आपकी गोपनीयता की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले इस 91 वर्षीय शख्स ने किया था आधार के खिलाफ़ याचिका

हाल ही माननीय उच्च न्यायालय ने आधार के खिलाफ़ दायर याचिकाओं पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। आधार की संवैधानिकता पर काफी लम्बे समय से चली आ रही बहस पर पूर्णतया विराम लग ही गया। कोर्ट ने जहाँ आधार की संवैधानिकता को वैध ठहराया, वहीं बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले आदि में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे जो शख्स छिपे हैं आज हम उनसे ही आपको रूबरू कराने जा रहे हैं। साल 2012 में कर्नाटक के बंगलुरु से ताल्लुक रखने वाले रिटायर्ड जस्टिस के. एस पुट्टस्वामी ने पाया कि तत्कालीन सरकार द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने सरकार के इस फैसले के खिलाफ़ याचिका दायर की।

8hcpsyuqyweqrhmdzu5fhcftvcyznafm.jpg

फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस 

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि " मेरे कुछ दोस्तों के साथ चर्चा के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि आधार योजना संसद में चर्चा के बिना लागू की जा रही है। एक पूर्व न्यायाधीश के रूप में, मुझे लगा कि यह सही नहीं थी। फिर मैंने याचिका दायर करने का फैसला किया।"

साल 1926 में बेंगलुरू के पास स्थित एक गांव में पैदा हुए, पुट्टस्वामी पुराने मैसूर के उच्च न्यायालय में एक वकील थे और बाद में एक वरिष्ठ सरकारी वकील बने। 1 980 के दशक में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने और वे आंध्र प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का हिस्सा भी थे।

हालाँकि उनके द्वारा दायर याचिका पर फैसला आने में छह साल लग गये लेकिन उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ‘सही और फायदेमंद’ है। 

आधार की गोपनीयता पर पहले ही कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। इन सब को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कोई भी मोबाइल और निजी कंपनियां आधार नहीं मांग सकती हैं। साथ ही अब UGC, NEET तथा CBSE परीक्षाओं के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा। साथ ही, अब बैंक खातों से आधार को लिंक करना भी जरूरी नहीं है। हालाँकि, आधार को पैन से लिंक करना जरूरी होगा। सुरक्षा मामलों में एजेंसियां भी आधार की मांग कर सकती है। साथ ही सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य बनाया गया है।

pws9amgmd2de2yt5gguumfru8cvuiyk5.jpg

फोटो साभार: रेडिफ

आपको बता दें कि न्यायाधीश के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायलय ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था। और उसी का नतीजा है कि आज एक फिर न्यायालय आधार को लेकर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

 


Share This Article
1393