35 दिन में 780 शौचालय निर्माण करवाकर राजस्थान के स्वच्छाग्रही ने बनाया अपने गाँव को खुले में शौच मुक्त

स्वच्छ भारत का नारा सिर्फ नारा नही बल्कि एक मिशन है जिससे जुड़ा है भारत का हर एक व्यक्ति क्योंकि यह देश हमारा है और इसे स्वच्छ रखना हमारा दायित्व है।
अगर भारत स्वच्छ होगा तभी तो स्वस्थ होगा और विकास के पथ पर दोगुनी गति के साथ आगे बढ़ेगा। स्वच्छता  मिशन को लेकर देश की जनता कितनी जागरूक है इस बात का ताजा उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला  राजस्थान में जहाँ स्वच्छ भारत मिशन के तहत बांसवाड़ा जिले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त हुआ है।

स्वच्छता अभियान में अपना सक्रिय योगदान दे रहें देशभर के 10 स्वच्छाग्रहियों के सम्मान के तहत राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के घाटोल पंचायत समिति के  छोटे से गांव सवानिया के रहने वाले मणिलाल राणा को बिहार राज्य के पूर्वी चम्पारण में मंगलवार को ‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह अभियान’ के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों सम्मानित किया गया।

मणिलाल जब कभी देश के अलग अलग राज्यों में जाते तो वहाँ वे एक ही बात पर गौर करते की स्वच्छता का पैमाना क्या है उन्होंने देखा की अब ज्यादातर गांव खुले में शौच से मुक्त है। उसके बाद उन्होंने सोचा की उनके छोटे से गाँव में जहाँ आज भी लोग सुबह सुबह लोटा लेकर खुले में शौच के लिए निकल पड़ते है उन्हें कैसे रोका जाए उनके घरों में शौचालयों का निर्माण किस तरह करवाया  जाएं  मणिलाल केवल एक बात जानते थे की अगर समस्या है तो समाधान भी होगा। गांव वालों को शौचालय निर्माण के लिए जागरूक करना समझाना उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी साथ ही मणिलाल को खुद पर विश्वास भी था । इसी विश्वास के साथ उन्होंने अपने कदम आगे बढाये।

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मणिलाल बताते है कि " अपने काम की शुरुआत के लिए मैंने सबसे पहले उन लोगों से बातचीत की जिनके घरों में शौचालय बने हुए थे और वे उनका उपयोग करते थे। मैंने उन्हें बताया की हमें भी अपने अपने गाँव को खुले में शौच मुक्त बनाना है। इसके लिए मैंने युवाओं से भी इस मुहीम में जुड़ने की अपील की।" मणिलाल  ने जब अभियान शुरू किया तो उस समय उनके गांव में शौचालय की संख्या 280 थी और उनका लक्ष्य था गांव में 700 शौचालयों का निर्माण करना। गाँव में सबसे बड़ी समस्या यह आ रही थी की गाँव के लोग इस बात को कुबूल नही कर पा रहें थे की उनके जिस घर में रसोई है वहाँ शौचालय हो।ऐसे में लोगो की मानसिकता को  बदलना बहुत बड़ी चुनौती थी। मणिलाल ने प्रसाशन और कुछ ग्रामीणों के सहयोग से जन अभियान चलाकर लोगो को जागरूक किया उन्होंने गावों में नुक्कड़ नाटक, सभाओं में खुले में शौच से होने वाली हानियों आदि माध्यमों से जागरूक किया।

धीरे -  धीरे लोग मणिलाल की बातों से सहमत होने लगे उसके बाद  एक-एक घर शौचालय बनाने के लिए तैयार हो गया। फिर शुरू हुआ युद्धस्तर पर 35 दिनों में सवानािया गांव में 780 शौचालयों का निर्माण कार्य  और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की स्थिति प्राप्त करने का। मणिलाल राणा के  प्रयासों से आज उनका गांव को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है।

वाक़ई मणिलाल जैसे स्वयंसेवकों के प्रयास से ही स्वच्छ भारत मिशन पूरा होगा।

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