17 साल की यह लड़की हिजाब पहनकर कश्मीर की सर्द वादियों में दिखा रही है अपने बल्ले का जादू

आज की तारीख में हमारे समाज के रूढ़िवादी तबक़े के आगे एक बात तो साबित हो गयी है की चाहे दंगल का अखाड़ा हो या कुश्ती की रिंग चाहे बॉक्सिंग की दुनिया हो या रेस का मैदान फुटबॉल ग्राउंड हो या हॉकी के गोल  इन्हें कतई नही पता होता की उसमें कोई लड़का खेल रहा है या लड़की वो तो बस क़ाबिलियत के मुरीद होते हैं। आज क्रिकेट के मैदान पर हमारी छोरियों के बैट और बल्ले का जादू कुछ कम नही है। लेकिन अगर हम आपको बताये की कश्मीर की सर्द वादियों में भी अब लड़कियों के हाथों में क्रिकेट का बल्ला दिखाई देगा तो एक बारगी तो आप हैरत में पड़ जायेंगे क्योंकि कश्मीर की जो छवि हमारे मन में बनी हुई है उसमें क्रिकेट के लिए जगह न के बराबर है और फीमेल क्रिकेट के लिए तो कतई नहीं लेकिन इस सोच को तोडा है कश्मीर के सोपोर के दांगीवाचा क्षेत्र की रहने वाली इकरा रसूल ने जो कश्मीर की वादियों में जमकर क्रिकेट की प्रैक्टिस करती है।

सच ही है हुनर का कोई धर्म नहीं होता। 'इकरा रसूल' की उम्र तो महज़ 17 साल है लेकिन जब उनका हुनर बोलता है तो लोग दांतों तले उंगलियों दबा लेते है।

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इकरा लड़कों के साथ हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलती हैं और क्रिकेट में उन्हें बल्लेबाजी के साथ ही गेंदबाजी में भी महारत हासिल है तभी तो अपनी बेटी के हुनर को देखते हुए इकरा के परिवार वाले चाहते हैं कि आने वाले समय में उनकी बेटी देश के लिए क्रिकेट खेलें और विश्व में भारत का नाम रोशन करें। लेकिन शुरुआत में ऐसा नही था इकरा का परिवार नही चाहता था की वे क्रिकेट खेले लेकिन इकरा के जुनून के आगे उन्हें हार माननी पड़ी और आज इकरा के पिता गर्व से कहते है कि "मेरी बेटी ब्वॉयज टीम में खेलकर मेडल्स जीत रही हैं। बस अब तलाश है तो एक अच्छे मौके की जहां वह देश का नाम रोशन करें।"

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शुरुआत में गली क्रिकेट खेलने वाली इकरा को कोई देख ना ले इस कारण बल्ला छुपाकर ले जाना पड़ता है और सब से बचकर प्रैक्टिस करनी पड़ती थी लेकिन धीरे धीरे इकरा की क़ाबिलियत ने सबका दिल जीत लिया  और सभी ने उनका समर्थन किया बस फिर क्या था शुरुआत में लोकल लीग्स से खेलना शुरू किया और आज पूरे देश में होने वाले टूर्नामेंट्स में खेलती हैं। उनकी काबिलियत के दम पर इकरा को जम्मू कश्मीर की स्टेट टीम में चार बार जगह मिल चुकी है। 

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इकरा बताती है कि "क्रिकेट सिर्फ मेरा शौक नही मेरा जुनून है और विराट कोहली मेरे इंस्पिरेशन।" दांगीवाचा की यह स्टार क्रिकेटर अब तक विराट कोहली को 4 लैटर लिख चुकी है लेकिन उनके लैटर विराट तक पहुँचे नही है और उम्मीद है की एक दिन विराट उन्हें मिलकर शाबाशी जरूर देंगे।

इकरा ने जो उदाहरण पेश किया है वो हर लड़की के लिए प्रेरणादायक है जो अपने सपनों की उड़ान पर उड़ना चाहती है।

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