12 वर्षीय छात्र ने समुद्र में मौजूद प्लास्टिक कचरे के निवारण के लिए किया अनोखा आविष्कार

प्लास्टिक कचरे की समस्या से आज समूचा विश्व जूझ रहा है। इससे मानव ही नहीं बल्कि समूचा जीव-जन्तु एवं पक्षी जगत प्रभावित है। आधुनिक समाज में प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग हो रहा है और यही आज प्लास्टिक मानव एवं पशुओं के शत्रु के रूप में उभर रहा है। समाज में फैले आतंकवाद से तो छुटकारा पाया जा सकता है, किंतु प्लास्टिक से छुटकारा पाना अत्यंत कठिन है, क्योंकि अपनी विविध विशेषताओं के कारण प्लास्टिक आधुनिक युग का अत्यंत महत्वपूर्ण पदार्थ बन गया है।

सबसे बड़ी चौंकाने वाली और खतरनाक बात यह है कि यह यह हमारे पर्यावरण के साथ साथ यह समुद्री नमक में भी जहर घोल रहा है। कारणवश समुद्री जीव-जन्तु, मछलियाँ और पक्षी भी इससे अपनी जान गँवाने को विवश हैं।आर्कटिक सागर के बारे में किये गए शोध, अध्ययन और चौंकाने वाले हैं। इस शोध के अनुसार 2050 में इस सागर में मछलियाँ कम होंगी और प्लास्टिक सबसे ज्यादा। आर्कटिक के बहते जल में इस समय 100 से 1200 टन के बीच प्लास्टिक हो सकता है जो तरह-तरह की धाराओं के जरिये समुद्र में जमा हो रहा है। प्लास्टिक के यह छोटे-बड़े टुकड़े सागर के जल में ही नहीं पाये गए हैं बल्कि यह मछलियों के शरीर में भी बहुतायत में पाये गए हैं। यदि इस पर शीघ्र अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में स्थिति और विकराल हो जायेगी और तब उसका मुकाबला कर पाना टेड़ी खीर होगा।
इससे निजाद दिलाने में बड़े से बड़े लोग अपने हाथ खड़े कर दे रहे हैं। पर आज हम आपको महज 12 साल के एक ऐसे छात्र के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आविष्कार को समुद्री पर्यावरण को बचाने के लिए अहम माना जा रहा है।

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इनका नाम है हाजिक काज़ी। 12 साल के हाजिक अपने ग्रह को बचाने के समर्पित मिशन पर है। पुणे स्थित इंडस इंटरनेशनल स्कूल के छात्र हाजिक काज़ी ने इस छोटी-सी उम्र में सुमद्री जीवों के बारे में शोध किया। वास्तव में वह एक अनोखे अविष्कार का विचार लेकर आया है। यदि उसे लागू किया गया तो हमारे जलीय और पारिस्थितिकी तंत्र को नया जीवन मिलेगा।हालाँकि इस छोटे-से  लड़के  का मानना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हम इससे पहले बहुत कुछ कर सकते थे। काज़ी का मानना है कि 2050 तक समुद्र में हमारे पास समुद्र जीवों जितनी या उससे भी ज्यादा प्लास्टिक होगा। अगर हम समुद्र का सारा प्लास्टिक जमा करेंगे तो हमें उसे फेंकने के लिए चन्द्रमा जैसे दो बड़े ग्रहों की जरूरत पड़ेंगी। इसलिए काजी ने यह अविष्कार किया है।

इस आविष्कार का नाम है एर्विस(ERVIS)। यह काजी का पहला आविष्कार हैं जो एक समुद्री जहाज जैसा है। यह समुद्र की सतह से आसानी से कचरा खींच सकता है। आप कल्पना कर सकते हैं कि बड़े डिब्बे के साथ एक वैकुम क्लीनर जो कचरे को संसाधित कर, उसका अपशिष्ट एकत्र करता है।  साथ ही विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक का विश्लेषण कर उसे अलग भी कर सकता है। इससे पहले काजी ने जो अविष्कार बनाया था वह सिर्फ 7 सेकंड तक ही काम कर सका। लेकिन फिर भी काजी ने हार नहीं मानी और एक लम्बा सफर तय किया। बहुत से शोध और बार-बार के परीक्षण के बाद इस 12 वर्षीय छात्र ने 3D डिज़ाइन के साथ नया आविष्कार किया और उसे एक मूर्त रूप दे दिया।

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आपको याद होगा जुलाई 2013 को उत्तरी निदरलैंड में एक युवा व्हेल मृत अवस्था में पायी गयी थी। उस व्हेल के पेट में असमान्य रूप से सूजन आयी हुई थी। जब उसके पेट को खोला गया तो उसमें  दो पाइप, नौ मीटर की रस्सी और 16 किलो प्लास्टिक मिली। इस प्लास्टिक की वजह से व्हेल के आंतो में अवरोध पैदा हो गया और उसकी मौत हो गयी। इससे हमें अंदाज़ मिल जाना चाहिए कि यह समस्या कितनी बड़ी है और आने वाले समय में इसे रोका नहीं गया तो हश्र क्या होगा।

कचरा जमा करने में आविष्कार के अलावा यह 12 साल हाजिक काज़ी अपशिष्ट को दूसरे मार्ग से निपटाने के तरीके की भी खोज कर रहा है। साथ ही वह उन युवाओं की सूची में भी शामिल है जो दिसंबर में टेड-एक्स गेटवे टॉक (TED x Gateway Talk) में अपनी बात रखेगा। उम्मीद है कि काज़ी का यह आविष्कार सफल रहेगा और पूरे विश्व को उससे लाभ होगा। अन्य लोगों को भी इस छोटे से लड़के में जज़्बे और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता से सीख लेने की जरूरत है।


Meet Aaron Who Rescues Pets Through Telepathy

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