पूजा समिति ने गणेशोत्सव के भव्य आयोजन की जगह चंदे के पैसों से कराया अनाथ युवक का इलाज

मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं होता। इसलिए एक इंसान को दूसरे इंसान की मदद करनी चाहिए, बिना यह देखे कि उसकी जात क्या है या उसका धर्म क्या है। हमारे देश में मंदिरों में भगवान की मूर्ति को स्नान कराने के लिए दूध, दही, घी, पानी आदि का उपयोग किया जाता है जो अंततः नालियों की शोभा बनता है। हमारे देश की नालियाँ तो उन गरीब बच्चों से भी कई ज्यादा भाग्यशाली है जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता। देश में करोड़ों लोग गरीबी, भूखमरी और कुपोषण के शिकार हैं। इस बात को नजरंदाज कर मंदिरों में दूध, दही, घी की नदियाँ बहाकर इसे व्यर्थ कर दिया जाता है। मानव सेवा भगवान की पूजा से अधिक फलदायी है, यदि इस भाव से सेवा करें तो आत्मशांति व संतुष्टि अवश्य मिलती है। अगर कोई शख्स मर रहा हो या मदद के लिए तरस रहा हो और उसकी मदद की जगह हम भगवान की पूजा या अल्लाह की इबादद कर रहे हो तो भगवान भी हमें माफ नहीं करेगा। इसलिए मानव सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है। 

कुछ ऐसे ही विचारों के साथ सामने आए पुणे के गणपति पूजा समिति के सदस्य जिन्होंने गणेशोत्सव के भव्य आयोजन की जगह एक जरूरतमंद की मदद कर इंसानियत की मिसाल भी पेश की है।

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ये हैं पुणे के नवी पेठ स्थित नवशक्ति मित्र मंडल के सदस्य। इस मंडल ने गणेश चतुर्थी के महोत्सव के लिए जुटाया हुआ पैसा एक 22 साल के अनाथ लड़के के इलाज के लिए दान कर दिया है। पुणे स्थित 56 साल पुराना यह नवशक्ति मित्र मंडल हर साल गणपति पूजा का भव्य आयोजन करता है। इस बार भी यह मंडल गणपति उत्सव की भव्य तैयारियों में जुटे हुए था। तभी उनको एक जरूरतमंद की जरूरत का पता चला और सबों नें मिलकर उसकी मदद का फैसला किया। इस बार मंडल ने तय किया है कि पिछले साल की तुलना में वे केवल 20 फीसद ही वह उत्सव पर खर्च करेंगें और बाकी अस्पताल में इस ज़रूरतमंद लड़के के इलाज़ के लिए देंगें।

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     फ़ोटो- सतीश जोरी (साभार-फेसबुक) मंडल ने 

मंडल ने गणेशोत्सव का फंड एक 22 वर्षीय लड़का के देखभाल में लगाया है। दरअसल 22 साल का यह युवक, सतीश जोरी एक स्थानीय निवासी है। लड़के का कोई परिवार नहीं है। कुछ दिन पहले ही एक हादसे में सिर पे गंभीर चोट लगने की वजह से वो बेहोश हो गया। लोगों ने उसे घर की फर्श पर पड़ा हुआ पाया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सतीश की सर्जरी करनी पड़ेगी। कोई भी इस लड़के की देखभाल को आगे नहीं आया तो मंडल ने फैसला लिया कि वह खुद उसके लिए आगे आएगा और अस्पताल का खर्च उठाएगा।

सबों ने गणेशोत्सव में मिलने वाला फंड उसकी इलाज और देखभाल में खर्च करने का फैसला किया। इसके लिए नवी पेठ का नवशक्ति मित्र मंडल इस साल अब अपने पंडाल को एक चौथाई कम करेंगे, साथ ही फैंसी लाइट और डीजे भी नहीं लगाए जाएंगे। इस तरह से बचाए हुए पैसे 22 वर्षीय सतीश जोरी के मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह मंडल हर साल 5 लाख रुपए के करीब गणेशोत्सव पर खर्च करता है। पर इस साल उन्होंने कुल खर्च को 20 प्रतिशत तक कम कर दिया है। पिछले रविवार को ही सतीश की सर्जरी हुई है। अभी तक मित्र मंडल नें सतीश के इलाज पर 1.5 लाख रुपये खर्च किए हैं और बताया जा रहा है कि पूरे 4.5 लाख रुपये लगेंगे।

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