17 वर्षीय बच्चे के आइडिया से हुआ मुम्बई की झुग्गियों का कायाकल्प

इरादों में जान हो और मन में कुछ करने का जज़्बा हो तो मुश्किल हालातों में भी रास्ते मिल जाया करते हैं। आज कल की आराम पसन्द जिंदगी में सब को अपने आप से मतलब है अपनी सुविधाओं का ख्याल है लेकिन क्या कभी उन लोगों के बारे में सोचा है जो हमारे समाज का अंग तो है लेकिन उन्हें वे मूलभूत सुविधाएँ भी नसीब नही होती जो उनका हक हैं। हमारी आज की कहानी एक ऐसे ही 17 वर्षीय नायक की है जो जिसने समाज के वंचित वर्ग को उनका अधिकार दिलवाने की मुहीम चला रखी है। ये कहानी है है ब्यूरोक्रेट आर राजीव के बेटे  अमर्त्य राज की। मुम्बई में रहने वाले अमर्त्य को नगरपालिका आयुक्त अजय मेहता ने उनकी स्वछता कार्यप्रणाली को देखते हुए बीएमसी के स्वच्छ मुंबई प्रबोधन अभियान में शामिल किया है।

मौजूदा समय में स्लम में रहने लोगों के लिए अमर्त्य द्वारा तैयार की गयी  स्वच्छता योजना के लिए नगरपालिका नागरिक प्रमुख  रूप से मंजूरी मिली है। अमर्त्य ने  स्वछता अभियान कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत झुग्गी झोपडीयों की सफाई योजना के लिए एक प्रभावी प्रारूप तैयार किया है। अभी अमर्त्य कक्षा 12 के स्टूडेंट है लेकिन उनकी सोच बहुत ज्यादा दूर की है जिस सोच में यह शामिल है की स्वछता का अधिकार हर आम और ख़ास व्यक्ति के लिए समान है क्योंकि स्वछता सभी की आवश्यकता हैं।

साल 2013 से बीएमसी की तरफ से एक योजना बनाई गई जिसमें झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले 150 परिवारों को अलग अलग इकाइयों में विभाजित किया गया है उसके बाद नागरिक निकाय द्वारा  छोटे छोटे अलग अलग विभाजित क्षेत्रों को स्थानीय समुदाय संगठनों को सौंपा गया जिनका कार्य क्षेत्र  विशेष में स्वच्छता अभियान की कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करना हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि झुग्गी झोपड़ियों में रह रहें लोग कचरे का प्रभावी निस्तारण नही है। एक बार अमर्त्य और उनके साथियों के मुम्बई के कंदिवली (पश्चिम) में भद्रनगर झोपड़पट्टी का दौरा करने का अवसर मिला उसके बाद से अमृत्य के मन में वहाँ की स्वछता को लेकर तरह तरह की बातें उठने लगी। 

enj7phqs8r8d2qy5dkmpj7gkfkmfp8cs.jpgफोटो सोर्स - टाइम्स ऑफ़ इंडिया 

अमृत्य बताते है कि " उस झोपड़पट्टी में करीब 900 घरों की आबादी है ऐसे में वहाँ पर कचरे के प्रभावी निस्तारण से  न केवल अपशिष्ट अलग होता है बल्कि जैव-कंपोस्टिंग के माध्यम से इसे भी कंपोस्ट भी किया जा सकता है।"

बीडी सोमानी इंटरनेशनल स्कूल के छात्र अमृत्य आगे बताते है कि "जब मैंने झुग्गी का दौरा किया तो मुझे एहसास हुआ कि वहाँ जो योजनाएं चल रही है स्वछता की दृष्टि से ये सफल योजनाएं हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है कि ये योजनाएं  कब तक उसी तरह प्रभावी रुप से जारी रहें।" उसके बाद अमृत्य के दिमाग में एक विचार आया की झुग्गी झोपड़ियों की स्वछता के लिए नगर निगमों को संयुक्त रूप से शामिल करना होगा जिससे की प्रत्येक योजना लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े और सामाजिक ज़िम्मेदारी के तहत योजनाएं जारी रहें। अमृत्य की योजना रंग लाइ और नगर निगम द्वारा उनके लरतव को स्वीकार किया गया उसके बाद वर्तमान में प्रत्येक समुदाय संगठन जो योजना को सुचारू रखने की जिम्मेदारी लेता है उसे बीएमसी द्वारा एक महीने में 6,000 रुपये का भुगतान किया जाता है ताकि वह डिब्बे खरीद सकें और बस्तियों में जागरूकता अभियान आयोजित कर सके। । बीएमसी प्रमुख अजय मेहता कहते है कि "निगमों की भूमिका यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है की बस्तियों में चलने वाली सभी योजनाएं जारी रहें।

अमृत्य के प्रयासों में जल्द ही मुम्बई की झुग्गी झोपड़ियों का काया पलट होगा और स्वछता मिशन के अध्याय में एक और नया पन्ना लिखा जायेगा।



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