इस टैक्सी ड्राइवर के एक संकल्प ने बदल दी सूखा ग्रस्त गाँव की दशा और दिशा

जल ही जीवन है ये बात हम अक्सर सुनते आये है लेकिन क्या यह बात सिर्फ एक बात तक ही सिमित है या इसके मायने भी हमने जानने की कोशिश की है? इस सावाल को सुनकर श्याद हम लोगों में से कई लोग मौन हो जाए क्योंकि हमारे पास उसका कोई जवाब नहीं है। लेकिन कोई है जो इस सवाल का जवाब जानता है पानी की कीमत पता है जिसे उनका नाम है सुभाष कदम। एक ओर जहाँ हम शहरों की चमक धमक में 'बेहतर जीवन' जीने का सपना देखते है लेकिन कुछ लोग उस सपने को सच बनाने के लिए हर सम्भव कोशिशे करते है उन्हीं में से एक है कदम जो जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय काम कर रहें हैं। 

साल 1972 से 2015 के बीच 43 वर्षों के दौरान महाराष्ट्र के जयगांव गांव में केवल दो बार अच्छी वर्षा हुई है पहले जिस गाँव की मिट्टी गांव की मिट्टी ज्वार और गन्ना जैसी फसलों के लिए आदर्श मानी जाती थी लेकिन अच्छी मिट्टी होने के बाद भी जयगांव की सबसे बड़ी समस्या थी की वहाँ पानी का बहुत अभाव था। जयगांव के बाशिंदे मुख्य रूप से एक वर्ष में आठ महीने तक पानी के टैंकरों पर निर्भर रहा करते थे गांव में लगभग 3.5 लाख लीटर पानी का उपयोग किया जाता है लेकिन आज जयगांव को पानी के सूखा प्रूफ गाँव में बदलने का श्रेय सुभाष कदम जिन्हें नाथ जी भी कहा जाता है उनके प्रयासों को दिया गया है। कदम केवल चार साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया था। बचपन से ही कदम अपने परिवार के बेहद करीब थे और अपने गांव सूखे के साथ संघर्ष करते उन्होंने अपनी आँखों से देखा था।

समय के साथ कदम के सभी साथी गाँव छोड़ कर रोजगार के सिलसिले में मुंबई की ओर चल पड़े उनमे कदम भी शामिल थे क्योंकि पूरे परिवार की जिम्मेदारी अब 18 वर्षीय कदम के कंधो पर थी सपनों के शहर मुम्बई जाकर कदम ने ट्रैवल एजेंसियों में कारों, बसों आदि में ड्राईवर के तौर पर काम करना शुरू किया उससे होने वाली आय से वह अपनी बहन की शादी के  लिए पर्याप्त पैसे की बचत करने लग गये। इस दौरान ही  साल 2007 में कदम को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन द्वारा 'खुशी कार्यक्रम' में भाग लेने का अवसर मिला। जिसने कदम का जीवन बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस कार्यशाला के बाद कदम का जीवन एक नया मोड़ ले चूका था अब वे अपने लिए नही बल्कि सभी के लिए सोचने लगें थे। 

frcezzhskefedmfwd4eqaalzgagnrmpb.jpgफोटो सोर्स - यूथ की आवाज़ 

कदम बताते है कि "मुझे लगा की आजकल युवा बड़े शहरों में प्रवास कर जाते है तो उनके गांवों की स्थिति क्या होती होगी वहाँ की स्थितियों में तो और अधिक असंतुलन आजाता होगा। ऐसे में मैंने संकल्प लिया की इस स्थिति को समय रहते सुधारना होगा क्योंकि अब नही हो कभी नही।" इस बात को समझने के बाद उन्होंने शहर को छोड़ फिर से अपने गाँव जयगांव का रुख किया उसे बेहतर बनाने के लिए।   गाँव आकर कदम ने सबसे पहले गाँव को खुले में शौच मुक्त करने का बीड़ा उठाया और शौचालय निर्माण की मांग की साथ ही उन्होंने ज संरक्षण के विकल्प खोजना भी शुरू किया। गाँव में समस्याएं कई थी और बिना किसी मदद के उन्हें हल करना मुश्किल था इसलिए कदम ने फैसला किया कि अपनी सोच को साकार रूप देने के लिए उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और गाँव वालों ने उनका साथ दिया और वे 32 वर्ष की उम्र में जयगांव के सरपंच बन गये। उसके बाद गाँव की पानी की समस्या को हल करने की दिशा में उन्होंने प्रयास करने शुरू किये।

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उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग्स नदी कायाकल्प परियोजना के सहयोग से पानी की कमी के मुद्दे को का समाधान किया। साथ ही गाँव के लोगो को पानी का महत्व बनाने के लिए व्यक्ति व्यक्ति सम्पर्क भी भी। आज कदम अपने गाँव में जो अब आर्ट ऑफ लिविंग टीचर के रूप में काम करते हैं ग्रामीणों के बीच आध्यात्मिक सशक्तिकरण के माध्यम से सेवा और स्वामित्व की भावना को फिर से उत्तेजित करने के लिए सामुदायिक भवन कार्यशालाओं का आयोजन भी करते हैं। कदम ने अपने गाँव में स्टॉप द वाटर सेव द वाटर नाम से एक अभियान भी शुरू किया है। जहां ग्रामीणों ने 'लिफ्ट सिंचाई' जैसी तकनीकें सीखीं और बोल्डर बांधों और अन्य संरचनाओं के निर्माण से उन्हें पानी बचाने में मदद मिल सकती है और पानी को अन्य स्रोतों से सीधे चैनल तक लाने में भी मदद मिल सकती है। कदम के प्रयास और ग्रामीणों और स्वयंसेवकों द्वारा की मेहनत और कार्यों ने परिणाम अब दिखने लगे हैं  जयगांव को नदी के कायाकल्प के लिए किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रयासों के फलस्वरूप साल 2017 में सत्यमेव जयते वाटर कप में पहला पुरस्कार से नवाजा गया है।

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अब कदम का सपना जयगांव को एक आदर्श गाँव में बदलने का है और अपने इसी लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में वे काम कर रहे है। कदम ने प्रण लिया है कि " जब तक उनका गाँव पूरी तरह सशक्त और आत्मनिर्भर नही हो जाता तब तक वे बाल और दाढ़ी नही कटवायेंगे।" कदम की मेहनत और प्रयास बहुत जल्द ही रंग लाएंगे क्योंकि उनका पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित है।

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