एक ऐसे IAS ऑफिसर जो अपनी कार्यप्रणाली से बन गये लोगों की आँखों का तारा

नौकरशाही जब जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वाह करती है तो सकारात्मक परिवर्तन का दौर शुरू होता है जनता का विश्वास बढ़ने लगता है और विकास के कार्यों में प्रसाशन और जनता की संयुक्त भागीदारी देखने को मिलती है। कुछ इस तरह का ही आलम नज़र आता है जब मेघालय में आईएएस अरुण कुमार कम्भावी किसी जिले में पदभार ग्रहण करते है। पहले पश्चिम जयंती हिल्स जिला (डब्ल्यूजेएच) फिर पश्चिम खासी हिल्स जिला (डब्ल्यूकेएच) और अब शिलांग के निवासियों के निवासियों को शानदार, मेहनती और विनम्र आईएएस अधिकारी अरुण कुमार केम्भावी के आने से विकास की उम्मीद जागी है। अरुण कुमार अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के साथ बेहतर कार्यप्रणाली के लिए जाने जाते है।
 
33 साल के अरुण कुमार असम-मेघालय कैडर के 2011 बैच आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में वे सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार और शिलांग के ग्रामीण और सामुदायिक विकास निदेशक के रूप में कार्यरत है। आईएएस अरुण कुमार का जन्म कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी कर्नाटक में ही पूरी हुई बचपन से ही समाज में बदलाव लाने की इच्छा रखने वाले अरुण कुमार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद यूपीएससी परीक्षा की कड़ी मेहनत की और चयनित हुए एक साल का अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने मेघालय का अपने कार्य क्षेत्र के रूप में चयन किया।
 
अरुण कुमार सोशल मीडिया का उपयोग करना बख़ूबी जानते हैं जब उन्होंने आईएएस अधिकारी के रूप में जुलाई 2015 में डब्ल्यूजेएच जिले के जोवाई मुख्यालय का प्रभार संभाला तो उन्होंने लोक प्रशासन के मामलों में सीधे जनता को शामिल करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके ई-गवर्नेंस की अवधारणा से लोगो को रूबरू करवाया। अरुण कुमार की यह पहल उत्तर पूर्वी क्षेत्र में पहली शुरुआत थी।
 
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यही क्रम आगे बढ़ता रहा और आज लोग बीएसएनएल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें भेज सकते हैं जिसका निवारण 9436394363 नम्बर पर व्यक्तिगत रूप से आईएएस अरुण कुमार करते है। वह सभी लोगों की  शिकायतों को पढ़ते है और व्हाट्सअप बने ग्रुप्स के माध्यम से सम्बंधित विभाग के अधिकारीयों को निवारण के लिए प्रेषित करते हैं। उन्होंने शिकायतों का समाधान करने के लिए सामान्य एसएमएस के साथ टेलीग्राम, फेसबुक, हाइक मैसेंजर जैसे अन्य प्लेटफार्मों का भी उपयोग किया।
 
अरुण कुमार ने ना केवल सरकारी कार्यालयों के बाहर शिकायत के हल के लिए लगने वाली लंबी लम्बी लाइनों को कम किया बल्कि अपने नए विचारों के प्रयोग से कागज का उपयोग भी कम कर दिया। अरुण कुमार ने अपने कार्यालय में आपने वाले लोगों द्वारा दी जाने वाली आगंतुक स्लिप्स और अपॉइंटमेंट की अवधारणा को खत्म कर दिया दिया। उनका कहना है कि "जब तक अधिकारी कार्यालय में होता है तब तक उसका काम सामान रूप से लोगों की सेवा करना होता है लोग वास्तव में उसके साथ जुड़ सकते हैं और उससे मिल सकते हैं।"
 
अरुण कुमार काम की रिपोर्ट लेने के लिए महीने के हर दूसरे मंगलवार को सभी विभागों की मासिक बैठकें भी आयोजित करते है और वह व्यक्तिगत रूप से किए जा रहे कार्यों की जांच करते हैं। साथ ही पीपुल्स आईएएस कहे जाने वाले अरुण कुमार ने जैविक चाय की खेती, एपिकल्चर, बागवानी, मत्स्य पालन, कुक्कुट, सुअर, वर्षा जल संचयन, बर्तन आदि सहित आजीविका गतिविधियों पर लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किये इतना ही नहीं उन्होंने जिले में पर्यटन उद्योग बनाने के लिए आवश्यक कार्य शुरू किया। साथ ही क्षेत्र में 4 जी कनेक्टिविटी की सुविधा भी उपलब्ध करवाई तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि निवासियों ने प्यार से उन्हें "पीपुल्स डीसी" नाम दिया।
 
वाक़ई अगर इस तरह की कार्यप्रणाली वाले प्रसाशनिक अधिकारी भारत के हर राज्य के हर जिलें में हो तो अव्यवस्था का जन्म होना ही नामुमकिन है।
 
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