केरल बाढ़ में मसीहा बनकर उभरे ये आईएएस अधिकारी, 48 घंटों में बचाई 2 लाख जानें

बाढ़ ने केरल में तबहाी मचाई हुई है। केंद्र ने केरल में आई विनाशकारी बाढ़ को ‘गंभीर प्रकृतिक आपदा‘ घोषित की है। इसमें अब तब सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं, इसके साथ ही फसल और संपत्तियों समेत कुल 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया है। मौसम विभाग के द्वारा राज्य के 14 में से 13 जिलों में फिर से रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।बाढ़ से प्रभावित केरल में राहत और बचाव अभियान में सेना, वायुसेना, नौसेना, तटरक्षक और एनडीआरएफ की 52 टीम शामिल हैं। केरल में बाढ़ के हालात को देखते हुए एनडीआरएफ के अलावा सेना और प्रशासन भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई हैं। 

इस दौरान बहुत सारे आईएएस, आईपीएस अधिकारियों नें बाढ़ की स्थिति सुधारने के लिए सराहनीय कार्य किया है। इसी क्रम में केरल के एक सब-कलेक्टर का नाम भी शामिल है। जिन्होंने इस कठिन परिस्थितियों में लाखों लोगों के जान और माल का हानि होने से बचाया है।


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इनका नाम है कृष्णा तेजा मैलावरापु। मुख्यतः केरल के गुंटूर जिले के चिलकालूरपेट के रहने वाले कृष्णा तेज केरल के एक ऐसे आईएएस अधिकारी हैं। फिलहाल वे अलापपुजा ज़िले के सब कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। कृष्णा तेजा एक ऐसे आईएएस अधिकारी हैं, जिनकी वजह से तबाही आने से पहले ही लाखों लोगों को बचा लिया गया और तीन दिन में करीब 2 लाख लोगों की जिंदगी बच गई।

दरअसल, 16 अगस्त 2018 को केरल के वित्त मंत्री डॉक्टर थॉमस और कृष्णा तेजा रात को बैठक कर रहे थे, तभी उन्हें एक संदेश प्राप्त हुआ उन्हें पता चला कि चेंगन्नूर और कुट्टानाड में भारी बारिश की वजह से बांध भर गए हैं और जल्द ही उन्हें खोला जा रहा है।

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बिना वक्त बेकार किए उसी समय इस आईएएस कृष्णा ने सोचा कि अगर बांध के गेट खोले गए तो कुट्टानाड में हालात खराब हो जाएंगे और हजारों लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा। उस वक्त उन्होंने एक मिनट की देरी किए बिना ही कुट्टानाड में ऑपरेशन शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उस ऑपरेशन में 48 घंटों में करीब 2 लाख लोगों को बचा लिया गया और उन्हें राहत कैंप में शिफ्ट किया गया। उस दौरान राहत कार्य में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि वहां राहत कार्य के लिए नाव के लिए इस्तेमाल करना पड़ा। इस ऑपरेशन से मीडिया को दूर रखा गया, क्योंकि इससे पेनिक होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे भगदड़ आदि भी हो सकती है। बता दें कि बाढ़ के वक्त एनडीआरएफ ने भी काफी मदद की थी। इस दौरान 220 लोगों की सात टीम बनाई गई, जिन्होंने अलग अलग स्थान जाकर राहत कार्य में सहयोग किया।

इस पूरे बचाव कार्य के दौरान वे व्यक्तिगत तौर पर मौजूद थे। ऑपरेशन के दौरान ऐसा समय भी आया जब पानी उनके कंधों तक आ गया था, लेकिन वो पूरी तरह से बचाव अभियान में जुटे रहे।
48 घंटे का कठिन ऑपरेशन होने के बावजूद आईएएस कृष्णा नें हार नहीं मानी। उनका कहना है कि वे लोगों की सेवा करने के लिए ही आईएसएस बने हैं। बचाव कार्य द्वारा निकाले गए दो लाख लोगों को शिविरों में रखा गया है और उन्हें सभी सुविधाएं और ख़ाना उपलब्ध कराया जा रहा है। कृष्णा इस दौरान शिविरों का पूरा जायज़ा ले रहे हैं। उनका यह साहसिक व सामाजिक कार्य सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

 


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