पिछली बेंच पर बैठने वाला एक साधारण छात्र, 4 बार हुआ UPSC की परीक्षा में फेल, आज है IPS ऑफिसर

एक साधारण छात्र, सबसे पिछली बेंच पर बैठने वाला शायद ही कभी किसी शिक्षक का चहेता बन सकता है। शायद ही किसी बैकबेंचर को लोग एक प्रतिभाशाली छात्र के रूप में देखते होंगे। लोगों के देखने का नज़रिया जो भी हो, हमारी आज की कहानी आपका नज़रिया बदलने के लिए काफी है। कक्षा में एक अदृश्य छात्र होने से लेकर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने के लिए अत्यधिक प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा को क्रैक करने वाले मिथुन कुमार भले ही एक साधारण छात्र थे, लेकिन उनका सपना हमेशा असाधारण था।

2016 बैच के आईपीएस ऑफिसर मिथुन कुमार जी के की कहानी सच में प्रेरणा से भरी है। उन्होंने हुमंस ऑफ़ एलबीएसएनएए नामक एक फेसबुक के साथ अपने संघर्ष के सफल होने तक के सफ़र को साझा किया है।

उन्होंने लिखा कि "अपने बचपन के दिनों में, मैं एक औसत छात्र था, ठेठ बैकबेंचर, जिसे कक्षा के अन्य छात्र और शिक्षक एक सामान्य छात्र की दृष्टि से देखते थे। वहां शायद ही कोई था जो मुझ पर विश्वास करता था; अब जब मैं वापस देखता हूं और इन सब पर प्रतिबिंबित करता हूं, उन सब को एक आशीर्वाद स्वरूप मानता हूँ।

मेरा मानना है कि सिविल सर्विसेज एग्जाम क्लियर करना या फिर जीवन में किसी और चीज को प्राप्त करने में कोई असाधारण क्षमता या कौशल का इस्तेमाल नहीं होता; वे सब साधारण लोग हैं बस उन्होंने सभी बाधाओं के बावजूद खुद पर विश्वास बनाए रखा है।

स्नातक होने के बाद, सबसे बड़े बेटे होने के नाते, मुझे अपने माता-पिता की इच्छा के अनुरूप नौकरी करनी पड़ी। मैं एक सॉफ्टवेयर पेशेवर के रूप में काम कर रहा था, तभी मुझे अहसास हुआ कि मैं इसके लिए पैदा नहीं हुआ हूँ मुझे और कुछ करना है। तीन साल तक नौकरी करने के बाद मैंने इसे अलविदा करने का निर्णय लिया। तबतक मेरे छोटे भाई ने घर की ज़िम्मेदारी अपने कंधे ले ली थी और इससे मुझे यह फैसला लेने में काफी सहूलियत हुई।

यह मेरे पिता का एक अपूर्ण सपना था। मैं विशेष रूप से एक सिविल सेवक और एक पुलिस अधिकारी बनना चाहता था। जब भी मैंने सड़क पर एक पुलिसकर्मी देखा, तो मेरे अंदर एक अलग तरह की चमक उत्पन्न हो जाती थी। जब मैंने परीक्षा क्वालीफाई कर लिया, तो कइयों ने मुझसे पूछा कि प्रशासनिक सेवा क्यों नहीं। मेरे पास कोई जवाब नहीं था; मैं उन्हें समझा नहीं सकता कि इस वर्दी ने मुझे कितना मोहित किया है और मैंने हमेशा खुद को एक पुलिस ऑफिसर के रूप में देखने की कल्पना की है। 

मैं यूपीएससी में विभिन्न चरणों में चार बार विफल रहा, हर बार एक अलग अनुभव और एक नया सबक सीखने को मिला। यह कठिन था, लेकिन यह मुझे एक व्यक्ति के रूप में ढाला।

मैं एक विश्वास साझा करना चाहता हूं "आगे बढ़ने या हार मानने के लिए हमारा दिमाग तय करता है, आप वास्तव में नहीं जानते कि आप कब मंजिल तक पहुंच सकते हैं बशर्ते आपको अपनी कोशिश को जारी रखना है।"

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