एक शानदार करियर को अलविदा कह यह महिला अब बदल रही हैं सैकड़ों लोगों की जिन्दगी

जीवन के गणित के काम करने के अपने अद्भुत तरीके हैं। यह हमेशा तार्किक प्रतीत नहीं होता है लेकिन जब आप एक कदम पीछे मुड़कर देखते हैं तब पूरी तस्वीर समझ में आती है। हमारी आज की कहानी एक ऐसे व्यक्ति पर है जो ख़ामोशी से समाज के उन वर्गों की जिन्दगी में रोशनी ला रही हैं जो संसाधनों की कमी की बोझ के तले दबकर जीवन जीने को मजबूर हैं।

54 वर्षीया निवेदिता देसाई को जिन्दगी ने सबकुछ दिया। एक प्यारा बचपन से लेकर अच्छी शिक्षा, एक पोषण वातावरण और दिलचस्प नौकरी। लेकिन उन्होंने पाया कि उनके आस-पास के हर किसी को ऐसे अवसर नहीं मिल पाते हैं। 49 साल की उम्र में, दो दशकों के अनुभव और शानदार उपलब्धियों के बावजूद निवेदिता ने अपने करियर को अलविदा कह दिया और एक गैर-सरकारी संगठन की आधारशिला रखते हुए समाज के वंचित वर्गों के लिए कुछ करने की योजना बनाई। 

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केनफ़ोलिओज़ के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि "हमारा परिवार हमेशा समाज के लिए कुछ करने की इच्छा रखता था, लेकिन पूर्णकालिक गतिविधि के रूप में ऐसा करने का विचार मेरे पति के मन में आया। फिर हमने पैसे इकट्ठे कर एनीमेड चैरिटेबल ट्रस्ट (एक्ट) के बैनर तले साल 2013 में संचालन शुरू किया।

किसी समस्या का हल ढूंढने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उस समस्या से पीड़ित लोगों से पूछना। उनकी टीम स्लम इलाकों में रहने वाली महिलाओं से जाकर पूछती है कि उनका जीवन कैसे बेहतर हो सकता है और अक्सर उनके सुझाव ही सबसे अच्छे काम करते हैं। निवेदिता कहती हैं कि, "अनको जो सूट करता है हम वैसी ट्रेनिंग करवाते हैं।" उनका संगठन महिलाओं को सिलाई ट्रेनिंग, सौंदर्य पार्लर पाठ्यक्रम, अंग्रेजी ट्यूशन जैसी कई प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान करता है।

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यह संगठन 150 से अधिक स्वयंसेवकों की मदद से मुंबई, दादरा और नगर हवेली, गुजरात में 2,500 से अधिक बच्चों और 1,500 महिलाओं पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।

मुफ्त शिक्षा योजनाओं के बावजूद कम आय वाले परिवारों की लड़कियों के लिए दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ना आम बात है। ऐसे समस्याओं से निबटना और भी अधिक जटिल होता है। इस समस्या को ख़त्म करने के लिए आर्गेनाईजेशन अन्य गैर-सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर लोगों को परामर्श और संबद्ध सेवाएं प्रदान करता है।

"अक्सर हम हाशिए पर खड़े समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम करते हैं, लेकिन असल में ऐसी कई अन्य समस्याएं हैं जो उन्हें वापस उस स्थिति में पहुंचा देती है।"

श्रद्धा नाम की एक छात्रा खेल में काफी अच्छी थी और इसमें एक करियर बनाना चाहती थी। हालांकि, उसकी महत्वाकांक्षाओं को तब झटका लगा, जब उसकी माँ ने पढ़ाई में उसके ख़राब प्रदर्शन की वजह से खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी। बच्चे और उनके सपने के बीच कुछ भी नहीं आना चाहिए और इसलिए यह ट्रस्ट ऐसे छात्रों को हरसंभव सहायता प्रदान करता है। ट्रस्ट न केवल श्रद्धा के पढ़ाई के परिणामों को बेहतर बनाने में मदद किया बल्कि उसे बास्केटबॉल कोर्ट के करीब भी लाया।

निवेदिता कहती हैं कि "हम स्मार्ट कार्य में विश्वास रखते हैं और हमने उपयुक्त सहायता प्रदान कर अबतक वाकई में कई लोगों की जिन्दगी में बदलाव लाने का काम किया है।"

साल 2017 में, ट्रस्ट ने दादरा और नगर हवेली के आदिवासी समुदाय के लिए एक और दिलचस्प परियोजना की शुरुआत की। यहां अधिकांश माता-पिता श्रमिकों के रूप में काम करते थे और उनके पास बच्चों को पढ़ाने की क्षमता नहीं थी। बच्चों के बीच आराम और पर्याप्तता बढ़ाने के लिए, अधिनियम ने उसी समुदाय से शिक्षकों को काम पर रखा और छात्रों को उनके पाठों में मदद की पेशकश की। यह अनूठा कार्यक्रम एक बड़ी सफलता थी और लगभग 350 छात्रों को इससे फायदा हुआ।

अधिनियम का मानना है कि सशक्त महिलाएं व्यापक प्रभाव की रीढ़ की हड्डी हो सकती हैं और समाज में बदलाव ला सकती हैं।

यह केवल निवेदिता के नेतृत्व और उनकी टीम की कड़ी मेहनत और कई स्वयंसेवकों से असंगत समर्थन का नतीजा ही है कि आज हजारों लोगों को लाभान्वित किया गया है। यह वाकई में गर्व की बात है कि आज भी हमारे समाज में निवेदिता जैसे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन को किसी ऐसे व्यक्ति के सपनों की रक्षा और पोषण के लिए समर्पित किया है जिसे वे पहले जानते भी नहीं थे।

अधिनियम के साथ कार्य करने के सैकड़ों तरीके हैं। आप इस मुहिम के लिए दान भी कर सकते हैं।

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