देर रात बस से उतरी महिला जबतक एक सुरक्षित ऑटो में नहीं बैठी, तब तक वहीं रुका रहा यह बस ड्राइवर

आजकल महिलाओं के साथ हो रहे अपराध हर रोज़ अखबारों की सुर्खियां होते हैं तो टीवी चैनल्स की ब्रेकिंग न्यूज़। हर दिन हम महिलाओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न, बलात्कार, छेड़छाड़ और हत्या के बारे में पढ़कर सोचने को मजबूर हो जाते हैं। सबसे शर्म की बात तो यह है की महिला उत्पीड़न के ज्यादातर मामलों में महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है और उनके छोटे कपड़े पहनने, अकेले होने, मोर्डन लाइफ स्टाईल को निशाना बनाया जाता है लेकिन उस समय शायद आरोप लगाने वाले यह भूल जाते हैं कि जो लोग महिलाओं को बुरी नजर से देखते हैं उनकी मानसिकता इतनी विकृत होती है कि उनका कपड़े, शराब या किसी दूसरी चीज से कोई लेना-देना नहीं है। 

हर आदमी बुरा नहीं होता है कुछ ऐसे भी हैं जो महिलाओं का सम्मान करते हैं और उनकी सुरक्षा करना अपना कर्तव्य समझते हैं। हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जो एक बार फिर से मानवता पर हमारा विश्वास कायम करती है। मुम्बई की बात है, समय था रात के 1:30 बजे का, एक महिला बेस्ट की बस से बस स्टॉप पर उतर गई लेकिन रात बहुत हो चुकी थी और महिला अकेली थी उसे डर भी था कि वह आगे कैसे जायेगी। इस बात को समझते हुए बेस्ट बस के चालक ने महिला से एक सवाल पूछा कि क्या कोई उसे लेने आ रहा है जिस पर उस महिला ने जवाब दिया "मैं अकेली हूँ और मुझे कुछ देर यही रूककर ऑटो की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।" उसकी बात को सुनकर बस के चालक-कंडक्टर ने अपना दायित्व समझते हुए वही खड़े रहकर उस महिला को संबल प्रदान किया, वे तब तक बस स्टॉप पर खड़े रहे जब तक कि उस महिला को एक ऑटो नहीं मिला।

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इस घटना को शेयर करते हुए उस महिला ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "यही कारण है कि मैं मुंबई से प्यार करती हूँ मैं 398 लि. के बेस्ट बस चालक को धन्यवाद देना चाहती हूं। जिन्होंने रात के 1:30 बजे मुझे ड्राप करने के बाद मुझसे पूछा कि क्या कोई मुझे लेने के लिए है। जिस पर मैंने जवाब दिया जब तक मुझे ऑटो नहीं मिलता उसके बाद वे वही रुके जब तक मुझे ऑटो नहीं मिला।"

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jqw7vndun7i3cr3lqrrshf8puvjwmasa.jpgवाक़ई इंसानियत आज भी जिन्दा है और किसी ना किसी रूप में हमारे ही भीतर है। अगर इसी तरह हर भारतीय अपने दायित्व को समझने लगे तो इस देश में महिलाओं को रात के अंधेरे से डरने की जरूरत नहीं होगी। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही विकृत मानसिकता को करारा तमाचा होगा। हम सलाम करते हैं उस बेस्ट बस के ड्राइवर और कंडेक्टर को जिन्होंने अपने पेशे के साथ अपना फ़र्ज़ भी बख़ूबी अदा किया।

इस आर्टिकल में इस्तेमाल किए गए सारे फोटोज सांकेतिक हैं। 

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