तीन अनाथ बच्चों के संरक्षक बने डीएम ने ली उनके भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी

कौन कहता है कि कलयुग आ गया है हमने देखा है इंसानियत को बाजी मारते हुए । नौकरशाही जब ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करती है तो परिवर्तन का नया दौर शुरू होता है। केन्फ़ोलिओज़ समय समय पर ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठ अधिकारीयों की प्रेरणादायक कहानियों से आपको रूबरू करवाता है क्योंकि हमारा मानना है की परिवर्तन के यह नायक ही भारत की नयी कहानी लिखते है। हमारी आज की कहानी भी एक ऎसे ही आईएएस अधिकारी की है जिन्होंने अपने काम से जनता के विश्वास को जीतकर अपनी पहचान बनाई है उनका लक्ष्य केवल एक है समाज को नयी और सकारत्मक दिशा प्रदान करना।

हम बात कर रहें हैं उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार पाठक की। डॉ.अनिल कुमार की पहचान उनकी इंसानियत है। कुछ समय पहले डॉ. पाठक ने मानवीयता का अद्भुत उदाहरण देते हुए अपने दफ्तर में आई एक लावारिस बुजुर्ग महिला की मदद करते हुए उनका इलाज करवाया और उन्हें अपनी माँ का दर्जा देते हुए वो हर कर्तव्य निभाया जो एक बेटा निभाता है यहाँ तक की उन्होंने उस बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उनके बेटे का दायित्व निभाते हुए विधिपूर्वक उनका अंतिम संस्कार भी किया। इस घटना से ही एहसास होता है की डॉ पाठक का व्यक्तित्व कैसा होगा उन्हें इंसानियत की मूरत कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। कुछ इसी तरह मानवता की एक और मिसाल डॉ पाठक ने फिर पेश की है बात बीते शनिवार की है जब डीएम पाठक ने असहाय नाबालिग बच्चों के संरक्षक का दायित्व सम्भालते हुए उनके लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि का बैंक में खाता खुलवाया।

6ysybjpuqcuflnjctq7ty5zjztnp7rnc.jpg

पूरी घटना कुछ इस तरह है की महाराजगंज इलाके के रामपुर मया गांव के रहने वाले किसान महेन्द्र कुमार की साल 2016 में तालाब में डूबने से मौत हो गई थी लेकिन कहते है ना बुरा समय बोल कर रही आता कुछ ऐसा ही हुआ उनकी किसान बीमा की फाइल जब तक फाइनल होती तब तक दुर्भाग्यवश उनकी पत्नी गायत्री देवी की सड़क हादसे में मौत हो गई। ऐसे में उनके तीन बच्चे शिवा, शुभम और लक्ष्मी के सर से माँ बाप का साया छिन गया। तीनों बच्चे इतने बड़े नही थे की इस हादसे को समझ सकें उन्हें तो बस इतना पता था की उनके माँ बाबा उन्हें छोड़कर कर चले गये है और अब कभी वापस नही लौटेंगे। ऐसे में उनकी अँधेरी जिंदगी में डीएम पाठक उम्मीद की किरण बनकर आये।

qhwp7vkatvi4le3ymzmxqrzqaj5eh7kp.jpgबच्चो के साथ डीएम पाठक 

फोटो - नवभारत टाइम्स

डीएम पाठक इस बारे में बात करते हुए बताते है कि " मृतक किसान महेन्द्र की किसान बीमा की धन राशि 5 लाख रुपये स्वीकृत हो कर अब आ गई है जो की बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के काम आएगी।"

तीनों बच्चे अभी नाबालिक है ऐसे में डीएम पाठक  ने उनकी जिम्मेदारी अपनी कंधो पर लेते हुए बच्चों के संरक्षक बन कर तीनों बच्चों के नाम पर ग्रामीण बैंक में खाता खुलवाने का आदेश पटल सहायक के.के. श्रीवास्तव को दिया है। साथ ही बैंक को भी खाता खोलने के लिए निर्देश जारी कर दिया है। डीएम के संरक्षक बनने से अब उम्मीद है कि इन बिन मां-बाप के बच्चों का धन कोई हड़प नहीं पाएगा और इस धन का उपयोंग उनकी शिक्षा में होगा जिससे की आगे चलकर वे सक्षम बने और अपने सपनों की उड़ान उड़ सकें।

सच में डीएम डॉ अनिल पाठक ने साबित कर दिया की अगर नौकरशाही चाहे हो देश की तस्वीर बदल सकती है।



Share This Article
478