"मैं 8 मिनट तक मरणासन्न अवस्था में रही और फिर ज़िन्दगी का एक अहम पहलु समझा"

कुछ समय पहले की बात है जब तमिलनाडु के व्हीलचेयर रेसिंग चैंपियन मनोज कुमार को आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैम्पियनशिप के लिए विशेष पैरालैम्पिक व्हीलचेयर की आवश्यकता थी। उन्होंने हर किसी से सहायता मांगी लेकिन चारों ओर से निराशा हाथ लगने के बाद उनका दिल बैठ चुका था। अंतिम कोशिश के रूप में उन्होंने सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट सोलफ्री से संपर्क किया जो गंभीर रूप से विकलांग लोगों की मदद करता है। सोलफ्री की मदद से वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप से सिर्फ दो सप्ताह पहले व्हीलचेयर प्राप्त करने में सफल रहे। और उस टूर्नामेंट में उन्होंने गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा जमाया।

न जाने देश में ऐसे कितने मनोज हैं जो अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने के बावजूद संसाधनों के अभाव में हार मान बैठते हैं। सोलफ्री की संस्थापिका प्रीती श्रीनिवासन ने इनके दर्द को समझा और अबतक सैकड़ों लोगों की जिंदगी बदल चुकी हैं। एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर की क्रिकेटर, तैराक और एक मेधावी छात्रा, प्रीती जब 18 साल की थीं तब उनका सामना एक बेहद ही दर्दनाक दुर्घटना से हुआ और दुष्परिणाम गर्दन से नीचे उन्हें लकवा मार गया। 11 वर्षों तक दुनिया से दूर रहने के बाद उन्होंने इस बात पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया कि वह शरीर के बिना भी क्या कर सकती हैं।

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प्रीती के लिए एक सामान्य दिन की शुरुआत सुबह 8.30 बजे होती है। फिर वह अपने देखभाल करने वाले की मदद से नित क्रिया से निवृत हो जाती हैं। 10 बजे तक वह अपने वॉयस-सक्षम लैपटॉप के जरिये लोगों के जीवन में प्रेरणा का संचार करने के लिए तैयार रहती हैं। उनका सकारात्मक दृष्टिकोण, सादगी और विश्वसनीयता वाकई में बेहद प्रेरणादायक है। केनफ़ोलिओज़ के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी कहानी को साझा किया।

"जब मैं चार वर्ष की थी तभी मैंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। 300 लड़कों के बीच मैं एकमात्र लड़की थी जो कोचिंग लेती थी। मैं आठ साल की थी जब मैंने राज्य स्तरीय टीम के लिए खेला और यह एक रिकॉर्ड है जो अभी तक टूटा नहीं है और मैं इस रिकॉर्ड को टूटने का इंतजार कर रही हूं।"

आज, वह अपने प्रेरक भाषणों के जरिए जीवन के संघर्षों को देखने के लोगों के नज़रिये में परिवर्तन ला रही हैं। साथ ही उनका संगठन शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए बड़े पैमाने पर काम करता है। उन्होंने अबतक खिलाड़ियों की बेहतर गतिशीलता के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए लाइट-वेट एल्यूमिनियम वाले 100 से अधिक व्हीलचेयर दिए हैं। इतना ही नहीं हर महीने लगभग 20 गंभीर रूप से अक्षम लोगों को हज़ार-हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।

प्रीती का मानना है कि "आपको केवल दूसरों को बढ़ावा देना है। और जो व्यक्ति औरों को प्रेरित करता है वह भी इससे लाभ प्राप्त करता है, है ना? किसी को भी दूसरों की तुलना में यह महसूस करा कर नीचा नहीं दिखाना चाहिए कि वे किसी की मदद ले रहे हैं। वैसे, हम सभी किसी न किसी पर निर्भर हैं या हमारे उपर कोई न कोई निर्भर है। अगर हम इसी सोच के साथ जिंदगी में आगे बढ़ेंगे तो यह और खूबसूरत होगा।

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फाइल फ़ोटो: प्रीती अपने पिता के साथ

जीवन के अर्थ के बारे में बात करते हुए प्रीती बताती हैं कि उसने दो निकट मृत्यु अनुभवों का सामना किया है। "मैं दो बार मर चुकी हूं और दूसरी बार मैं आठ मिनट तक इस अवस्था में रही। यह एक बहुत डरावना अनुभव था। लेकिन जब मैंने वास्तव में अपने शरीर को महसूस किया तो मेरे सारे डर धीरे-धीरे ख़त्म हो गए। अब मुझे विश्वास है कि मुझे एक उद्देश्य को पूरा करने के लिए मजबूती के साथ खड़ा रहना है। मुझे बस इतना करना है कि मैं अपने काम को पूरे मन से खुशीपूर्वक करूँ।"

प्रीती जिस धैर्य और इच्छाशक्ति से काम कर रही हैं वैसे में उनके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। उनकी ताकत और असाधारण उपलब्धियां ,उनकी अनंत क्षमता के ज्ञान और समझ का नतीजा ही है। प्रीती के लिए, अपनी जरूरतों के लिए किसी और पर निर्भर होना और असहाय महसूस करना जीवन में दो कठिन चीजें हैं। और जब आप उनके काम को देखते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वह दूसरों को सशक्त बनाने के लिए यह सब कुछ कर रही हैं।

प्रीती अपनी प्रेरक स्पीच और व्यक्तिगत तथा कॉर्पोरेट वित्त पोषण के माध्यम से संगठन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्यरत हैं। वह न केवल दूसरों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं बल्कि व्यावसायिक प्रशिक्षण, नौकरी नियुक्ति सहायता और किसी भी अन्य सहयोगी जैसी सेवाएं मुहैया कर उन्हें शक्ति प्रदान भी करती हैं।

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एक दिन, प्रीती की मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसका निचला शरीर पूरी तरह से निष्क्रिय था। यह आदमी एक झोपड़ी में रहता था और गरीबी से जूझ रहा था। प्रीती ने उस आदमी से बात की और उसकी मानसिक बाधाओं को तोड़ा। उन्होंने उसे इस बात पर ध्यान देने के लिए कहा कि वह क्या कर सकता है इसके बजाय वह क्या नहीं कर सकता है। उस आदमी ने कहा वह खेती कर सकता है। फिर क्या था, सोलफ्री ने पट्टे पर उसे खेती योग्य भूमि का एक टुकड़ा दिया और उसे उस पर काम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। एक साल में ही उसने चावल के 100 से अधिक बोड़ों का उत्पादन किया और एक लाख रुपये से अधिक की कमाई भी की। यह वाकई में बेहद प्रेरक परिवर्तन था।

"मैंने कभी किसी से सहायता के बदले पैसे नहीं लिए। मुझे लगता है कि जब आप एक मजबूत इरादे से कुछ करना चाहते हैं, तो चीजें अपने आप आसान हो जाती है। अपने आप को भगवान को आत्मसमर्पण करना और काम के प्रति ईमानदार होना सबसे महत्वपूर्ण है।"


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