IAS ऑफिसर के साथ मिलकर दो युवा छात्र अपनी मुहिम से जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचा रहे हैं आमजन तक

आम-जन की सुविधाओं के लिए कई योजनाएं बनती हैं लागू भी होती हैं लेकिन अक्सर सुनने में आता है कि कई जनहितकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक नहीं पहुँच पा रहा है। ऐसा क्यों होता है इस बात को जानना बेहद जरूरी है क्योंकि यह हमारे देश के विकास से जुड़ा मुद्दा है। इस बात को समझने की कोशिश की एक टीम ने और बीड़ा उठाया आम-जन तक उनके हक की योजनाओं को पहुँचाने का। हम बात कर रहे हैं दो टीआईएसएस (TISS) छात्रों के साथ एक सहायक कलेक्टर की अगुआई वाली एक छोटी सी लेकिन प्रभावी टीम की जो, जुन्नार तालुका क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही 750 योजनाओं को डीकोड करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। गरीबी में जीवनयापन कर रहे लोगों को राहत पहुँचाना इनका मुख्य उद्देश्य है।

गाँव के पास ही के जुनेर शहर में कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान चलाने वाले रंजन घोडकर भी जनहितकारी सेना का हिस्सा है जो जुन्नार और अम्बेगांव के दूरस्थ हिस्सों में रहने वाले वंचित किसानों को सशक्त बनाने के लिए अथक रूप से काम कर रहे है। रंजन युवाओं को एमएस-सीआईटी में प्रशिक्षण तो प्रदान करते ही है साथ ही वे आईटी साक्षरता पाठ्यक्रम से भी लोगों को जोड़ रहें है। अपनी इस योजना को उन्होंने पहल नाम दिया है यह पहल नाम जिस दिमाग की देन है वे है क्षेत्र के सहायक कलेक्टर आयुष प्रसाद जो इस मुहीम में सक्रिय रूप से जुड़े हुए है।

उनका मानना है कि "हमारी पहल के माध्यम से, हम यह सुनिश्चित करने में सक्षम हैं कि हर परिवार को कम से कम एक राज्य प्रायोजित योजना का लाभ प्राप्त हो जिससे की उनका जीवनस्तर सुधर सकें। योजनाएं  जिन लोगों का जीवनस्तर सुधार  सकता है उनकी सूचि बनाने का काम टीआईएसएस के छात्र सूर्य कार्तिक और जयंतलाल बागदा वरिष्ठ जनजातीय निरीक्षक विठ्ठल चव्हाण के साथ मिलकर ऑनलाइन महालाभार्थी डेटा अपलोड करते हैं।

atfr4xtvrhtf6quaftrmkweqggdupnei.jpgसूर्य और जयंतलाल डाटा अपडेट करते हुए
फोटो सोर्स - पुणे मिरर 

यह सब कुछ महीने पहले ही शुरू हुआ था, जब महाराष्ट्र नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमकेसीएल), एक निजी इकाई, राज्य सरकार के साथ जुड़ी और एक पोर्टल लॉन्च किया जो नागरिकों के लिए सभी सरकारी प्रायोजित योजनाओं पर जानकारी प्रदान करता है। कल्याणकारी योजनाओं को सूचीबद्ध करने के अलावा, वेबसाइट उन लोगों को भी वर्गीकृत करती है जो नागरिक अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर पात्र हैं। इसके अंतर्गत सभी आवेदक को व्यक्तिगत विवरण भरना होता है जैसे की  वार्षिक आय, निवास स्थान और शैक्षणिक योग्यता और वेबसाइट द्वारा योग्यता को देखते हुए उनके लिए चलने वाली योजनाएं निर्धारित होती है जिसका जरूरतमंद लाभ उठा सकें। इस वेबसाइट के अंतर्गत कई योजनाएं सम्मिलित है जिनमे पाठ्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति , व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मुफ्त प्रशिक्षण, मुक्त पौधे, कुएं बनाने के लिए धन या खेतों में पाइपलाइनों बिछाने का काम, घरों और शौचालयों के निर्माण के लिए धन और अन्य लोगों के बीच बकरी फार्म के लिए धन आदि कई राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा प्रदान की गई 750 से अधिक कल्याणकारी योजनाएं शामिल है।

vpayazngcsfjw3zydcyvkfsjzmejwrxx.jpgरंजन घोड़कर सरकारी योजना की जानकारी देते हुए

रंजन बताते है कि " ये बात जानकर हमने अनुभव किया की सरकार के पास इतने सारे जनहितकारी कार्यक्रम हैं लेकिन अंतिम उपयोगकर्ताओं में अधिकांश को इस बारे में पता नहीं है। हमारे पोर्टल महालाभार्थी में ग्रामीण हिस्सों में रहने वाले लोगों को सक्षम करने या गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ने का एक शानदार तरीका खोजा लेकिन फिर समस्या यह थी की ग्रामीण हिस्सों में इंटरनेट तक पहुंच और कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा, वेबसाइट पर लॉग इन करने के लिए सभी लोग तकनीक-समझदार नहीं हैं। सभी समस्याओं पर चर्चा करने के बाद टीम इस निष्कर्ष पर पहुँची की हम नागरिकों तक योजनाएं लाने के विचार के साथ आगे बढे।" इसके बाद अपनी सोच को अमलीजामा पहनाते हुए इस टीम ने नागरिकों को ऑनलाइन फॉर्म भरने के कठिन कार्य से राहत देते हुए उन्होंने ग्रामीणों को ऑफ़लाइन फॉर्म भरवाने शुरू किये और उसके बाद में फॉर्म में एकत्रित डेटा को वेबसाइट में दर्ज किया। इसके बाद इस टीम का लक्ष्य पुणे के जुन्नार और आस पास के तालुक में रहने वाले 123 गांवों के 20,000 संभावित लाभार्थियों को लक्षित करना था। साथ ही उन्हें पता था की उनके लिए कई परिवारों तक पहुंचना कठिन काम था और इसलिए वे राज्य प्रायोजित उन्नत लर्निंग सेंटर (एएलसी) में शामिल हुए जो ग्रामीण युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करते थे। टीम के सूर्य और जयंतलाल ने प्रत्येक संभावित लाभार्थी तक पहुँचने के लिए स्वयंसेवकों की तलाश की। उन्होंने बिचौलियों और एजेंटों को योजना से दूर रखा है जिससे की लोगों को सीधा लाभ पहुँचाया जा सके।
वर्तमान में उनके डेटा के  लगभग 750 कल्याणकारी योजनाओं के लिए कई व्यक्ति पात्र है।

जुन्नार के अंबोली गांव के पूर्व सरपंच देवराम नाना इस पहल से बहुत खुश है क्योंकि इससे उनके क्षेत्र के लोगों को लाभ हो रहा हैं। वे बताते है कि " हमारे गांव में 350 घरों में से 349 आदिवासी हैं। मॉनसून महीनों के दौरान ग्रामीणों को एकमात्र धान की फसल दिखाई देती है। गरीबी और रोजगार की कमी के कारण, गांव के युवा - पुरुष नौकरियों की तलाश में पड़ोसी शहरों में चले गए हैं। लेकिन अब हमें आशा की किरण नजर आई है।"

टीम के सदस्य सूर्य और जयंतलाल कहते है कि "एक बार कल्याणकारी योजनाओं के लोगों तक पहुँचने के बाद न केवल वे गरीबी के बंधनों से बाहर निकलने में सक्षम होंगे बल्कि उनके पास भविष्य के अवसर भी उपलब्ध होंगे।"

वाक़ई यह टीम इस तरह से काम कर रही है उसे देखकर तो यही लगता है की वो दिन दूर नही जब देश में विकास की गंगा अपने चरम पर होगी।

Share This Article
403