एयर इंडिया के पायलट ने अपनी सूझबूझ से बचाई 370 यात्रियों की जान, नहीं तो हो सकता था एक बड़ा हादसा

फानूश बनकर जिसकी हिफ़ाजत हवा करे, वो शमा क्या बुझे जिसे रोशन ख़ुदा करे। 

कहते है जिसके सर पर ईश्वर का हाथ हो उसका कोई बाल भी बांका नही कर सकता अपने बन्दों को बचाने ऊपरवाला कोई न कोई रोप धर कर आ ही जाता है। सावधानी सजगता और त्वरित निर्णय क्षमता के बल पर बड़ी से बड़ी अनहोनी को भी समय रहते टाला जा सकता है। हम मानते है की अनहोनी बोलकर नही आती पर किसी हादसे का अंदेशा होने पर ही  सचेत हो जाया जाए तो संकट को दूर करने की प्रकिया कुछ सरल हो जाती है और साथ ही हम मानसिक रूप से सक्षम हो जाते है की आखिरकार हमें क्या कदम उठाना है। कुछ इसी तरह की सूझबूझ और सजगता का शानदार उदाहरण देखने को मिला 11 सितम्बर को जब एयर इंडिया के पायलट की समझदारी ने 370 यात्रियों की जिंदगी बचा दी।

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हुआ कुछ इस तरह की जब नई दिल्ली से न्यूयॉर्क के लिए अपने सफ़र पर एयर इंडिया फ्लाइट नंबर 101 ने 370 यात्रियों के साथ उड़ान भरी तो किसी को नही पता था की कौनसा हादसा उनका इंतजार कर रहा है। एयर इंडिया बोइंग 777 - 300 ने नई दिल्ली से 370  लोगों को ले जाने के लिए जैसे ही उड़ान भरी और अपने सफ़र पर निकली तो कुछ समय बाद ही न्यू जर्सी के हवाई अड्डे पर लैंडिंग करने से पहले मौसम ने अचानक करवट ले ली  ख़राब मौसम के चलते फ्लाइट को एकदम से लैंड करना सम्भव नही था मुसीबत यही नही रुकी कुछ ही समय में फ्लाइट में कम ईंधन की समस्या भी खड़ी हो गयी  और तो और कई सिस्टम भी जवाब देने लगे। उधर लैंडिंग में देरी होने से यात्रियों को भी अंदेशा होने लगा की बहार कुछ गड़बड़ है तो फ्लाइट में सफ़र कर रहें सभी 370 यात्रियों की जिंदगी हवा में झूलने लगी। ऐसे में फ्लाइट के पायलट ने संयम और सूझबूझ का परिचय देते हुए ढ़ाई घण्टे फ्लाइट को आसमान और खराब मौसम के बीच संभाले रखा। उन्होंने जे.एफ.के. हवाई अड्डे के वायु यातायात नियंत्रकों से समन्वय स्थापित करते हुए लैंडिंग की सही स्थितियों का जायजा लिया और जब तक लैंडिग की स्थिति स्पष्ट नही हुई तब तक हवा में ही फ़्लाइट को संभाले रखा।

पायलटों और नियंत्रक में 18 मिनट तक सम्पर्क प्रक्रिया जारी रही उसके बाद एयर इंडिया के फ़्लाइट कमांडर रुस्तम वालिया ने न्यूयॉर्क के हवाई अड्डे से स्वीकृति मिलने के बाद फ़्लाइट की लैंडिंग की जिससे की कोई बड़ा हादसा होने से टल गया और 370 यात्रियों की जान में जान आई।

सच में यह पायलट की ही सूझबूझ थी कि ढ़ाई घण्टे तक संयम के साथ फ़्लाइट को नियंत्रित किया और अपने धैर्य का परिचय दिया।

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