सोशल मीडिया पर वायरल चल रही यह तस्वीर माता-पिता के त्याग और शिक्षा के महत्व को समझाती है

हर माता पिता का सपना होता है की उनका बच्चा पढ़ - लिख कर बड़ा आदमी बनें उसे वो हर ख़ुशी मिले जो उन्हें नही मिल पाई है फिर भले ही माता पिता शिक्षित ना हो लेकिन वो इतना जरूर समझते है की शिक्षा एक इंसान के लिए आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए मेहनत मजदूरी करके भी अपने बच्चों की शिक्षा में कोई कमी नही छोड़ते है। आज के समय में हर वो इंसान जो बहुत मुश्किल से अपने और अपने बाल बच्चों के लिए दो समय के रोटी का इंतज़ाम कर पता है वह भी यह कोशिश करता है के हमारा बच्चा पढ़ लिख कर एक अच्छा इंसान बने और एक अच्छी और कामयाब ज़िन्दगी जिए।

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आजकल सोशल मीडिया में एक कहानी बहुत तेज़ी से वायरल हो रही है जिस पर देश की कई बड़ी हस्तियों ने भी अपने विचार रखें हैं। ये कहानी है पड़ोसी देश बांग्लादेश में रहने वाले एक ऐसे लड़के हिसामुद्दीन खान के बारे में  जिसके पिता एक रिक्शा चालक है और उससे जो आय होती है उसी से ही उनके परिवार का गुजर बसर चलता है। अपने बेटे को अच्छी शिक्षा मिल सकें बस इसलिए ही वे दिन रात साइकिल रिक्शा चलाते है लेकिन अपने बेटे के आगे चेहरे पर शिकन तक नहीं आने देते आज उनकी इस मेहनत का ही नतीजा है कि उनका बेटा हिसामुद्दीन इंजीनियर बन गया है।

लेकिन असल कहानी यह नहीं है ये तो महज एक अफवाह है जो लोगों में फैला दी गई है। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल होने के बाद खुद हिसामुद्दीन ने बताया कि" मेरा नाम वलीउल्लाह है और मेरे पिता रिक्शा चालक नहीं बल्कि किसान हैं और दिन-रात खेत खलियान में काम कर के उन्होंने मुझे इस क़ाबिल बनाया है कि मैं इंजीनियर बन गया। आज मैं जो कुछ भी हूँ उनकी क़ुर्बानियो का नतीजा है।"

इस कहानी के सोशल मीडिया पर वाइरल होते ही मशहूर क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने इस फोटो में दिख रहे लड़के को इंडियन लड़का समझ कर तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया जिसमें एक लड़का रिक्शा खींच रहा है और उसकी पिछली सीट पर एक बुजुर्ग कपल बैठे हुए है। तस्वीर के साथ ही वीरू ने कैप्शन में लिखा है- ‘सुन्दर, हिसामुद्दीन खान एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और उसके पिता एक रिक्शा चालक हैं। और कन्वोकेशन के बाद वह अपने माता-पिता को रिक्शे में बैठाकर ले जा रहा है।"

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वायरल कहानी भले ही सही नहीं हो लेकिन सच्चाई यह है कि वलीउल्लाह नाम के इस इंजीनियर ने भी एक किसान का बेटा होने के बावजूद कई मुश्किल हालातों में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है जो की सम्मान का विषय है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तान का हो या बांग्लादेश का उसका नाम हिसामुद्दीन हो या वलीउल्लाह फर्क इस बात से पड़ता है कि इस कहानी को प्रेरणा बनाकर ना जाने कितने ही बच्चें अपने माता पिता के त्याग को समझेंगे और उनके सपनों को पूरा करेंगे।



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