अन्ना हजारे से प्रेरित होकर 22 वर्षीय सरपंच ने उठाया गाँव की तस्वीर बदलने का बीड़ा

किसी भी देश व समाज से बुराई को खत्म करने के लिए कानून-व्यवस्था का बहुत बड़ा योगदान होता है। भारत में अलग-अलग राज्यों की सरकारें भी नशाबंदी और शराबबंदी जैसे कानून लाती रहती हैं ताकि समाज से इन बुराइयों को खत्म किया जा सके। लेकिन इन सब के बावजूद भी इस बात से कोई दोराय नहीं है कि तमाम कड़े कानून के बाद भी लोग चोरी-छुपे इसका इस्तेमाल करते ही हैं। जबतक लोगों के बीच जागरूकता पैदा नहीं होगी, ऐसी बुराइयों का सौ फीसदी खात्मा संभव ही नहीं है।

हाल के समय में हमने देखा है कि कई गावों व शहरों के लोग एकजुट होकर इन बुराइयों के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। उनके उपर न कोई क़ानूनी प्रभाव है और न ही किसी का दबाव, सिर्फ और सिर्फ जागरूकता ही है जो उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के तापारवाड़ा गाँव के लोगों ने एक नया उदाहरण पेश किया है। प्रसिद्ध समाज-सेवी अन्ना हजारे से प्रेरणा लेते हुए यहाँ के लोगों ने अपने गाँव को शराब-मुक्त करने का बीड़ा उठाया और आज यह देश के सामने एक आदर्श गाँव बनकर खड़ा है।

1500 परिवारों वाले इस गाँव के कुछ युवाओं ने अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि से बेहद प्रभावित हुए और फिर उन्होंने अपने गाँव की दशा और दिशा बदलने का बीड़ा उठाया। उन्होंने तय किया कि शराब मुक्त गांव बनाने के साथ-साथ प्राकृतिक जल संसाधनों को रिचार्ज करने जैसी चीजों को भी गंभीरता से लेंगे।

उन्होंने जल संसाधन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की मदद से ग्रामीणों को मानसून के मौसम के दौरान बारिश के पानी का उपयोग करने के लिए चेक बांध की व्यवस्था की। अच्छे मानसून की वजह से चेक बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो जाती है, जिसका उपयोग प्राकृतिक स्रोतों को रिचार्ज करने में किया जा रहा है।

सबसे ख़ास बात यह है कि गाँव को मॉडल विलेज बनाने में यहाँ की 22 वर्षीय युवा सरपंच मंजू मेहगल की भी भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने वृक्षारोपण, सड़क मरम्मत सहित अन्य कारणों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। पूर्ण शराब प्रतिबंध ने महिलाओं के जीवन में भी बदलाव लाए हैं क्योंकि अब घरेलू हिंसा नहीं देखी जा रही है। 

आज गाँव का हर एक परिवार खुश है। वहां के किसानों का कहना है कि गाँव में तीन साल के लिए पर्याप्त पानी जमा हो गया है और अभी तो बारिश की शुरुआत ही हुई है। सच में युवाओं ने मिलकर गाँव की जो दिशा तय की है, वह काबिले-तारीफ है।

 

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