सामाजिक मानकों को तोड़ इन महिलाओं ने बढ़ाया महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में सराहनीय कदम

महिला सुरक्षा हमारे देश में हमेशा ही एक चुनौतीपूर्ण काम रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा कई कोशिशे भी की जा रही है जिससे की महिलाएं स्वाभिमान के साथ जीवन जीये और समाज के असामाजिक  तत्व जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाते है वे सलाखों के पीछे हो। अब समय आ गया है जब महिलाओं ने अपने खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने के लिए आवाज बुलन्द कर ली है। हाल ही में एक  कंपनी ने महिला सुरक्षा को लेकर जो पहल शुरू की है वह बहुत ही लाजवाब है यह कम्पनी अपने यहाँ महिला बाउंसर की भर्ती करती है उन्हें समाज में असामाजिक तत्वों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार कर रही है।

इस अनोखे काम की शुरुआत के लिए कदम बढ़ाया है पूर्व-ब्यूटीशियन अमिता कदम ने जिन्होंने 'स्वामीनी लेडी बाउंसर' नाम की एक कम्पनी शुरू कर पांच कर्मचारियों की भर्ती की और आज उनकी  कम्पनी में 50 से अधिक महिला बाउंसर को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इन महिला बाउंसर का काम महिला  मेहमानों की सुरक्षा करना और जो उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं उन्हें रोकना है। साथ ही यह बाउंसर महिलाएं पार्टी या किसी फंक्शन में ज्यादा शराब का सेवन करने वाली महिलाओं को उनके घर तक सुरक्षित पहुँचाने की जिम्मेदारी भी बख़ूबी निभा रही है।

लेकिन अमिता  के लिए महिला बाउंसर की कम्पनी शुरू करना आसान नही था उनके लिए यह बेहद चुनौतीपूर्ण काम रहा जहाँ उन्हें समाज की उस मानसिकता से लड़ना था जो महिलाओं को आज भी कमजोर समझ कर घर के देहलीज़ के अंदर ही रहने की सलाह देते है। 

अमिता कदम को बाउंसर कंपनी को शुरू करने के बारे में विश्वास कैसे मिला इस बारे में अपनी कहानी साझा करते हुए उन्होंने बताया कि " मेरी बहन का पति बाउंसर है और आज तक मैंने महिलाओं के बाउंसर बनने के बारे में नहीं सुना था मैंने सोचा था कि जो महिलाएं बार में जाती है वे कही ना कही मेल बाउंसर के साथ सहज नहीं रहेंगी इसलिए मैंने एसएलबी ( SLB ) लॉन्च किया। मुझे इस सोच को आगे बढाने में मेरे परिवार से बहुत सपोर्ट मिला मेरी सास, पति और उसके दामाद जो बाउंसर भी हैं उन्होंने मुझे हर सम्भव सहायता प्रदान की।" 

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अमिता कदम की एक बाउंसर कर्मचारी रेखा सुथार ने बताया कि " शुरुआत  में टाइट टी-शर्ट और पैंट पहनना मुश्किल था क्योंकि मैंने और मेरी जैसी अन्य महिलाओं ने कभी भी सलवार-कमीज के अलावा अपनी सारी ज़िंदगी कुछ अलग पहना ही नही था शुरुआत में थोडा अजीब लगा लेकिन जल्दी ही आत्मविश्वास का मार्ग प्रशस्त होने लगा।"

इस शुरुआत से कई लड़कियों के माता-पिता बहुत खुश है क्योंकि अब वे अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत है। अनीता के यहाँ कार्यरत शोभा कदनामुशी और सुनंदा कुंभर ने बताया कि "अन्य महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के साथ  अब हम अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा भी दे सकते है और उन्हें सुरक्षा भी।" 

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आज समाज को सुरक्षित करते हुए ये महिलाएं आत्मनिर्भर है साथ ही इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया की महिला ही महिला की समस्याओं को समझ कर उसका हल निकालने में सक्षम है। अब वक्त आ गया है कि समाज भी अपनी पुरुष प्रधान मानसिकता को बदले और महिलाओं की क्षमताओं पर विश्वास कर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें।

फोटो साभार - indiatimes.com एवं  facebook.com

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