26 वर्षीय यह युवा उद्यमी अपने अनूठे आइडिया से बचा चुके हैं अबतक हजारों लोगों की जान

आम तौर पर, जब आप बीस की उम्र के आस-पास पहुँचते हो तो जिंदगी के मायने समझ में आने शुरू हो जाते हैं। यह वह उम्र होती है जब जोश और उर्जा से लबरेज व्यक्ति कुछ कर गुजरने की तमन्ना रखता है। लेकिन वहीं कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत की मदद से बुधिमत्ता के साथ आगे बढ़ते हैं और कुछ ऐसे कारनामे कर जाते जिससे कि हर जुवान पर उनकी चर्चा होती।

26 वर्षीय कुणाल साराफ एक ऐसे ही प्रतिभाशाली युवा उद्यमी हैं जिन्होंने बेहद कम उम्र में ही उद्यमी बनने का सपना देखा। आज उन्हें सैकड़ों जीवन को बचाने का श्रेय इसलिए जाता है क्योंकि उन्हें अपने आइडिया पर भरोसा था और उन्होंने इसे पूरा करने का सपना हमेशा बरक़रार रखा। वह 'द सेवियर्स' नामक एक गैर-सरकारी संगठन के संस्थापक हैं, जिसने रक्त दाताओं का एक नेटवर्क बनाया है और कई अन्य मानवीय परियोजनाएं पर काम कर रहे हैं।

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केनफ़ोलिओज़ के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि "कॉलेज खत्म करने के बाद मैं अपने गृह नगर कोलकाता वापस आया था। एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे दादा जी को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत थी और हमें उनकी खून की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कहाँ-कहाँ नहीं भटकना पड़ा। यह बेहद मुश्किल भरा था"।

इसी पल उन्हें अहसास हुआ कि रक्त की व्यवस्था एक व्यापक संघर्ष है और यह रोगियों के मित्रों और परिवार के सदस्यों को बहुत तनाव देता है। तभी उन्होंने यह सोचना शुरू कर दिया कि क्या ऐसा कोई उपाय हो सकता है जिससे कि इस समस्या से छुटकारा मिल सके। इसी विचार के साथ कॉलेज खत्म करने के एक महीने के भीतर, उन्होंने अगस्त 2014 में 'द सेवियर्स' की स्थापना की। यह निश्चित रूप से कोई आसान काम नहीं था, लेकिन शुरुआत में उन्होंने खुद 100 से ज्यादा दाताओं को इस मुहिम से जोड़ने में सफल रहे। शुरूआती सफलता के बाद उन्होंने प्रण किया कि वह अपनी इस गतिविधि को बड़े स्तर पर स्केल करेंगे।

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"जब आप दूसरों की मदद करते हैं तो ब्रह्मांड आपकी मदद करने के लिए तैयार रहता है।" -  कुणाल साराफ की लिखी एक पुस्तक "कैसे एक आईफोन ने मुझे सबसे युवा अरबपति बनाया" का एक वाक्य।

कुणाल ने इंटर्नशिप मॉडल तैयार किया जो छात्रों को प्रमाण पत्र के लिए आकर्षित करता था। हालांकि, उनके काम के कारण होने वाले प्रभाव ने छात्रों को इंटर्नशिप के बाद भी सहयोग जारी रखने के लिए प्रेरित किया। आज, सेवियर्स 3000+ दाताओं के डेटाबेस के साथ 3000+ स्वयंसेवकों की एक टीम के रूप में विस्तार कर चुका है और अबतक 1,000 से अधिक लोगों को प्रभावी ढंग से बचाया है। कोलकाता से शुरू हुई यह संस्था, अब दिल्ली, मुंबई, पुणे और बैंगलोर में भी अपनी इकाइयां खोल चुकी है।

कुणाल कहते हैं कि "रक्त दाताओं के साथ काम करने के अलावा, सेवियर्स अनाथ बच्चों के साथ कार्यशाला भी करता है, बुजुर्गों के साथ समय बिताता है, गरीब और बेघर लोगों को भोजन भी मुहैया कराता। मेरा काम मुझे इतनी संतुष्टि देता है कि इसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। वो चाहते हैं कि देश के सभी शहरों में सेवियर्स की टीम हो जो रक्त दाताओं और प्राप्तकर्ताओं के बीच की दूरियों को खत्म करेगा।

मानवता के प्रति हमारी धारणा को मजबूती प्रदान करने के लिए हम टीम सेवियर्स को शुभकामनाएं देते हैं। आप भी अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।

#KuunalSaraff 

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