पिछले 22 सालों में, इस भूरजी-पाव स्टॉल चलाने वाले व्यक्ति ने 250 से अधिक लोगों को दिया है जीवन दान

वह 19 वर्ष का था जब उसने पहली बार एक लड़की को पुणे के डेंगल ब्रिज के पास मुथा नदी में जिन्दगी और मौत से जूझता देखा। खुद की जिन्दगी की परवाह किए बिना, वह उसे बचाने के लिए नदी में कूद गया। जी हाँ, राजेश दामोदर काची नाम के एक भूरजी-पाव स्टाल मालिक ने अबतक 250 से अधिक लोगों की जान बचाकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है।

पिछले 22 सालों से, यह आदमी जो ओल्ड टोफखाना, शिवाजीनगर में एक भूरजी-पाव स्टॉल चलाता है, ने 250 से ज्यादा लोगों को डूबने से बचा लिया है। इसके अलावा, उन्होंने आत्महत्या या आकस्मिक मौत के कारण नदियों में फेंके गये 600 शवों को उनके परिवारवालों को सौंपा है। 49 वर्षीय राजेश ने यह सब बिना किसी नकदी या बहादुरी पुरस्कारों की उम्मीद के किया है।

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फोटो साभार: यूटूब

पुणे मिरर से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि "उस लड़की को बचाने के बाद, उसका परिवार मुझे धन्यवाद देने के लिए मेरे घर आया। उनकी आंखों में खुशी और उनका आशीर्वाद ही मेरा इनाम था। मैं वर्णन नहीं कर सकता कि यह भावना कितनी अद्भुत थी। उस दिन से, मैंने लोगों के जीवन को बचाने का फैसला किया"।

लोगों की जान बचाते-बचाते वे इतने प्रसिद्ध हो गये कि जब भी लोग डूबते हुए देखते , तो वे तुरंत उन्हें ही बुलाते। यहां तक कि पुणे पुलिस भी बचाव कार्यों में मदद के लिए उन पर निर्भर करती है। साल 1997 और 2004 में उन्होंने कई लोगों की मदद की थी, जब पुणे भारी बारिश से पीड़ित था। बाढ़ वाले पानी में तैरकर उन्होंने कई लोगों की जान बचाई, नदी के नजदीक रहने वाले लोगों को उनके गंदे घरों से महत्वपूर्ण सामानों को हटाने में मदद किया, विकलांग, बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित, उच्च जमीन तक पहुंचने में भी सहायता प्रदान की थी।

राजेश कहते हैं कि "मैं तंबाकू नहीं चबाता, न ही धूम्रपान करता हूं या शराब का सेवन। मैं तैरता हूं और नियमित रूप से व्यायाम करता हूं, इसलिए मेरे पास सांस नियंत्रण और सहनशक्ति अच्छी है। मेरा परिवार पूरी तरह से मेरा समर्थन करता है और मेरे महान काम की सराहना करता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी कल्पना, बेटी सोनाली और पुत्र आकाश और आशीष हैं।

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फोटो साभार: मिरर

पुलिस बल में उनका योगदान इतना प्रभावशाली था कि तब शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर महेश कुमार सरताप ने उनके काम के ऊपर एक फिल्म बनाई, जिसका नाम राजू: द लाइफ सवियर था।

जब तक मैं कर सकता हूं मैं जीवन को बचाने के लिए अपनी मुहिम जारी रखूँगा। मैं कल्पना कर सकता हूं कि एक परिवार अपने प्रियजनों की मौत के बाद कितना दर्द महसूस करता है।

जीवन बचाना कोई आसान काम नहीं है और जब बचाने वाले की जिन्दगी खुद ख़तरे में हो। राजेश ने वाकई में कमाल का काम कर दिखाया है। हम उनकी इस निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें सलाम करते हैं।

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