ा में जन्में और पले-बढ़े नागा का मानना है कि जब युवा समाज के लिए काम करना चाहता है, तो यह बेघर लोगों को मिठाई कंबल वितरित करने तक सीमित नहीं हो सकता है। इसके लिए हम सब को आगे आने की जरुरत है और गंभीर बातचीत के जरिये यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि हमारा समाज इसकी जरूरतों को समझता है। दूसरी तरफ, वह राजनीतिक दलों को भी यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि युवाओं को उनकी सरकार से सिर्फ नौकरियों की तुलना में कई और चीजों की जरूरत है। राजनीति में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है और इसके लिए वह राजनीतिक दलों के भीतर युवाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की वकालत भी करते हैं।

74 वर्षीय अन्ना हजारे से मिली उन्हें प्रेरणा 

साल 2011 में अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने श्रवण के भीतर भी क्रांति भी भावना पैदा की। वह तब महज 17 वर्ष के थे। श्रवण ने देखा कि उनके कई दोस्तों ने लोकपाल बिल का समर्थन तो किया लेकिन बिल के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। तब उन्होंने लोकपाल पर उन्हें शिक्षित करने और बिल के समर्थन में अभियान चलाने के लिए युवा लोगों के समूह बनाने शुरू कर दिए, इस प्रकार लोकतंत्र में उत्तरदायित्व लाने की दिशा में उन्होंने अपना कदम बढ़ाया।

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श्रवण कहते हैं कि "साल 2011 में, जब मैंने टीवी पर 74 वर्षीय अन्ना हजारे को देखा तो मुझे आश्चर्य हुआ कि एक बुजुर्ग आदमी, जो शायद एक दशक से अधिक नहीं जीएगा, इस देश के भविष्य के बारे में चिंतित है। यह एक बहुत ही अपरिपक्व विचार था लेकिन बाद में मैंने खुद से पूछा कि मेरे जैसा युवा जो इस देश में अपना पूरा जीवन जीने जा रहा है, वह क्यों नहीं कुछ कर सकता।"

"अक्सर नागरिक आंदोलन राजनीति में हार जाते हैं क्योंकि हमारे पास जानकारियों का अभाव होता है। मैं परिवर्तन के लिए वकालत करता हूं और वह परिवर्तन लोगों के बीच सही सूचना का संचार है।"

यह स्वीकार करना आसान है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे काम करती है, इस बात से हम अज्ञात हैं। ज्यादातर युवा, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले, यह तक नहीं जानते कि उनके विधायक या सांसद कौन हैं क्योंकि यह उनके दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं करता है। इस समस्या की वजह सिर्फ राजनीति के प्रति उनकी दिलचस्पी का न होना नहीं है बल्कि उनके सामने सरलीकृत जानकारियों का अभाव भी है।

कॉलेज से ही शुरू किया जागरूकता अभियान

जब श्रवण कॉलेज में थे, तब उन्होंने बेंगलुरु और उनके गृह नगर विजयवाड़ा में राजनीतिक जागरूकता फैलाने और राजनेताओं को उनकी मांगों और चिंताओं का ध्यान रखने के लिए कई अभियान और रैलियों का आयोजन करना शुरू किया। इतना ही नहीं उन्होंने आंध्र प्रदेश से संसद सदस्यों के रिपोर्ट कार्ड भी लोगों के बीच बाँटने शुरू किए, जिसमे उनके राजनीतिक प्रदर्शन और वादों का विश्लेषण किया। श्रवण कहते हैं, "एक बार जब आप वास्तविकता का पर्दाफ़ाश करते हैं तो उत्तरदायित्व की भावना स्वचालित रूप से बढ़ने लगती है।"

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के साथ श्रवण।

उन्होंने न्यू मिनट से बातचीत के दौरान बताया कि " साल 2019 में होने वाले चुनावों में राज्य में कुल 37 लाख ऐसे मतदाता होंगे जो पहली बार वोट कर रहे होंगे और लगभग 1.12 करोड़ लोग 18 से 35 वर्ष के बीच होंगे। हमें एकजुट होकर राजनीतिक दलों को यह बताने की जरूरत है कि ये हमारी मांगों की सूची हैं। फिर वे खुद आगे आएंगे।

ऐसे देश में जहां युवा राजनीति का नेतृत्व 40 वर्ष की उम्र के ऊपर रहने वाले लोग कर रहे हैं, वहां श्रवण के प्रयासों ने भविष्य में एक बेहतर विकल्प की आशा जताई है। राजनीति में युवाओं  को प्रेरित करने के लिए उनके निरंतर उत्साह को हमारे सक्रिय समर्थन की जरुरत है। और उसकी शुरुआत हम अपने क्षेत्र के सार्वजनिक प्रतिनिधि, उनके ट्रैक रिकॉर्ड और हमें अच्छे शासन की पेशकश करने की उनकी क्षमता पर शोध के साथ शुरू कर सकते हैं।

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