13 साल का यह बच्चा ‘बाल चौपाल’ लगाकर हजारों ग़रीब बच्चों को कर चुका है पढ़ने के लिए प्रेरित

आपने वो कहावत तो जरूर सुनी होगी, ‘देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर’। आज हम ऐसे ही एक बच्चे की कहानी सुना रहे हैं, जो दिखने में तो छोटा है लेकिन उसने कई बड़े काम किये हैं और आज भी उस पथ पर अग्रसर है। हम बात कर रहे हैं लखनऊ के आनंद कृष्ण मिश्रा की, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि किसी भी काम की शुरुआत के लिए उम्र कोई बंदिश नहीं होती, बस जरूरत होती है तो सच्ची लगन और अथक प्रयास की। ऐसा ही कुछ करके दिखाया है 13 साल के आनंद मिश्रा ने।

9वीं कक्षा में पढ़ने वाले आनंद की नन्ही आंखों में बड़े-बड़े सपने हैं। वह बहुत कम उम्र से ही मलिन बस्ती और गांवों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। खुद भी पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले आनंद का मकसद है कि मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चे भी पढ़े लिखें और आगे बढ़े ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। उन्हें शिक्षा दिलाना ही आनंद का मकसद है। इसके लिए वे गांव-गांव जाकर बाल चौपाल लगाते हैं और स्कूल न जाने वाले अपनी उम्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं।

लखनऊ महोत्सव-2013 में शहजादे अवध का खिताब जीत चुके आनंद पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स में भी अव्वल हैं और कई बार समर विंड स्विमिंग अकादमी द्वारा आयोजित स्विमिंग कम्पटीशन में प्राइज जीत चुके हैं। गरीब बच्चों को पढ़ाने का सपना लिए आनंद अब तक सैकड़ों बच्चों को स्कूल पहुंचाने के साथ ही 150 से ज्यादा गांव में अपनी बाल चौपाल लगा चुके हैं। आनंद कहते हैं, मैं नहीं चाहता कोई भी बच्चा होटल या कहीं बाल मजदूरी करे, इसके लिए मैं हर सम्भव प्रयास कर रहा हूँ।

लखनऊ के सीएमएस कानपुर रोड ब्रांच में 9वीं में पढ़ने वाले आनंद पिछले 5 साल (2012) से गांव-गांव जाकर बच्चों को शिक्षा के लिए जागरूक कर रहे हैं। अब तक 150 गांवों में बाल चौपाल लगा चुके आनंद बच्चों को साइबर वर्ल्ड की भी जानकारी देते हैं। वह बताते हैं कि इंटरनेट की मदद से उनकी पढ़ाई कितनी आसान हो सकती है। बाल चौपाल की शुरुआत उन्होंने कुछ साल पहले लखनऊ से 12 किलोमीटर दूर काकोरी के भवानीखेड़ा गांव से की थी। इसके बाद आनंद ने गोसाईंगंज, परेवा, मुबारकपुर पहुंचकर और बाल चौपाल लगाकर स्कूल न जाने वाले सैकड़ों बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आनंद की ख़ासियत यह है कि वह सिर्फ पांच घंटे ही सोते हैं। उनका आधे से ज्यादा समय पढ़ने और पढ़ाने में गुजरता है।

केनफ़ोलिओज़ से ख़ास बातचीत में आनंद बताते हैं कि उस दौरान वे चौथी कक्षा में पढ़ते थे, जब माता-पिता के साथ साल 2011 में महाराष्ट्र घूमने गए। यहीं आनंद ने एक बच्चे को देखा, जो अंधेरे में मोमबत्ती की रौशनी से पढ़ाई कर रहा है, बाद में जो हुआ उसे देखकर आनंद और भी अचम्भे में पड़ गये। दरअसल वही बच्चा वहां संस्कृत और मराठी में आरती कर रहा था। आनंद के पिता ने खुश होकर उसे कुछ पैसे दिए लेकिन भीख न लेने की बात कहकर वह बच्चा वहां से चला गया।

यहीं से आनंद के मन में विचार आया कि ऐसे कई बच्चे होंगे जो प्रतिभावान होंगे लेकिन पढ़ाई के अभाव में वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद से ही उन्होंने पिता से सलाह विमर्श कर गरीबों को पढ़ाने की सोची और फिर शुरू हुआ बाल चौपाल।

आनंद आर्थिक रूप से कमजोर घरों के बच्चों को पढ़ाई की राह देने के अलावा स्वस्थ शरीर के लिए योग सिखाने के अलावा फिटनेस एक्सरसाइज भी कराते हैं। उनकी फिटनेस क्लास की शुरुआत ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’ गीत से होती है और इसके बाद वह दौड़ और योग सिखाते हैं।

आनंद मानते हैं कि गांवों में बच्चों के न पढ़ पाने का मुख्य कारण वहां स्कूलों का न होना है। वह कहते हैं कि जहां स्कूल हैं भी, तो वे इतनी दूर हैं कि घरवाले लड़कों को वहां भेज देते हैं, लेकिन लड़कियाँ को नहीं भेजते। इसके लिए आनंद ने अपने पापा की मदद से राज्यपाल को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने गवर्नर से यह अपील की है कि हर गांव में कम से कम एक स्कूल हो, ताकि गांव की लड़कियां भी पढ़कर आगे बढ़ सकें। आनंद की तमन्ना है कि हर बच्चा पढ़े और हर बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो। 

नन्हे आनंद शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर हैं। हर पर्यावरण दिवस पर वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर पौधारोपण अभियान चलाते है और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए साइकिल रैली निकालकर यह संदेश भी देते हैं कि वाहनों का प्रयोग कम से कम करके अपने शहर के प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

आनंद अभी तो अपने पिता के सहयोग से बाल चौपाल लगाते हैं, लेकिन उनका सपना एक स्कूल खोलना है, जहां गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिल सके। इसके अलावा कुछ गांवों में अस्थायी स्कूल खोलने की भी उनकी योजना है, ताकि लड़कियों को पढ़ाई के लिए दूरदराज न जाना पड़े। वे आईएएस अफसर बनकर प्रशासन की गतिविधियों को भी सुधारना चाहते हैं।

 

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