यूथ ओलम्पिक में देश के लिए पदक जीतने वाले मजदूर के इस बेटे की कहानी बेहद प्रेरक है

ज़माने को अपना हुनर दिखाना है मुझे अपने सपनों को हक़ीक़त में बदलना है मुझे जरूरत है बस लम्हें की फिर अपने इरादों की बुलंदी से मंजिल तक जाना है मुझे। प्रतिभा को क्या चाहिए बस एक अवसर जहाँ वो प्रदर्शित हो सके। कई बार ऐसा मौका आया है जब भारत की प्रतिभाओं को केवल एक अवसर मिला और उन्होंने कई कीर्तिमान रच डाले। एक बार फिर भारत की प्रतिभा का डंका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बजने लगा है। भारत के प्रवीण चित्रावल ने यूथ ओलिंपिक गेम्स मेंस में ट्रिपल जंप प्रतियोगिता में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया है इसी के साथ ही वे इस टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले भारत के दूसरे एथलीट बन गये है। उनसे पहले सूरज पवार  5000 मीटर पैदल चाल में रजत पदक जीत चुके हैं। यूथ ओलम्पिक में भारत को अब तक 12 पदक मिल चुके हैं। जिसमें तीन स्वर्ण और आठ रजत शामिल हैं। 

प्रवीण चित्रावल तमिलनाडु के रहने वाले है बहुत संघर्षो से गुजरने के बाद उनके जीवन में यह मुक़ाम आया है। प्रवीण के पिता एक दिहाड़ी खेतीहर मजदूर है जिसकी जीविका का साधन मजदूरी है। आर्थिक संकटों के चलते भी प्रवीण ने अपने सपनों को खोने नही दिया यही कारण है की आज तमिलनाडु के तंजावुर जिले के 17 वर्षीय प्रवीण  15.68 मीटर की दूरी पार करके दूसरे चरण की स्पर्धा में पांचवें स्थान पर रहें लेकिन पहले चरण में वह 15.84 मीटर की दूरी के साथ तीसरे स्थान पर थे और इस तरह कुल मिलाकर वह 31.52 मीटर के साथ भारत को कांस्य पदक दिलाने में सफल रहें।

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आपको बता दें की नए प्रारूप के अनुसार यूथ ओलंपिक में ट्रैक एवं फील्ड चार किमी की क्रास कंट्री को छोड़कर फाइनल नहीं होगा साथ ही प्रत्येक स्पर्धा दो बार आयोजित की जाएगी तथा दोनों दौर के परिणाम मिलाकर संयुक्त रूप से अंतिम सूची तैयार होगी जिससे की पदक निर्धारण किया जायेगा। इस प्रतियोगिता में क्यूबा के अलेसांद्रो डियाज ने कुल 34.18 मीटर के साथ स्वर्ण हासिल किया जबकि नाईजीरिया के इमेनुएल ओर्टिसमेयवा ने रजत पदक पर कब्जा जमाया।  कुछ समय पूर्व हुए खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में प्रवीण ने स्वर्ण पदक हासिल किया था प्रवीण को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के कोच इंदिरा सुरेश के द्वारा चेन्नई में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

उनके कोच इंदिरा सुरेश प्रवीण के बारे में बात करते हुए कहते है कि "जब प्रवीण चेन्नई में क्लास सातवीं में था तो मैंने उन्हें पहली बार देखा और अपने पास प्रशिक्षण के लिए बुला लिया। उसने भी मेरे साथ ही प्रशिक्षण लेने का फैसला लिया। प्रवीण ही नहीं उसका छोटा भाई भी मुझसे प्रशिक्षण ले रहा है वह बहुत ही गरीब परिवार से है।"

प्रवीण ने इस साल जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था और प्रवीण अभी कर्नाटक के ही एक कॉलेज में खेल कोटा से बी.ए की पढ़ाई कर रहे है।

उनके कोच इंदिरा का कहना है कि " वह अपने खेल के प्रति बेहद केंद्रित व्यक्ति है और इससे संतुष्ट नहीं होगा की उसे कांस्य मिला। मैंने कांस्य पदक मिलने के बाद उससे बात की है और वह निराश है कि वह बेहतर नहीं कर सका। लेकिन कांस्य पदक भी एक बड़ी उपलब्धि है।"

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प्रवीण जैसी प्रतिभाओं को अगर बेहतर अवसर प्रदान किया जाए तो वो पूरा जी जान लगाकर भारत को खेल की बुलंदियों पर ले जाने का साहस रखते हैं। हम प्रवीण को उनके प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।


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