उन्नत किस्म की प्याज को विकसित कर इस कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के चेहरे पर लाई मुस्कान

आज के तकनिकी युग में दिन प्रतिदिन कुछ ना कुछ नए आविष्कारों के बारे में सुनने को मिल जाता है ऐसे में बात अगर खेती किसानी की हो तो खेती में निरंतर कुछ ना कुछ नए प्रयोग होते ही रहते है नयी और उन्नत किस्में विकसित की जा रही है जिससे की किसानों की आमदनी भी बढ़ी है और उनका जीवन स्तर भी सुधरा है। कुछ ऐसी ही उन्नत प्याज की किस्म विकसित है उत्तरप्रदेश विश्वविद्यालय के सहयोगी प्रोफेसर डॉ. आर. के. सिंह ने उन्होंने रोजमर्रा के हमारे खाने का ज़ायका बढ़ाने वाली प्याज की उन्नत किस्म तैयार की है जो किस्म केवल 80-83 दिनों में तैयार हो जाती है।

झांसी के कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय के सहयोगी प्रोफेसर डॉ. आर.के. सिंह ने प्याज की जो किस्म  विकसित है उसकी विशेषता है की जहाँ  सामान्य किस्में विकसित होने में 110 दिन लेती है वही यह नवीन किस्म केवल 80 - 83 दिनों में तैयार हो जाती है। एक ओर सामान्य किस्मों के लिए 250 - 280 प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है वही इस नई किस्म से प्रति हेक्टेयर 300 - 350 क्विंटल मतलब लगभग 20% अधिक उपज प्राप्त होती है।

ysntmqcvdqftc2cn2lpmm5dkaqepj5tp.jpg

प्रोफेसर डॉ. आर.के. सिंह बताते है कि " इस नई किस्म की प्याज को सामान्य तापमान में ढाई महीने तक अंकुरित किए बिना संग्रहीत किया जा सकता है जबकि सामान्य प्याज एक महीने के भीतर ही अंकुरित हो जाता है। इसे 80 दिनों तक ठंडे भंडारण में भी संरक्षित किया जा सकता है, जो कि सामान्य किस्मों की 'रहने वाली शक्ति' से लगभग चार गुना अधिक है।"

डॉ आर. के. सिंह के दिमाग ने यह विचार एक दशक पहले नासिक में अपने एक  शोध कार्य के दौरान आया जहां उन्हें राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान और विकास फाउंडेशन (NHRDF) में काम शुरू किया था। इस विशेष किस्म के प्रारंभिक शोध के दौरान उन्होंने इसे लाइन - 883 नाम दिया था। उसके कुछ समय बाद बंडा में स्थानांतरित होने पर उन्होंने अपने परीक्षण के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र का चयन किया।

डॉ. सिंह बताते है कि " पिछले दो सालों में मुझे अच्छे नतीजे मिले अपनी नई किस्म  स्थानीय बीमारियों के लिए काफी सहनशील है साथ ही नई नस्ल में 5 - 6 सेमी व्यास के साथ 50 - 55 सेमी लंबाई की वृद्धि हुई है। इसके लिए कम पानी की आवश्यकता होती है और खरीफ फसल में इसके सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं। अब तो कुछ स्थानीय किसानों ने इस उन्नत बीज का उपयोग शुरू कर दिया है और उन्हें बहुत अच्छे परिणाम मिल रहें है जिससे वे काफी खुश है।

हम सभी जानते है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि आधारित है ऐसे में इस तरह की नयी किस्मों का विकसित होना जो को कम व्यय में अधिक उपज प्रदान करती हो किसानों के लिए वरदान है साथ ही एक उम्मीद की किरण है जो भारतीय कृषि को सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी ।

Share This Article
500