नगर-निगम और ग्रामवासियों के अनोखे सामूहिक प्रयास से पुणे का यह गाँव अब है मच्छरों से प्रकोप से मुक्त

मच्छरों से निपटने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें सभी कई स्वास्थ्य परियोजनाएं चला रहे हैं। लेकिन फिर भी मच्छरों से पूरी तरह निजात पाना सफल नहीं हो पाया है। आंकड़े की माने तो हर वर्ष करीब चार करोड़ लोग मच्छर के काटने से बीमार होते हैं, वहीं सैकड़ों लोग डेंगू, मलेरिया आदि बिमारियों के चपेट में आने से जान भी खो देते। इतना ही नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल इलाज के लिए मलेरिया पर 11 हज़ार 640 करोड़ और डेंगू पर करीब 6 हज़ार करोड़ खर्च किए जाते हैं। कीटनाशकों के छिड़काव से मच्छरों का प्रकोप कम किया जा सकता है लेकिन ख़त्म कभी नहीं।

आज हम आपको एक ऐसे गाँव की कहानी से रूबरू करा रहे हैं जहाँ लोगों के सामूहिक प्रयास से मच्छरों पर विजय प्राप्त कर लिया गया है। जी हाँ, पुणे के इस गांव ने नामुमकिन से लगने वाले काम को मुमकिन बना दिया है। गाँव के लोगों ने नगर निगम अधिकारियों की सहायता से गांव से मच्छरों को पूरी तरह से खात्मा कर दिया है। देश के अन्य गाँव भी अब इसे एक मॉडल की तरह देख रहे हैं।

ydhgu2y7n2fkkpndrupyhhwc68abp8pe.jpeg

सांकेतिक तस्वीर | साभार: डीएनए

गौरतलब है कि एक अनूठे कार्यक्रम के तहत पुणे जिले का स्वास्थ्य विभाग इंदापुर तालुके के अंतर्गत आने वाले संसार गांव को मच्छरों से मुक्त बनाने में सफल रहा है। अब, अधिकारियों का उद्देश्य इस मॉडल को अन्य गाँवों में भी लागू करना है। इस परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में साल 2016 में शुरू किया गया था और इसके अंतर्गत गाँव के हर वर्ग के लोगों को इससे जोड़ा गया। स्कूल में तरह-तरह के जागरूकता अभियान चलाये गए ताकि बच्चे सफाई को लेकर जागरूक हों।

सबसे पहले गाँव के लोगों की सहायता से उन जगहों का पता लगाया जहाँ मच्छरों पनपते थे। फिर 15-15 लोगों की एक टीम बनाई गई जिसे इन जगहों को साफ़ करने का जिम्मा सौंपा गया। वहीं नगर निगम के अधिकारों ने जल निकास को दुरुस्त करने के साथ-साथ पानी निकास की जगहों पर जाल आदि लगवाए। इस वजह से मच्छरों को पनपने के लिए कोई मौका ही नहीं मिला।

परिणामस्वरूप जो नतीजे सामने आए, वह सच में चौकाने वाला था। 100 घरों का सर्वेक्षण करने पर पता लगा कि एक भी मच्छर का लारवा नहीं है। आपकी जानकारी के बताना चाहते हैं कि पहले भी औरंगाबाद और तेलंगाना के मेदक जिले को इन तरीके से मच्छरमुक्त घोषित किया जा चुका है। यह वाकई में मच्छरों से बचने के लिए एक शानदार एक्सपेरिमेंट है।


Share This Article
384