भारत की पहली महिला अंपायर बनने का गौरव हासिल करने के लिए तैयार है मुंबई की वृंदा

देश की बेटियों ने अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन और काबिलियत से हर क्षेत्र में लोहा मनवाया है। दशकों से जिन क्षेत्रों में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी, अब उसमें भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी जा रही है। अब 29 वर्षीय वृंदा राठी राष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहली महिला अंपायर बनने का गौरव हासिल करने की ओर आगे बढ़ चुकी हैं। 

पेशे से फिटनस कोच राठी इन दिनों वीकेंड पर मुंबई में खेली जाने वाली लोकल क्रिकेट में अंपायरिंग करती नजर आती हैं। हाल ही में, उन्होंने बीसीसीआई के लेवल -2 एम्पायरिंग परीक्षा में सफलता हासिल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैचों में अंपायरिंग के लिए योग्य हो गईं हैं। ऐसा पहली बार होगा जब एक महिला अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग करती नजर आयेंगी। हालाँकि, इस लेवल तक पहुँचने तक का उनका सफ़र उतना आसान नहीं था।

उन्होंने हर सप्ताह के आखिरी दिनों में मुंबई में होने वाली लोकल मैचों में अंपायरिंग करना शुरू किया। हर साल सितंबर से अप्रैल तक, अब वह औसतन 60 मैचों में अंपायरिंग की कोशिश करती रहीं। उनका कहना है कि, "अंपायरिंग के लिए आपको अपनी कुशलता को और तेज़ करना होता है।" 

हालांकि अंपायरिंग परीक्षा के लिए खेलने का अनुभव जरूरी नहीं है, लेकिन राठी अपने कॉलेज के दिनों के दौरान एक मध्यम तेज गेंदबाज रह चुकीं हैं। उन्होंने चार वर्षों तक मुंबई विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व भी किया है। बीसीसीआई परीक्षा के विभिन्न स्तरों को पास करने हुए अंततः उन्हें इस मुकाम तक पहुँचने में सफलता हासिल हो गयी है।

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फ़ोटो साभार: टाइम्स

उनका मानना है कि अहंकार एक ऐसी चीज है जो एक अच्छे अंपायर में कभी नहीं हो सकता। लड़के भी महिला अंपायरों की उपस्थिति में अपने आक्रामकता को नियंत्रित करते हैं। उन्हें विश्वास है कि जैसे-जैसे समय बितेगा, महिला क्रिकेट भी पुरुषों क्रिकेट की ऊंचाई तक पहुंच जाएगा।

वृंदा की सफलता निश्चित रूप से महत्वाकांक्षी महिलाओं को अंपायरिंग के क्षेत्र में भी करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। साथ ही उन्होंने उन रुढ़िवादी सोच को बदलने की कोशिश की है, जहाँ आज भी लोग लैंगिक असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं।

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