अपने दो साल के बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र में दाखिल करा इस जिला कलक्टर ने पेश की मिसाल

शिक्षा का उजियारा हर तरफ फैले और अज्ञान के अंधेरे को दूर करे यह प्रयास है आज के बदलते भारत का लेकिन साथ ही एक विकट समस्या है बढ़ती महंगाई क्योंकि महंगाई के बढ़ते स्तर ने शिक्षा  को भी पूरी तरह प्रभावित किया है। हर माता पिता चाहते है की उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले लेकिन बड़े स्कूलों की चकाचौन्ध उनकी ऊँची फीस सुनकर माता पिता के सपने मन में ही दम तोड़ने लगते है।

लेकिन एक ऐसे सच से हम आपको आज वाकिफ़ कराने जा रहें है जो प्रत्येक अभिभावक के लिए जानना बेहद जरूरी है और वो सच यह है की बेहतर और गुणवत्ता युक्त शिक्षा केवल ऊँची फीस और बड़ी ईमारत वाले स्कूल में ही नही बल्कि छोटी सी आंगनबाड़ी में भी प्राप्त की जा सकती है। इस बात का पुख्ता सबूत है उत्तराखण्ड के चमोली जिले की जिला कलेक्टर स्वाति भदौरिया जिन्होंने अपने बेटे का किसी बड़ी स्कूल में नही बल्कि आंगनबाड़ी केंद्र में दाखिला करवाया है। उन्होंने प्राइवेट स्कूल की जगह अपने दो वर्षीय बेटे का दाखिला आंगनबाड़ी गोपेश्वर गांव के आंगनबाड़ी सेंटर में करवाया है। बेटे को दाखिला दिलाने के लिए डीएम स्वाति भदौरिया खुद अपने बेटे अभ्युदय के साथ आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची और एडमिशन होने के बाद स्वाति ने अपने बेटे को आंगनबाड़ी केंद्र की कक्षा में अन्य बच्चों के साथ बिठाया। उनके चहरे पर वही ख़ुशी थी जो अभिभावक को पहली दफा अपने बच्चे को स्कूल भेजने पर होती है उसके बाद डीएम ख़ुशी ख़ुशी अपने ऑफिस रवाना हो गयी। तो वही अभ्युदय ने केंद्र में अन्य बच्चों के साथ क्लास में खेल-खेल में पढ़ने की शुरुआत की और अन्य बच्चों की तरह साथ बैठकर केंद्र में बने खाने का लुत्फ़ भी उठाया वही बच्चें भी अपने नए साथी से बातचीत में व्यस्त रहें।

w7nxd7qdpwmktzzrx2qgjekzwudgtlhb.jpg

आंगनबाड़ी केंद्र की वालंटियर मंजू भट्ट ने बताया कि " मंगलवार को अभ्यूदय का पहला दिन था। उसने पहले दिन बाकी बच्चों की तरह वही की बनी खिचड़ी खाई और खेल कूद की।"

2kphmb83v62kputtzhxwnnvvmifv8xx8.jpgफोटो साभार - फेसबुक 

अपने बच्चे को किसी बड़े प्राइवेट स्कूल में दाखिल नही करवाकर उसे आंगनबाड़ी केंद्र में दाखिल करवाने की वजह बताते हुए डीएम स्वाति बताती है कि "आंगनबाड़ी केंद्र में आम बच्चों के साथ रहकर अभ्युदय सोशल, मेंटल, फिजिकल ग्रोथ करेगा तथा आम बच्चों के बीच रहकर ही उसका सही विकास होगा और जो शिक्षा वो बच्चे प्राप्त कर रहें है वही मेरा बेटा भी करेगा।" अभ्युदय ने भी हर बच्चे की तरह घर आकर माँ को बताया की उसने पूरा दिन क्या क्या किया किससे मिला। इस बात को साझा करते हुए स्वाति ने बताया कि "मेरे बच्चे ने अन्य बच्चों के साथ खाना खाया और जब वो वापस आया तो बहुत खुश था। उसने अपने नए दोस्तों के नाम बताये जिनसे वो मिला।"

u3gwgbauiwiwqcxte73uqyslw4cjzju6.jpgफोटो साभार - zeenews.india.com

वाक़ई डीएम स्वाति ने समाज के उन लोगो के आगे एक मिसाल पेश की है जो शिक्षा को पैसों के तराजू में तौलते है। स्वाति के पति नितिन भदौरिया भी आईएएस ऑफिसर है जो अल्मोड़ा में कार्यरत है और दोनों ने ही अपने बच्चे को आंगनबाड़ी में दाखिल करने का निर्णय लिया। ऐसा नही था की गोपेश्वर गांव में प्राइवेट प्ले स्कूल और चिल्ड्रन क्रैच नही है लेकिन फिर भी डीएम ने बेटे को आंगनबाड़ी एडमिशन दिलवाया। उनके इस निर्णय की जहाँ चारों तरफ सराहना हो रही वही दूसरी ओर लोगों का विश्वास भी सरकारी  विद्यालयों और आंगनबाड़ी केन्द्रो पर बढ़ने लगा है इस बात का अंदाज़ा  इस बात से लगाया जा सकता है की जब आंगनबाड़ी में पढ़ रहे अन्य बच्चों के अभिभावकों को इस बात का पता लगा तो वे भी बेहद खुश नजर आ रहें हैं।

Share This Article
2169