दीवाली पर नजर आया यूपी पुलिस का संवेदनशील चेहरा दीये बेचने वाले मासूमों को दी ख़ुशियाँ

अक्सर पुलिस का नाम सुनकर लोगों के मन में एक ही ख्याल आता है वो है कई सारे सवाल जवाब डर और कठोरता लेकिन कई बार ऐसे मौके भी आये है जब खाकी का मार्मिक चेहरा भी देखने को मिलता है जो बताता है कि पुलिस की वर्दी का ताना बाना  केवल अनुशासन और कठोरता से ही नही बल्कि कोमलता और इंसानियत से भी बुना गया है।

दीवाली की रौशनी से जहाँ पूरा देश जगमगा रहा था ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस की इंसानियत को देखकर हर किसी की जुबां पर एक ही बात थी "पुलिस हो तो ऐसी"  बात दीवाली के समय की है जब दो बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मी द्वारा तस्वीर को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया है। पूरी कहानी कुछ इस तरह है की  धनतेरस के दिन अमरोहा पुलिस के 7 पुलिसकर्मियों की टीम अमरोहा थानाधिकारी नीरज कुमार के साथ बाजार के दौरे पर पहुँची तो उन्होंने देखा की दो छोटे - छोटे मासूम से बच्चे कुछ दीपक लेकर उन्हें बेचने बैठे थे। जैसे ही बच्चों ने पुलिस को देखा तो वे शुरुआत में घबराए उन्हें लगा की पुलिस वाले उन्हें हटाने आये है लेकिन असल में  पुलिस का मन भी उन मासूमों को देखकर पिघल गया और पुलिस उनकी मदद के लिए उनके पास पहुँची।

SHO नीरज कुमार ने बताया कि" हम उन बच्चों की मदद करने के लिए ही वहाँ गये थे। किसी ने मुझे एक वीडियो भेजा था जिसमें बताया गया था की बाजार में दो बच्चे पैसे कमाने के लिए दीये बेचने की कोशिश कर रहें हैं। जिनमे से एक लड़की की उम्र छह साल थी और लड़का लगभग 10 वर्ष का था। बच्चों ने हमें बताया कि वे उनकी माँ और दादा दादी के साथ रहते थे, क्योंकि उनके पिता का निधन हो गया था और घर चलाने के लिए दीये बेचने आये है ये सुनकर हमारा मन करुणा से भर गया।"

सबसे पहले तो पुलिसकर्मीयों ने बच्चों से स्वयं दीये खरीदे और फिर उनकी और अधिक बिक्री करवाने के लिए अन्य लोगो को भी प्रेरित किया। सब - इंस्पेक्टर क्षत्रपाल सिंह ने बताया कि  "हम बाजार से गुज़र रहे थे उस दौरान वो बच्चे हमें मिल गये। उनकी सच्चाई और मासूमियत देखकर हमने सोचा कि हमें इनके लिए कुछ करना चाहिये कुछ दिये हमने खरीद लिए और ये देखकर दूसरे लोग भी  लोग दीये खरीदने के लिए आगे आए।

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SHO नीरज कुमार ने बताया कि "मैं स्वयं निचले मध्यम वर्ग के परिवार से आया था मुझे छोटी चीजों का मूल्य पता है जो त्यौहार को त्यौहार बनाती है। मुझे उम्मीद है कि हमारा प्रयास रंग लाया होगा और उन बच्चों ने भी अपनी दिवाली को ख़ुशी ख़ुशी मनाया होगा।"

दिवाली रौशनी और खुशियों का पर्व है पुलिस के इस सराहनीय कदम से उन बच्चों के चहरे पर जो मुस्कान आई वो हजारों दीयों की रौशनी के बराबर है।

फोटो साभार -  theprint.in

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