ग्रामीण बिहार से निकलकर 100 मिलियन डॉलर का साम्राज्य स्थापित करने वाले एक आम इंसान की कहानी

हेनरी फोर्ड और आदित्य झा को देख कर कहा जा सकता है सफलता अपने सास्वत रुप में है। इण्डो-नेपाली-कैनेडियन उद्यमी आदित्य झा ने जितना इस दुनिया से पाया उससे कहीं अधिक वो इसे वापसी के रुप में दे रहें हैं। हेनरी फोर्ड के अनुसार ऐसे ही कर्म को सफलता कहा जा सकता है। उन्होंने कई स्टार्ट अप बिजनेस किए। अपने सौभाग्य का हर कण उन्होंने शुन्य से जोड़ कर बनाया और अब यथोचित रुप में अपने समाज को प्रतिदान कर रहें हैं।

कनाडा में बसे अाप्रवासी भारतीय आदित्य झा ने न सिर्फ अपने नाम कामयाबीयों की इबारत लिखी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक ऐसी विरासत है जिन पर उन्हें गर्व होगा। नेपाल के धनुषा, जनकपुर में एक मैथिली परिवार में जन्में आदित्य का का पालन पोषण बिहार के सीतामढ़ी में हुआ। 3 भाई और 2 बहनों के एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले आदित्य के पिता नेपाल के धनुषा जिले में ही अपनी वकालत की प्रैक्टिस करतें थे। 

बचपन से ही आदित्य को कम्प्यूटर की पढ़ाई के प्रति रुझान रहा। अपने गाँव के ही विद्यालय से माध्यमिक शिक्षा पुरी करने के बाद वे अागे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले आए। एक सादगीपूर्ण जीवन की शुरुआत के बावजुद उन्होंने अपना लक्ष्य हमेशा ऊँचा रखा। उनका विश्वास था कि हर चीज संभव है यदि उसते लिए मन को दृढ़ कर लिया जाए तो। दिल्ली युनिवर्सिटी में हँसराज काॅलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी से गणितिय सांख्यिकी में मास्टर डिग्री हासिल की और कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी से ही कम्प्यूटर साईंस में परास्नातक डिप्लोमा हासिल किया। इसके बाद वे शोध छात्र के रुप में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के स्कूल आॅफ कम्पयूटर एण्ड सिस्टम साईंस गये। वे सीआईटी अल्काटेल से कम्प्यूटर मेनफ्रेम की 6 महिने की ट्रेनिंग के लिए फ्राँस की राजधानी पेरिस भी गये। उन्हें यू.जी.सूी. की ओर से जुनियर और सिनियर स्काॅलरशिप भी मिला और काउन्सिल आॅफ साईन्टिफिक एण्ड इण्डस्ट्रियल रिसर्च की ओर से रिसर्च एशोसिएटशिप भी मिला। भारत में आपातकाल के समय वे काफी मुखर भी रहे वे भारत के सबसे बड़े दिल्ली हरियाणा राज्य छात्र संगठन के जेनरल सिक्रेरट्री के रुप में नेतृत्व किया। इस दरम्यान आदित्य को अपने नेतृत्व क्षमता और लोक कौशल पर अत्मविश्वास बढा।

भारत में अपने करियर की शुरुआत कर वे अनुवर्तित रुप से सिंगापुर, आॅस्ट्रेलिया और कई दक्षिण- पश्चिमी एशियाई देशों में काम किया। 1994 में उन्होंने कनाडा में प्रवास किया और वहाँ बेल कनाडा से जुड़े।  वहाँ उन्होंने आईसोपीया इंक (Isopia Inc) नामक साॅफ्टवेयर कम्पनी की स्थापना की जिसे बाद में सन माइक्रोसिस्टम ने 100 मिलियन डाॅलर से अधिगृहित किया। फिर उन्होंने आॅसेलस इंक (Osellus Inc) नाम से दूसरी साॅफ्टवेयर कंपनी स्थापित की जिसका कार्यालय टोरंटो और बैंकाॅक में खोला। फिर कई बिजनेस को अधिगृहित करके उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में विविधता लाया। 

उन्होंने एक काॅन्फेक्शनरी उत्पादक कंपनी का अधिग्रहण कर उसका नाम कर्मा कैण्डी रखा और इस प्रकार वहाँ की 150 नौकरीयों को सुरक्षित रखा। 2013-2017 तक वे युक्लिड इन्फोटेक के अन्तराष्ट्रीय मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे। फरवरी 2017 में उन्होंने डेवलपमेंट गेटवे से डिजूी मार्केट इन्टरनेशनल का अधिग्रहण किया। परंतु अपनी इन सफलताओ से अधिक आदित्य झा अपने लोक हितैषी कार्यों के लिए जाने जाते हैं। वे शिक्षा को प्रोत्सिहत करने और उद्यमीयों को पोषित करने के उद्देश्य से एक प्राईवेट चैरिटेबल फाउण्डेशन चलाते हैं (POA एजूकेशन फाउण्डेशन) ताकी युवाओ के लिए अधिक से अधिक रोजगार का सृजन हो सके। आदित्य वंचित लोगों को अार्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने में ज्यादा भरोसा रखते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रुप से भारत, नेपाल और कनाडा में कई समाजिक कार्यकलापों को बीड़ा उठाया है। 2012 में उन्हें कनाडा का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द आॅडर आॅफ कनाडा' से सम्मानीत किया गया। 

ऐसा कहा जाता है है कि बहूत कुछ देने के लिए आपके पास बहूत कुछ होना भी चाहिए। यथार्थतः आदित्य झा का जीवन भी ऐसा ही है। अपने जीवन में निर्धारित लक्ष्यों को साध कर अब वे निरंतर सर्वजन उपकारी कार्यों की निर्धारित कर उन्हें पुरा कर रहें हैं। 

 

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