'इतना ही लो थाली में ताकि व्यर्थ जाए नाली में' इसी सोच के साथ पार्टियों में बचे भोजन से भर रहे हैं सैकड़ों गरीबों का पेट

आज भारत उन देशों में है जहाँ गरीबी और भुखमरी सर्व व्याप्त है। दुनिया में भुखमरी बढ़ रही है और भूखे लोगों की करीब 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुपोषित लोगों की संख्या लगभग 19.07 करोड़ है, जो कि विश्व भर में सबसे अधिक है। वहीं दूसरी तरफ आज अपना देश खाने की बर्बादी की समस्या से भी जुझ रहा है। अपने देश की पूरी आबादी को खाना प्राप्त हो सके इसके लिए सरकार, वैज्ञानिक एवं किसान दिन-रात जी तोड़ मेहनत करते हैं। कम समय में कम भूमि पर अच्छी फसल की पैदावार हो इसकी नई-नई खोज होती रहती हैं। सभी धर्म अन्न देवता की पूजा करने का संदेश देते हैं चाहे इसे माने या माने यह हम पर निर्भर करता है।

पर आज समाज में भोजन की जूठन छोड़ने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, खास कर शादी विवाह की पार्टियों में बहुत बड़ी मात्रा में खाना नालियों में जाता है। ऐसा कर हम भगवान की नजर में पाप के भागीदार बन रहे हैं। भोजन की इसी वेस्टेज को रोकने आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए एक शख्स नें शुरू की अनोखी मुहिम। जो आज सैकड़ों भूखे व गरीब का पेट भर रही है।

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इनका नाम है भुवन भास्कर खेमका। हरियाणा के शहर सिरसा के निवासी भुवन पेशे से एडवोकेट हैं। भोजन की इसी वेस्टेज को रोकने आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए वे श्री राम भोजन बचाओ संस्था चलाते है। संस्था का श्लोगन है "इतना ही लो थाली में ताकि व्यर्थ जाए नाली में" इसी विचार के साथ भुवन ने श्री राम भोजन बचाओ नामक संस्था की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत उनके संस्था में युवाओं की एक टीम तैयार है। और जब भी किसी विवाह-पार्टी आदि में भोजन बचने की सूचना आती है तो यह टीम तुरंत मौके पर जाकर उस भोजन को वहां से उठाकर जरूरतमंद तक पहुंचाती है। इसके अलावा ये लोग घरों के बचे हुए भोजन को एकत्रित किया जाता है। बचा हुआ खाना एकत्रित करने के बाद अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रम और झुग्गी झोपडिय़ों में जाकर बांटा जाता है।

दरअसल इसकी शुरुआत साल 2010 में हुई थी। खेमका अपने शहर में ही एक निजी पैलेस में आयोजित शादी समारोह में गए थे। शादी में आए लोग प्लेट भरकर पकवान ले रहे थे। इसके बाद आधे पकवान प्लेट में बचे होने के बाद भी डस्टबिन में डाल रहे थे। शादी से लौटने के बाद ऐसे समारोहों में होने वाली भोजन की बर्बादी की घटना ने उन्हें रातभर सोने नहीं दिया। इसके बाद लोगों को जागरूक करने का फैसला लिया। यह साल 2010 की बात है। खेमका ने वर्ष 2010 में श्रीराम भोजन बचाओ संस्था का गठन किया गया। इस संस्था में लोगोंं को सदस्य बनाया गया। सदस्यों से प्रतिमाह 5 रुपये एकत्रित किए गये। जिसे संस्था द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए खर्च किया जाता रहा। फिर राशि बढ़ाकर सदस्यों से 50, 100, 200, 500 व 1000 रुपये प्रतिमाह एकत्रित करने लगे। उनकी संस्था मैरिज पैलेस में विवाह समारोह से फेंके गए खाने के को कॉल प्राप्त होने पर उठाने लगी। उन्होंने उसके लिए संपर्क नम्बर जारी किए हुए हैं।

कई बार ऐसा भी होता है कि उन्हें भोजन नहीं मिल पाता या कोई कॉल नहीं आती। ऐसे में पदाधिकारी अपने खर्च पर ब्रेड खरीद कर उसे बांटते हैं। संस्था के 250 मासिक सदस्य हैं जो हर महीने दान देते हैं। इसी से संस्था के सदस्य भोजन सामग्री खरीदते हैं। संस्था के सदस्य शहर से 25 किलोमीटर दूर तक भोजन एकत्रित करने पहुंच जाते हैं और लाकर बांटते हैं। उनके इस पहल से सैकडों गरीबों का पेट भर रहा है। उनकी संस्था के प्रयासों से भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए यह पाठ पढ़ना जरूरी है। क्योंकि एक तरफ विवाह-शादियों, पर्व-त्योहारों एवं पारिवारिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर भूखे लोगों द्वारा भोजन की लूटपाट देखने को मिल रही है। भोजन की कमी जहां मानवीय त्रासदी है, वहीं भोजन की बर्बादी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। एक तरफ करोड़ों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, कुपोषण के शिकार हैं, वहीं रोज लाखों टन भोजन की बर्बादी एक विडंबना है।

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शादियों, उत्सवों या त्योहारों में होने वाली भोजन की बर्बादी से हम सब वाकिफ हैं। इन अवसरों पर ढेर सारा खाना कचरे में चला जाता है। होटलों में भी हम देखते हैं कि काफी मात्रा में भोजन जूठन के रूप में छोड़ा जाता है। 1-1 शादी में 100-100 तरह के आइटम परोसे जाते हैं, खाने वाले व्यक्ति के पेट की एक सीमा होती है, लेकिन हर तरह के नए-नए पकवान एवं व्यंजन चख लेने की चाह में खाने की बर्बादी ही देखने को मिलती है। इस भोजन की बर्बादी के लिए केवल भुवन भास्कर खेमका की सामाजिक संगठन ही नहीं बल्कि सरकार भी चिंतित है। 

 

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