अब ट्रेन में यात्रियों को मिलेगी उनकी सबसे अच्छी दोस्त हुई 'लाइब्रेरी ऑन व्हील्स' की शुरुआत

कहते है किताबें व्यक्ति की सबसे अच्छी दोस्त होती है क्योंकि उनका अध्ययन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पढ़ने वाले के व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। अगर एक अच्छी किताब साथ हो तो लम्बे से लम्बा सफ़र भी चुटकियों में गुजर जाता है कुछ इसी बात को ध्यान में रखकर अब ट्रेन में यात्रियों को लाइब्रेरी की सुविधा प्रदान की जा रही है। बेहद ख़ुशी की बात है की अब डेक्कन क्वीन और पंचवटी एक्सप्रेस के मासिक सीज़न टिकट कोच में यात्रा करने वाले यात्री अब अलग अलग तरह की कई किताबों को ट्रेन में ही पढ़ सकेंगे और यह सेवा पूर्णतः मुफ़्त प्रदान की जायेगी।

 महाराष्ट्र राज्य सरकार और रेलवे ने मिलकर 'लाइब्रेरी ऑन व्हील्स' दो इंटरसिटी ट्रेनों में जो मनमाड और मुंबई और पुणे और मुंबई के बीच दैनिक यात्रा करते हैं उसमे पुस्तकालय का उद्घाटन 15 अक्टूबर को किया गया उद्घाटन से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर 'पठन दिवस' मनाया गया। साथ ही इस पुस्तकालय के शुरूआती चरण में राज्य सरकार के मराठी भाषा विभाग के मराठी विकास संस्थान के स्वयंसेवक यात्रा की शुरुआत में यात्रियों को किताबें मुहैया कराएंगे और किताबें स्वयंसेवकों द्वारा यात्रा के अंत से पहले पुनः एकत्रित कर ली जाएँगी।

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ऐसे में  ट्रेन में लाइब्रेरी की बात जानकार यात्री बहुत उत्साहित है और उनका कहना है कि " हमें ऐसी उम्मीद नही थी की हम ट्रेन में किताब वही लाइब्रेरी से लेकर पढ़ सकेंगे लेकिन अब यह मुमकिन है जो बहुत ही अच्छा कदम है।"

इस ट्रेन में प्रतिदिन करीब 100 से अधिक यात्री रोज अपना सफ़र तय करते है ऐसे में यात्रियों के कीमती समय का अर्थपूर्ण तरीके से उपयोग करने में लाइब्रेरी की शुरुआत बहुत ही शानदार है। जहाँ सफ़र के दौरान यात्री कुछ नई बातों को सीखेंगे,  समय का सदुपयोग करेंगे और साथ ही उनका सफ़र उनकी हमसफ़र किताब के साथ कब मंजिल तक पहुँच जायेगा पता ही नही चलेगा।

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एक यात्री प्रियंका राणे की माने तो "इन दैनिक ट्रेनों की तीन-चार घंटे की यात्रा में उपन्यास या साहित्यिक पुस्तक पढ़ने के लिए बहुत कम समय मिलेगा। ऐसे में हम यह सोचते हैं कि क्या हम अपने मासिक पास के कारण यात्रा के कई दिनों के लिए सामूहिक रूप से पुस्तकों को प्री-ऑर्डर कर सकते हैं। अगर इसकी अनुमति मिलती है तो यह सबसे अच्छी बात होगी। फिर हम पूरे उपन्यास पढ़ सकते हैं।"

अगर यही शुरुआत देश के हर ट्रेन में हो जाए तो सफ़र चाहे कितना ही लम्बा क्यों ना हो पल भर किताबों के साथ यूँ गुजरने लगेगा की लोग कहेंगे अभी ही तो ट्रेन में बैठे है इतना जल्दी स्टेशन आगया! वाक़ई ट्रेन में लाइब्रेरी का यह प्रयास बहुत ही नया और सार्थक है जिससे हर व्यक्ति को कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलेगा।

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