पानी में पत्थर की ढाल बनकर खड़े केरल के मछुआरे हैं इस राष्ट्रीय आपदा के असली सुपरहीरो

केरल की विनाशकारी बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में सबने अपना योगदान दिया। जिन्दगी और मौत के बीच जूझ रहे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर वहां के मछुआरों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पानी में पत्थर की ढाल बनकर खड़े इन मछुआरों ने साबित कर दिया कि सुपरहीरो बनने के लिए किसी टोपी की जरुरत नहीं है।

यह सच है कि आज की नई पीढ़ी की दुनिया सिर्फ इंस्टाग्राम और फेसबुक तक ही सिमट कर रह गयी है। इन सब के बीच हम आंतरिक समस्याओं को दूर करने वाली वास्तविक समस्याओं को अनदेखा करने की कोशिश कर रहे हैं। केरल में आई इस भीषण आपदा ने हमारे सामने एक बार फिर से कई चीजों को उजागर कर रख दिया है। अब देखना हमें है कि हम इससे कुछ सीख लेंगे या फिर हर बार की तरह एक बार फिर इसे नज़रंदाज़ कर एक और तबाही का इंतजार करेंगे। 

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फोटो साभार: द इंडियन एक्सप्रेस

हालाँकि, इन सब के बीच हमारी उदासीनता को तोड़ने में कामयाब रहे हैं केरल के मछुआरे, जिन्होंने अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बचाव कार्यों में भरपूर सहायता प्रदान की। इस भयानक आपदा में जहाँ अबतक 360 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी, वहीं 40 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। दो लाख से अधिक लोगों ने अपना सबकुछ खो दिया है। एनडीआरएफ के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, भारतीय सेना को लोगों की मदद के लिए आगे आना पड़ा। पुरुषों, महिलाओं और जानवरों को बचाने के लिए गर्दन-गहरे पानी में तैरते हुए, केरल के बहादुर मछुआरों ने इस त्रासदी के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी। बिना किसी उचित संसाधन या चिकित्सा उपकरण के मछुआरों ने वाकई में कमाल का काम कर दिखाया है। 

उन्हें प्रति व्यक्ति 3,000 रुपए का मुआवजा देने की पेशकश की गयी, लेकिन इसके लिए उनमें से किसी की चाहत नहीं थी।

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फोटो साभार: NDTV

इस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर को प्रस्तुत करने वाले ये मछुआरे ही हैं जिन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए अपने आप को ढाल बनाकर उनके सामने प्रस्तुत किया। एक वीडियो जो कुछ दिन पहले वायरल चला गया था, 32 वर्षीय केपी जयस्वाल मल्लपुरम में कमर से गहरे पानी में लोगों की मदद कर रहे हैं। वे महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक पुल के रूप में अपनी पीठ की पेशकश करते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने जयस्वाल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें "राष्ट्रीय नायक" तक घोषित कर दिया और "इस आपदा से बाहर निकली मानवता की महान कहानियों" में से एक के रूप में वर्णन किया।

बचाव कार्यों में मछुआरों की भूमिका के लिए उन्हें धन्यवाद की ख़ातिर सच में शब्द कम हैं मुआवजे लेने से भी इनकार करने वाले इन मछुआरों के लिए सही धन्यवाद तभी होगा जब राज्य सरकार पूरे समुदाय को एक बेहतर दृष्टिकोण के साथ देखेगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि चीजें उनके लिए व्यवस्थित हों। 

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