मुंबई पुलिस ने दिया इंसानियत का परिचय ड्यूटी की सीमाओं से आगे बढ़कर की आम आदमी की मदद

दिन हो या रात आपातकालीन स्थिति हो, त्यौहार हो या प्राकृतिक आपदा केवल पुलिस विभाग ही एक ऐसा विभाग है जिससे हर पल चौबीसों घण्टे सुरक्षा की उम्मीद की जाती है और पुलिस भी पूरी ईमानदारी और सतर्कता के साथ अपने कर्तव्य का पालन करती है। ऎसे में अगर बात मुम्बई पुलिस की हो तो हर मुम्बईवाले का सर गर्व से उठ जाता है क्योंकि मुम्बई पुलिस ने कई अवसरों पर अपनी जान की बाज़ी लगाकर मुम्बईकरों को सुरक्षा प्रदान की है। " सदरक्षणाय खलनिग्रहणाय " के अपने विचार को जहन में उतारने वाली दिन रात दौड़ती भागती मुम्बई की शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मुम्बई पुलिस हर सम्भव कोशिश करती रही है आज हम आपको मुम्बई पुलिस के ऎसे ही कर्तव्यनिष्ठा और जांबाजी के तीन किस्सों से रूबरू करवाने जा रहें हैं जहां पुलिस बल जरूरत के समय में अपनी इंसानियत का परिचय देकर आम आदमी की मदद कर मिसाल कायम की है।

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बात बीती रात घाटकोपर की है जब पंतनगर पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर को पुलिस हेल्पलाइन पर आधी रात को एक महिला का फोन आया। महिला ने बताया कि वह प्रेगनेंट है और उसे लेबर पेन शुरू हो गया है और उसकी मदद को आस पास कोई नही है ऐसे में थाने में मौजूद इंस्पेक्टर रेणुका बुवा ने स्थिति को समझते हुए बिना समय गवाएं मोबाइल वैन और कांस्टेबल के साथ महिला द्वारा बताये पते पर पहुँच कर तुरंत उसे रजवाड़ी अस्पताल पहुँचाया जहां महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया।

उसके बाद पुलिस ने इस घटना को साझा करते हुए बताया कि " अब मां और बच्चा बिलकुल ठीक हैं और अच्छी देखभाल में हैं।"

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अब आपको ऐसी ही इंसानियत से सरोकार करवाती मुम्बई पुलिस की एक और घटना से रूबरू करवाते है बात 24 मार्च की है मुम्बई  पुलिस के एक जवान ने समय पर रक्त दान कर एक नागरिक की जीवन रक्षा की। पवई पुलिस स्टेशन में कार्यरत कांस्टेबल गणेश काटे आईआईटी पुलिस स्टेशन पर मौजूद थे की अचानक उसके पास एक अज्ञात व्यक्ति का मदद के लिए आया और उसने बताया कि "मेरी पत्नी को तुरंत रक्त की जरूरत है क्या आप मदद कर सकते हैं? मेरी पत्नी को डॉ. एल.एच हीरानंदानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है हमें उसकी जान बचाने के लिए बी पॉजिटिव खून की आवश्यकता है और रक्त बैंक में कोई खून उपलब्ध नहीं है। "

उस आदमी की स्थिति को देखकर कॉन्स्टेबल गणेश उसकी मदद को तैयार हो गये  इतफ़ाक से गणेश का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था गणेश ने व्यक्ति की जरूरत को समझा और बिना समय गवाएं कॉन्स्टेबल गणेश और वो आदमी हीरानंदानी अस्पताल पहुँचे और डॉक्टर के साथ चर्चा करने के बाद गणेश ने रक्तदान के उस महिला की जान बचाई।

कांस्टेबल गणेश काटे ने बताया कि "मैं तुरंत डॉ. एल.एच. हीरानंदानी अस्पताल गया जहां डॉक्टरों ने मुझे बताया कि रोगी का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव  है और उसे रक्त की तुरन्त जरूरत है। मैं रक्त दान करने के लिए सहमत हो गया। कुछ परीक्षणों के बाद मैंने रक्त दान किया। मैं पिछले सात सालों से पुलिस विभाग में काम कर रहा हूं। लोग उम्मीद करते हैं कि पुलिसकर्मी उनकी मदद करें मैं सिर्फ वही कर रहा था जो उस समय मुझे करना चाहिए था।"


कुछ ऐसा ही वाक्या हुआ 21 मार्च को जब एक यातायात पुलिस कांस्टेबल  विश्वनाथ माहेर अपनी ड्यूटी पर  गोरेगांव ईस्ट में वेस्टर्न एक्सप्रेस राजमार्ग पर ओबेरॉय मॉल के पास जंक्शन में तैनात थे।तभी लगभग 8:45 बजे पर उन्होंने देखा कि एक कार अचानक सिग्नल पर रुक गई और सिग्नल खुलने के बाद भी वही खड़ी है लेकिन ड्राईवर के शरीर में कोई हलचल नही है ऐसे में स्थिति की गम्भीरता को समझते हुए कांस्टेबल विश्वनाथ कार के पास गये और देखा की ड्राईवर अंदर बेसुध पड़ा है उसके बाद उन्होंने लोगो को इकठा कर कार का  दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन ऑटो लॉक होने के कारण वे उसे नही खोल पा रहें थे तब  विश्वनाथ ने ड्राईवर सिट की खिड़की को तोड़कर ड्राईवर को बाहर निकाला और कुछ लोगों की मदद से तुरन्त ही उसे अस्पताल लेकर गये जहाँ डॉक्टर ने उस व्यक्ति की जांच कर बताया कि हाई ब्लडप्रेशर के कारण यह व्यक्ति बेहोश हो गया था।

समय पर मिले इलाज के बाद जब नीरज नामक वह व्यक्ति होश में आया तो सबसे पहले उसने मुम्बई पुलिस के कांस्टेबल विश्वनाथ का शुक्रिया अदा किया और उन्हें कुछ इनाम देना चाह पर विश्वनाथ ने इसे अपना कर्तव्य बताते हुए इनाम लेने से इंकार कर दिया।

इन घटनाओं से पता चलता है कि पुलिस केवल कठोर नही होती बल्कि वो हमेशा नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध होती है। अतः एक आम आदमी होने के नाते हमारा भी कर्तव्य है की हम कानून व्यवस्था का सम्मान करें और नियमों का पालन करें। हमें गर्व होना चाहिए इस बात पर की पुलिस हमारी दोस्त है मददगार है



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