कर्नाटक की यह लड़की अपनी प्रतिभा के दम पर सिंगापुर, फ्रांस और चीन में बजाएगी भारत का डंका

पहले क्रिकेट फिर कुश्ती ,बैडमिंटन, रेसिंग, बॉक्सिंग ,टेनिस लगभग सभी खेलों में महिलाओं ने अपने आप को साबित किया है और विश्व स्तर पर मुक़ाम हासिल किया है। हमारे देश की महिलाओं की प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय सहभागिता से पूरा विश्व वाकिफ़ है और अब बात अगर स्टैंड अप पैडलिंग की हो तो गर्व की बात है कि भारत को स्टैंडअप पैडलिंग की प्रतिभा भी मिल चुकी है। हम बात कर रहें है कर्नाटक शहर की रहने वाली देश की पहली स्टैंड अप पैडलिंग सनसनी तन्वी जगदीश के बारे में। वह एक बार फिर से विदेशी धरती पर समन्दर की लहरों के साथ अठखेलियां करने को तैयार है।

तन्वी अगले दो महीनों में आयोजित होने वाली दो अंतर्राष्ट्रीय स्टैंड अप पैडलिंग प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। तन्वी सिंगापुर में आयोजित ओशन कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र स्टैंड अप पैडलिंग प्रतिभागी है जो 17 और 18 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इसी के साथ ही स्टैंड अप पैडलिंग फेडरेशन दिसंबर के दूसरे सप्ताह में पेरिस में एसयूपी क्रॉसिंग के लिए भी तन्वी को भेज सकता है। 

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तन्वी अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 मेडल अपने नाम कर चुकी है। तन्वी जब लहरों के साथ आमना सामना करती है तो उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है साथ ही देखने वाले को भी रोमांचित कर देता है। तन्वी का सपना है की वह साल 2024 में आयोजित  होने वाले स्टैंड अप पैडलिंग विश्व कप को हासिल कर देश का नाम रोशन करें।तन्वी अपने आप को बेहद बेहतर बनाने का कोई अवसर नही छोड़ना चाहती है इसलिए वो दिन रात एक करके अभ्यास करती है जिससे की उसकी स्टैंडअप पैडलिंग को और अधिक धार मिल सकें।

तन्वी कहती है कि "मुझे अपने खेल से बहुत प्यार है, मैं प्रैक्टिस के लिए सुबह बिस्तर से 3.30 बजे तक उठ जाया करती हूँ। और उसके बाद 5.30 बजे तक संमदर में प्रैक्टिस करती हूँ उससे पहले मैं ध्यान एकाग्रचित करने के लिए योग करती हूँ। मैं क्लब से 10 मिनट की पैदल दूरी पर स्थित मुल्की में अपनी दादी के घर में रहने आ गई हूँ जिससे की मैं समय की बचत कर ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस कर सकूँ।"

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तन्वी दिन में चार - पांच घंटे पानी में तैयारी कर कुछ घंटे किनारे पर बिताती है। वर्तमान में तन्वी को विश्वप्रसिद्ध हेडन रोड्स द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है जो की दुनिया भर के एथलीटों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुके है। तन्वी अपनी तरफ से जी तोड़ कोशिशें कर रही है की भारत की स्टैंड अप पैडलिंग विश्व कप में जीत दिलाने की लेकिन बेहद ही आश्चर्य का विषय है की स्टैंड अप पैडलिंग और स्नोबोर्डिंग दो दशकों से अधिक समय से देश में चल रही है लेकिन इसे किसी भी प्रकार का कोई सरकारी समर्थन हासिल नहीं है। सरकारी मापदण्डों में देखा जाए तो स्टैंड अप पैडलिंग अभी भी भारत में एक नवजात चरण में है सरकार शायद ही कभी पानी के खेल को बढ़ावा देने में रूचि रखें।

तन्वी जैसी प्रतिभा को जहाँ एक तरफ अगले महीने चीन में होने वाले विश्व कप में भाग लेने का सुनहरा अवसर मिला है तो दूसरी ओर तन्वी आर्थिक मदद के लिए प्रायोजकों की तलाश में है ताकि वह देश में और अधिक पुरस्कार लाने पर ध्यान केंद्रित कर सके। तन्वी जैसी कई प्रतिभाओं को अवसर और आर्थिक सम्बल की तलाश है एक बार उन्हें वो मिल जाए फिर भारत की झोली में एक के बाद एक मेडल आने से कोई नही रोक सकता।




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