देश की पहली विशेष महिला रेल की प्रथम महिला लोको पायलट बनी सौमिता रॉय

दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं  नही कर सकती है। घर चलाने से लेकर ट्रेन दौड़ाने तक या हवाई जहाज उड़ाने तक के काम को महिलाओं ने बख़ूबी अंजाम दिया है और बात अगर भारतीय रेलवे की हो तो वहाँ - यहां ट्रेन चलाने से लेकर स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, टिकट चेकर और रिजर्वेशन क्लर्क तक सभी पदों पर महिलाएं काबिज है। भारतीय रेल के कुल 13 लाख कर्मचारियों में 1 लाख महिलाएं शामिल है जो रेलवे का आधारस्तम्भ बनी हुई है। हम आज बात करने जा रहें है भारतीय रेल के सफ़र में जुड़े एक नए अध्याय की रेलवे में कार्यरत सौमिता रॉय को पूर्वी रेलवे (ER) के तहत सियालदाह से रानाघाट तक उपनगरीय ईएमयू स्थानीय का प्रभार दिया गया जिसके चलते वह देश की पहली महिला लोको पायलट बन गई।

भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली महिला के लिए विशेष ट्रेन की सुविधा प्रदान की गयी है। 31601 अप सियालदाह-रानाघाट मातृभूमि ट्रेन को अब विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। ट्रेन के गार्ड सबिता शॉ सहित बोर्ड के सभी सुरक्षाकर्मियों में महिलाओं को शामिल किया गया है। सात महिला कॉन्स्टेबल की टीम के साथ रेलवे सुरक्षा बल उप निरीक्षक शिबानी मजूमदार को प्रभारी नियुक्त किया गया।इस सेवा को शुरू करने से पूर्व रेलवे की सभी महिला चालक दल को 5.52 बजे सियालदाह स्टेशन पर सम्मानित किया गया था। और उसके बाद शुरू हुई रानाघाट स्टेशन तक की 73.4 किमी की यात्रा जो की 7.40 बजे मिनट पर समाप्त हुई। महिलाओं के लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था करना बहुत ही सराहनीय कदम है साथ ही यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी कारगर सिद्ध होगा।

2f28x5tgtr5aglnclqwqcg3pdhjg9bln.jpgफोटो साभार - द टाइम्स ऑफ़ इंडिया 

ट्रेन की शुरुआत से उत्साहित वरिष्ठ ईआर अधिकारी का कहना है की "यह दिखाता है कि हमारे देश की महिलाएं कुछ भी कर सकने में सक्षम है और वह कर सकती हैं।"
इस महिला ट्रेन में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी लोको पायलट के कंधों पर है क्योंकि सबसे पहले तो वह अपने केबिन में अकेला होता है और ये ट्रेनें बहुत तेज रफ़्तार से चलती है जिसे नियंत्रित करना बहुत ही आवश्यक है और लोको पायलट को ओवरहेटिंग सिग्नल या प्लेटफॉर्म पर रोकने के लिए सही समय और ब्रेक लगाने के लिए हर दम सतर्क रहना पड़ता है। साथ ही उपनगरीय ट्रेनें बेहद घिरे और आवाजाही वाले क्षेत्रों से गुजरती हैं ऐसे में लोको पायलटों को पटरियों को पार करने वाले लोगों या वाहनों पर भी नजर रखना होती है। इस सब बातों को ध्यान में रखते हुए सौमिता को 20 सितंबर, 2018 को लोको पायलट के पद पर पदोन्नत किया गया था क्योंकि उनके द्वारा लोको पायलट के रूप में काम करने के लिए योग्यता और उपयुक्तता परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। रेलवे प्रशासन उनके कार्य की सराहना करते हुए यह कहता है कि " सौमिता अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है जो इस पेशे में शामिल होना चाहती है। 

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रेलवे के इस प्रयास को देखकर अब लगने लगा है की बदलाव की हवा अब तेज रफ़्तार से बहने लगी है। महिलाओं को इस तरह जिम्मेदारी प्रदान करने से समाज की रूढ़िवादी सोच को एक सबक मिलेगा और साथ ही हमारे देश की बेटियां अब हवाई जहाज उड़ाने के सपने के साथ ही ट्रेन दौड़ने के सपने भी देखने लगेंगी और उन्हें साकार भी करेंगी।



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