आतंक का रास्ता छोड़ देश के लिए शहीद होने वाले लांस नायक नजीर अहमद

आज के समय में देश विदेश की सबसे बड़ी समस्या के बारे में अगर पुछा जाये, तो बच्चा बच्चा भी यही बोलेगा आतंकवाद। आतंकवाद ने हमारे समाज को इस तरह जकड रखा है कि लाख कोशिशों के बाद भी ये जड़ से अलग नहीं हो रहा है। आतंकवाद विश्वभर में फैला है, अभी कुछ दशकों में, उसने नए आयाम हासिल किए हैं। जिस तरह से यह पिछले कुछ सालों से बढ़ रहा है, यह सीमाओं से परे है, हम सभी के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। फलस्वरूप, आज दुनिया दिन प्रतिदिन असुरक्षित, खतरनाक और भयभीत जगह बनती जा रही है। ऐसे में हमारी रक्षा करते हैं हमारे देश के वीर सैनिक।

एक सेना का जवान जब भारत माँ की रक्षा के लिए प्रण लेता है कि जबतक शरीर में प्राण रहेंगे तब तक दुश्मनों से लड़ता रहूँगा और अपने देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर भी कर दूंगा। आज हम आपको एक ऐसे ही जवान के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी आतंकवादी था। पर आज उसने देश के लिए लड़ते लड़ते अपनी प्राण भी न्योछावर कर दिए।

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इनका नाम है लांस नायक नजीर अहमद वानी। रविवार को साउथ कश्मीर में सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में छह आतंकियों को ढेर किया। इस एनकाउंटर में सेना के जवान लांस नायक नजीर अहमद वानी भी शहीद हो गए।  कभी खुद आतंकी रहे लांस नायक नजीर अहमद वानी का सोमवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान वानी के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया और 21 बंदूकों की सलामी दी गई। वानी को बाटागुंडा में मुठभेड़ के दौरान गोलियां लगी थी। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल मे भर्ती कराया गया था। जहां उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।शहीद हुए लांस नायक नजीर अहमद वानी सेना में भर्ती होने से पहले एक आतंकी थे। लेकिन उन्होंने आत्म समर्पण कर दिया था। वहीं आर्मी ऑफिसर ने वानी को सच्चा सैनिक बताया है।

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कुलगाम के रहने वाले वानी को सोमवार से नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई। लांस नायक वानी को जिस समय श्रद्धांजलि दी जा रही थी, इंडियन आर्मी के कई ऑफिसर उनके परिवार को सांत्‍वना देने के लिए मौजूद थे। लेकिन एक तस्‍वीर ऐसी है जो आपको भारतीय सेना के अलग पहलू से रूबरू करवाती है। इस दौरान सेना के एक सर्विंग ऑफिसर जब वानी के रोते हुए पिता को गले लगा रहे थे, तो उनकी आंखों से भी आंसू निकल रहे थे। वह खुद को इस मौके पर नियंत्रित नहीं कर पाए और वानी के परिवार के गम का हिस्‍सा बन गए।उनके बूढे़ पिता के आंसू नहीं थम रहे थे, तभी एक सैन्‍य अफसर उन्हें गले लगा लिया और सांत्वना दी। इसी लम्हे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
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इंडियन आर्मी ने इस फोटो को ट्वीट भी किया। जिसे अबतक हजारों लाइक मिल चुके हैं। कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा है, ‘इस फोटो की संवेदनशीलता को शब्‍दों में बयां नहीं किया जा सकता।’ गौरतलब है कि रविवार को ऑपरेशन ऑलआउट में सुरक्षाबलों ने 6 आतंकी मार गिराए। इसी ऑपरेशन में राष्‍ट्रीय रायफल्‍स के लांसनायक नजीर अहमद वानी शहीद हो गए। वर्ष 2004 में सेना में शामिल होने वाले लांसनायक वानी को साल 2007 में सेना मेडल दिया गया। इसके बाद इसी वर्ष अगस्‍त में भी स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर भी उन्‍हें सेना मेडल से सम्‍मानित किया गया। वह कुलगाम तहसील के चेकी अश्‍मूजी गांव के रहने वाले थे। बता दें, दक्षिण कश्‍मीर में स्थित कुलगाम जिला आतंकवादियों का गढ़ माना जाता है। सेना के प्रवक्‍ता ने बताया कि लांस नायक नजीर अहमद वानी के परिवार में उनकी पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं।

उन्‍हें हमेशा उनकी बहादुरी और उनके जज्‍बे के लिए याद रखेंगे जिसकी वजह से उन्‍होंने कई ऑपरेशंस को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और देश की रक्षा में अपना योगदान दिया।

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