उमा की जुनून और हिम्मत ही थी जो वह रेड लाईट एरिया से निकलकर एक सफल डांस शिक्षक बनीं

प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है लेकिन आज भी एक ऐसा तबक़ा है जिसे लोग सम्मान की नजर से देखना ही नहीं चाहते हैं। कोलकाता का यह  क्षेत्र उन बदनाम गलियों की जीती जागती दास्तां है जहाँ हर दिन ना जाने कितनी महिलाओं को मर-मर के जीना पड़ता है और उस पर समाज के ताने उनकी अंतरात्मा तक को कुरेद के रख देते है। ऐसे में कुछ महिलाएं तो जीने की उम्मीद ही छोड़ देती है लेकिन कुछ ऐसी भी होती है जो हौसला रखती हैं आगे बढ़ने का और खुले आसमान में उड़ने का। हमारी आज की कहानी एक ऐसी ही लड़की से जुड़ी है जिसका जन्म हुआ कोलकाता के एक रेड लाईट क्षेत्र में लेकिन अपने जुनून के चलते वो उन गलियों से बाहर निकल कर मिसाल बन गयी उन लड़कियों के लिए जो रेड लाईट इलाके में रहती है।

यह कहानी है उमा दास की जिसका जन्म रेड लाईट एरिया में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उमा की 16 वर्ष की छोटी सी उम्र में शादी कर दी गयी। उसका पति उसके साथ बिलकुल अच्छा व्यवहार नहीं करता था कुछ समय बाद ही उमा ने एक बेटे को जन्म दिया लेकिन उसके बाद पति के अत्याचार दिनों दिन बढ़ने लगे जिसके चलते उसने हिम्मत करके उससे अलग होने का निर्णय लिया और चार साल की लम्बी लड़ाई के बाद उमा को अपने बेटे की कस्टडी मिली। इस दौरान ही उमा जब 19 वर्ष की थी तब उनकी आँखों के सामने एक सेक्स वर्कर को एक ग्राहक द्वारा पैसों को लेकर हुई नोकझोंक के चलते जिन्दा जला दिया गया। जिसने उमा के मन को अंदर तक हिला दिया और तभी उन्होंने अपने आप को सशक्त बनाने का निर्णय लिया। 

उमा बताती है कि "मेरी मां को वेश्यालय में बेच दिया गया था और मेरा जन्म भी रेड लाईट क्षेत्र में हुआ था। बचपन से लेकर जवानी तक सारी जिंदगी मैंने युवा लड़कियों की आंखों में डर देखा है। मैं उस डर में नहीं जीना चाहती थी।"

paf7uabuwe3ktt9evsl4bds7el84u98j.jpgफोटो साभार - edexlive.com

उमा ने हिम्मत दिखाई रेड लाईट क्षेत्र से निकलने की और आज अपने हुनर की बदौलत उमा डांस टीचर बन गयी है और बच्चों को डांस सिखाती है। इतना ही नहीं 25 साल की उमा आज अपने पाँव पर खड़ी है और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के रेड लाईट क्षेत्र मुंशीगंज में सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली इकाई का संचालन भी करती हैं। उमा को आज रेड लाईट एरिया में बच्चा-बच्चा उमा दीदी के नाम से पुकारता है साथ ही वह मुंशीगंज में रहने वाली अन्य युवा महिलाओं के लिए आशा की किरण है जो उन्हें देह व्यापार की आग से दूर एक सम्मान का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है। उमा ने नृत्य के कई प्रारूप को सीखा जिनसे आज वे डांस मूवमेंट थेरेपी (डीएमटी) का उपयोग परामर्श, मनोवैज्ञानिक पुनर्वास, आत्म अभिव्यक्ति और सशक्तिकरण के वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में करती है।

उमा बताती है कि "मैं हमेशा ही डांस करना चाहती थी और आज डांस मेरे जीवन का एक जरूरी अंग है। मैं कई लड़कियों को डांस सिखाती हूँ साथ ही हम एक सैनिटरी पैड बनाने की इकाई भी चलाते हैं। लड़कियों को जूट बैग बनाना भी सिखाया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम चाहते है लड़कियां बिना डरे गरिमा के साथ जीवनयापन करें।"

उमा ने अपने काम के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का मान बढ़ाया है जिसके चलते पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और अमेरिकी अभिनेता एशले जुड ने उमा से मुलाकात कर उनके काम की सराहना की। उमा चाहती है कि रेड लाईट में रहने वाली महिलाओं को भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार है और वो उन्हें प्राप्त हो उनका डर खत्म हो और वे सशक्त होकर आगे बढ़े और अपने पैरों पर खड़ी हो जिससे की उन्हें इस अंधी दुनिया से आजादी मिल सकें।

वाक़ई उमा जो कर रही है वो बहुत ही हिम्मत का काम है। उन्हें हर पल जान का खतरा भी रहता है कई लोग उन्हें धमकियां भी देते है लेकिन वो अपने संकल्प के साथ निडर होकर आगे बढ़ती है।



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