घर-घर गैस सिलिंडर की डिलीवरी करने वाले यह शख्स अब खेलेंगे नेशनल एथलेटिक्स, पढ़ें इनके सफलता की कहानी

हिंदी में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का एक कथन है "मानव जब जोड़ लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है"। अर्थात् जब मनुष्य अपने लक्ष्य के प्रति तन-मन-धन से समर्पित रहे तो एक न एक दिन सफलता अवश्य उसे मिलती है। उत्तरप्रदेश के रितेश कुमार इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। घर-घर गैस सिलिंडर की डिलीवरी करने वाले रितेश आज सीनियर नेशनल ऐथलेटिक्स प्रतियोगिता में प्रतिभागी के रूप में चुने गये हैं और यहाँ तक पहुँचने का उनका सफ़र बेहद प्रेरणादायक है।

उत्तर प्रदेश स्थित कासन गांव के एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले रितेश भाई-बहनों में सबसे बड़े होने की वजह से परिवार का जिम्मा अपने कंधे उठाने के लिए बाध्य हो गये। शुरु से ही नेशनल खेलना का उनका सपना था लेकिन परिस्थितियों के तले दबकर उन्हें अपने सपनों का त्याग करना पड़ा। गुरुग्राम स्थित एक गैस एजेंसी में उन्होंने सिलिंडर उठाने और डिलीवरी का काम शुरू कर दिया। इससे उन्हें तनख्वाह के रूप में नौ हज़ार रूपये की मामूली रकम मिलती थी।

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फोटो साभार: नवभारत टाइम्स

गुरुग्राम जैसे शहर में इतने कम पैसे में गुजारा करना कितना चुनौतीपूर्ण होगा, यह आप भी समझ सकते हैं। तनख्वाह के ज्यादा-से-ज्यादा पैसे घर भेजने के उद्देश्य से उन्होंने अपने रिश्तेदारों के साथ रूम शेयर करके रहना शुरू किया। घर पर उनकी माँ और भाई-बहन हैं। माँ खेती करके परिवार का गुजारा करती हैं। रितेश ज्यादा-से-ज्यादा पैसे घर भेजने के बाद बची राशि से किसी तरह अपना गुजारा करते हैं।

परिस्थितियों ने उनके नेशनल खेलने के सपने को पूरा करने में बाधा तो उत्पन्न की लेकिन रितेश की दृढ़-इच्छाशक्ति के आगे उसे नतमस्तक होना ही पड़ा। उन्होंने तय किया कि वे अपनी दिनचर्या से समय निकाल कर प्रतिदिन अभ्यास करेंगें। रोज सुबह 8 बजे से शाम साढ़े 3 बजे तक वह लोगों के घर-घर जाकर सिलिंडर पहुंचाते हैं और शाम साढ़े 4 से 7 बजे तक सेक्टर-38 स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में जमकर पसीना बहाते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर | साभार: इंडियन एक्सप्रेस

रितेश की प्रतिभा को साथ मिला उनके कोच रामनिवास का। रामनिवास ने उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की है। उन्होंने रितेश का कॉलेज में दाखिला भी करवाया है। कोच को यकीन है कि रितेश इंटरनेशनल में भी अपनी दावेदारी पक्की करेंगे और देश के लिए मेडल भी जीतकर लौटेंगे।

रितेश की मेहनत का नतीज़ा ही है कि उन्हें 25 से 27 सितंबर तक उड़ीसा के भुवनेश्वर में सीनियर नैशनल ऐथलेटिक्स प्रतियोगिता में 5 किमी रन के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने इस दौर को महज 16 मिनट में पूरा कर नेशनल में स्थान बनाई है। रितेश ने साबित कर दिया है कि परिस्थितियों कितनी भी आपके खिलाफ क्यों न हो, अगर आप अडिग रहकर लक्ष्य का पीछा नहीं छोड़ते तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। 

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