"गणित का नोबेल पुरस्कार" जीतकर इस शख्स ने एक बार फिर दुनिया को दिखाई भारत की काबिलियत

जब भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई गणितज्ञ अक्षय वेंकटेश ने इस साल के फील्ड मेडल पर अपना कब्ज़ा जमाया तो हिन्दुस्तान के लिए यह एक गौरवशाली पल था। फील्ड मेडल, गणितज्ञों के लिए सर्वोच्च सम्मान है जिसे 'गणितज्ञ के नोबेल पुरस्कार' के नाम से जाना जाता है। 36 वर्षीय वेंकटेश उन चार प्रतिभाशाली व्यक्तियों में शामिल हैं, जिन्हें इस पुरस्कार से नवाज़ा गया है।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो वेंकटेश ने महज 13 साल की उम्र में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय में गणित और भौतिकी में अपनी स्नातक की डिग्री के लिए दाखिला लिया था। महज 20 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली थी। 

कई बार, जब आप गणित की पढ़ाई कर रहे होते हैं, तो आप अटक जाते हैं। लेकिन आपको इसके साथ काम करने पर काफी अच्छा महसूस होता है: आपको उत्थान की भावना महसूस होती है और ऐसा लगता है कि आप वास्तव में कुछ अर्थपूर्ण कर रहे हैं, वेंकटेश ने अपनी सफलता के उपर टिप्पणी करते हुए बताया। 

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि हर चार साल में 40 साल से कम उम्र वाले 4 बेहतरीन गणितज्ञों को इस पुरस्कार के लिए चुना जाता है। प्रत्येक विजेता को 15,000 कैनेडियन डॉलर का नकद पुरस्कार भी मिलता है।

वेंकटेश प्रतिनिधित्व के सिद्धांत (गणित की एक शाखा जो अमूर्त बीजगणितीय संरचनाओं का अध्ययन करता है), एर्गोडिक थ्योरी, और ऑटोमोर्फिक फॉर्म आदि के उपर भी काम कर रहे हैं। साल 2016 में इंफोसिस पुरस्कार जीतने के बाद उन्होंने कहा था कि, "मैं एक संख्या सिद्धांतवादी हूं और मैं पूर्ण संख्या, प्राइम नंबर और इंटीग्रर्स का अध्ययन करता हूं।"

वेंकटेश ने अपनी सफलता से एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीयों की काबिलियत का लोहा मानना ही पड़ेगा।

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