यहाँ गाय के गोबर से बनाया जा रहा है कागज, किसानों को होगा सीधा फायदा

भारत में गाय का महत्व प्राचीन काल से ही रह है। भारत एक कृषि प्रधान देश था और आज भी है और गाय को अर्थव्यस्था की रीढ़ माना जाता था। भारत जैसे और भी देश है, जो कृषि प्रधान रहे हैं लेकिन वहां गाय को इतना महत्व नहीं मिला जितना भारत में। गाय का दूध, दूध से निकला घी, दही, छाछ, मक्खन आदि सभी तो बहुत ही उपयोगी है ही लेकिन इसके अलावा इसके मूत्र और गोबर का भी अपना महत्व है। प्राचीन काल से ही गाय के गोबर का ईंधन, बायोगैस व खेतों में उर्वरक के रूप में प्रमुखता से उपयोग होता रहा है। आज भी कई विकासशील देशों में गाय का गोबर ईंधन बनाने से लेकर खेती के लिए खाद तक कई तरह के उपयोग में आता है। इसके अलावा इसे मिट्टी के घरों को निपने में और धार्मिक कार्यों में तो इसका उपयोग होता ही है।

पर आपने कभी सोचा होगा कि आप गोबर से कागज भी बनाया जा सकता है। नहीं तो आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे कचरा और गंदगी समझे जाने वाले गोबर का इस्तेमाल कर करोड़ों के मुनाफ़े की तैयारी हो रही है।

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खादी व ग्रामोद्योग आयोग की इकाई कुमाराप्पा नैशनल हैंडमेड पेपर इंस्टिट्यूट (केएलएचपीआई) ने इस कागज को बनाया है। केएलएचपीआई ने इस हैंडमेड कागज को गाय के गोबर और रैग पेपर को मिलाकर बनाया गया है। इस प्रयोग से मवेशी किसानों की न सिर्फ आय बढ़ेगी बल्कि सड़कों को भी साफ रखने में मदद मिलेगी। खादी ग्रामोद्योग आयोग ने स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर प्लास्टिक मिश्रित तथा गाय के गोबर से कागज बनाया है। 12 सितंबर बुधवार को सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सिंह ने जयपुर  में गाय के गोबर से बने कागज को लॉन्च किया। इस प्रयोग से मवेशी किसानों की न सिर्फ आय बढ़ेगी बल्कि सड़कों को भी साफ रखने में मदद मिलेगी।

तकनीक जल्द ही खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) केंद्रों के 26 केंद्रों पर अपने औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। गोबर से कागज को तैयार कर, कच्चे माल के लिए हजारों पेड़ों की कागज के लिए ली जाने वाली बलि को भी रोका जा सकता है। कच्चे माल के रूप में गोबर का उपयोग डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न करने की उम्मीद है। इसके तहत किसानों से पांच रुपये किलो गोबर खरीदने की योजना है जिससे आवारा घूमने वाली गायों के संरक्षण में मदद मिलेगी तथा किसानों को भी इससे फायदा होगा। शीघ्र ही देशभर में खादी भण्डारों पर इसकी बिक्री शुरू होगी। इन प्लास्टिक मिश्रित कागज से बने थैलों की मांग अभी से बढ़ने लगी है तथा रेमण्ड ने डेढ लाख थैलों की खरीद का आदेश दिया है।

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इसके अलावा सरकार गोबर से बिजली पैदा करने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे केवल गोबर का इस्तेमाल ही नहीं हो सकेगा बल्कि रोजगार भी पैदा होंगे। सरकार और खादी ग्रामोद्योग आयोग के उस पहल नें गाय के गोबर की एक और खूबी सामने लाकर इस महत्वता को बढ़ाकर पर्यावरण सुरक्षा से जोड़ दिया है। अब देश कब किसानों को तो फायदा होगा ही पयार्वरण को भी प्रदूषण मुक्त बनने में मदद मिलेगी।

 

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