10 साल के बच्चे ने जिस सूझ-बूझ से अपने भाई को अपहृत होने से बचाया, वह क़ाबिल ए-तारीफ़ है

"दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए,

जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए ,

यूँ तो क़दम क़दम पे है दीवार सामने,

कोई न हो तो ख़ुद से उलझ जाना चाहिए।"

निदा फ़ाज़ली साहब की ग़ज़ल का लिखा बेहद ख़ूबसूरत ये एक शेर इंसान को उसकी लड़ाई लड़ने के लिए बहुत सारी हिम्मत देता है, और वो बड़ा होकर इसे चर्चित भी करता है। मगर इस बार इसे चर्चित किया है उम्र की दीवार लांघ कर छोटे-छोटे बच्चों ने। खेलने कूदने वाली दस-बारह साल की उम्र में मुंबई के मुंब्रा इलाके के दो बच्चों ने अपनी सूझ-बूझ और हिम्मत से अपने भाई को अपहृत होने से बचा लिया। वाक्या शुक्रवार को उस वक़्त का है जब ठाणे के मुम्ब्रा इलाका स्थित ज़रीन अपार्टमेंट निवासी दो बच्चे अपने चचेरे भाई के साथ अपार्टमेंट के बाहर खेल रहे थे। तभी बुर्का पहने एक महिला ने वहाँ खेल रहे छोटे बच्चे से संपर्क किया और उसे अपने साथ लेकर जाने लगी। तभी वहाँ मौजूद उसके दस वर्षीय भाई ने उसे देख लिए और उसने अपने चचेरे भाई से घर पर ख़बर करने की कहते हुए उस औरत का पीछा करना चालू कर दिया। तक़रीबन आठ मिनट तक उस अज्ञात महिला का पीछा करने के बाद परिवार और लोगों की मदद से अपने भाई को बचा लिया। मगर भीड़ को इकट्ठा होते देख अपहरणकर्ता भाग निकली।

पीछा करने वाले भाई ने बताया कि "मैं उसके पीछे चल रहा था और बार-बार पूछ रहा था कि वह मेरे भाई को कहाँ लेकर जा रही है। जब मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो वह मेरे भाई को लेकर तेज़ी से दौड़ पड़ी।"

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उन दोनों भाईयों के चाचा खुर्शीद वारसी ने बताया कि "क्षेत्र में विवाह समारोह की तैयारी की वज़ह से काफ़ी भीड़-भाड़ थी। तकरीबन 01:30 बजे, तीनों बच्चे अपने घर के बाहर खेल रहे थे। तभी महिला ने पहले मेरे छोटे भतीजे को बातचीत के नाटक में शामिल करने की कोशिश की। फ़िर उसने उसे उठा लिया और जाने लगी। इस पर जब मेरे दस वर्षीय भतीजे ने उस महिला से सवाल किया, तो उसने ज़वाब दिया कि वह उसे चॉकलेट दिलवाने के लिए ले जा रही है। वह तुरंत सावधान हो गया और अपने बारह वर्षीय चचेरे भाई के पास पहुँचा और उसे परिवार को सूचित करने के लिए कहा कि वह घर जाकर बताये कि उसके भाई को एक अज्ञात महिला अपने साथ ले जा रही है, और ख़ुद शोर मचाते हुए उसके पीछे-पीछे चल दिया।"

वारसी ने कहा कि लड़के ने अलॉर्म देना जारी रखा जब तक वह रुक नहीं गई। जल्द ही मेरे रिश्तेदार और पड़ोसी बच्चे को बचाने के लिए जगह पर पहुँचे। उसने भीड़ को देख कर ख़ुद को घिरा हुआ पाया और वह लड़के को छोड़ कर भाग गयी।"

उसके बाद स्थानीय निवासियों ने मुंब्रा पुलिस को सूचित किया और महिला की पहचान करने के लिए क्षेत्र से निजी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया। कैमरों की एक फुटेज में साफ़ दिखाई देता है कि कथित अपहरणकर्ता किस तरह से ढाई साल के बच्चे को अपने साथ लेकर जा रही है और कैसे उसका दस साल का बड़ा भाई शोर मचाते हुए उसे रोकने की कोशिश कर रहा है। 
इस घटना के बाद, अपार्टमेंट के निवासी इलाके में खेलने वाले बच्चों के बारे में अधिक सतर्कता बरतने की योजनाएं बना रहे हैं। एक निवासी रिज़वान अंसारी ने बताया कि "हम बच्चों की सुरक्षा के बारे में बहुत चिंतित हैं और हम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से बहुत जल्द सीसीटीवी कैमरों को स्थापित करेंगे।" 

मुंबई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, किशोर पासलकर ने कहा कि "हमें निवासियों से बच्चे को अपहरण करने के प्रयास के सिलसिले में जानकारी मिली है। हम फ़िलहाल मामले की जाँच कर रहे हैं, लेकिन अभी परिवार ने इस घटना के बारे में आधिकारिक शिकायत दर्ज़ नहीं की है।

तो ये था दस साल के बच्चों का दिमाग और उनकी सूझ-बूझ जिसकी बदौलत उन्होंने अपने भाई को अपहृत होने से बचा लिया। यह सच्ची घटना ये बताती है कि हमें भी अपने बच्चों को इस तरह की घटनाओं के लिए तैयार करना चाहिए जिससे वक़्त आने पर वो ख़ुद अपनी लड़ाई लड़ सकें।


फ़ोटो:- प्रशांत नार्वेकर
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